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कृषि मंत्री चौहान ने कहा कि KVK के वैज्ञानिकों को खेतों में जाना होगा, क्‍योंकि असली काम तो वही होना

नई दिल्ली 
 केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने "लैब टू लैंड" पहल को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण घोषणा की. उन्होंने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) के वैज्ञानिकों को अब सप्ताह में तीन दिन अनिवार्य रूप से खेतों में जाकर किसानों के साथ संवाद करना होगा. यह कदम किसानों की वास्तविक समस्याओं को समझने और वैज्ञानिक अनुसंधान को खेतों तक पहुंचने के लिए उठाया गया है. इसके साथ ही, कृषि मंत्री ने स्वयं भी सप्ताह में दो दिन किसानों के बीच जाने की प्रतिबद्धता जताई.

उन्होंने मंत्रालय के अधिकारियों को भी निर्देश दिए कि वे निश्चित समय के लिए खेतों में जाएं और किसानों की चुनौतियों का जमीनी स्तर पर आकलन करें. कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए ये बात कही.

उन्होंने कहा की "असली काम खेतों में ही होता है. यदि वैज्ञानिक और अधिकारी केवल प्रयोगशालाओं या कार्यालयों में बैठे रहेंगे, तो हम किसानों की वास्तविक जरूरतों को नहीं समझ पाएंगे. ज्ञान, अनुसंधान और क्षमता के बीच जो अंतर है, उसे हमें पाटना होगा." यह बयान उन्होंने हाल ही में "विकसित कृषि संकल्प अभियान" के तहत किसानों और वैज्ञानिकों के बीच संवाद को बढ़ावा देने के संदर्भ में दिया.

इस अभियान के तहत, 29 मई से 12 जून 2025 तक देश भर में 2170 वैज्ञानिक टीमों ने 65,000 से अधिक गांवों में 1.08 करोड़ किसानों से मुलाकात की. इस दौरान किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, मृदा स्वास्थ्य, और जलवायु-अनुकूल खेती के बारे में जानकारी दी गई. चौहान ने इस अभियान को "लैब टू लैंड" दृष्टिकोण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया, जिसका उद्देश्य वैज्ञानिक शोध को प्रयोगशालाओं से निकालकर खेतों तक ले जाना है.

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) वैज्ञानिकों को अब नियमित रूप से किसानों के खेतों में जाना होगा ताकि वे स्थानीय मिट्टी, जलवायु, और फसलों की जरूरतों के आधार पर अनुकूलित सलाह दे सकें. चौहान ने जोर देकर कहा कि यह पहल न केवल किसानों की उत्पादकता बढ़ाएगी, बल्कि वैज्ञानिकों को भी किसानों की व्यावहारिक चुनौतियों से अवगत कराएगी.

चौहान ने खुद के बारे में भी बोलते हुए कहा कि वह स्वयं सप्ताह में दो दिन खेतों में बिताएंगे. उन्होंने हाल ही में दिल्ली, पंजाब, गुजरात, और उत्तराखंड जैसे राज्यों में किसानों से मुलाकात की और उनकी समस्याओं को सुना. पिछले दिनों दिल्ली के तीगीपुर गांव में एक "किसान चौपाल" में भी उन्होंने कहा,था कि "किसानों की मेहनत और उत्पादन को समझने के लिए हमें उनके बीच जाना होगा. केवल मंत्रालय में बैठकर स्थिति का सही आकलन नहीं हो सकता."

मंत्री ने कृषि मंत्रालय के अधिकारियों को भी खेतों में जाने का आदेश दिया है. उन्होंने कहा कि नीतियां अब कार्यालयों में नहीं, बल्कि खेतों से निकलेंगी. यह कदम यह सुनिश्चित करेगा कि सरकारी योजनाएं और नीतियां किसानों की वास्तविक जरूरतों पर आधारित हों.

चौहान ने वैज्ञानिकों और किसानों के बीच निरंतर संवाद को "विकसित भारत 2047" के लिए आवश्यक बताया. उन्होंने कहा कि, "हमारा मंत्र है 'एक राष्ट्र, एक कृषि, एक टीम'. वैज्ञानिक, अधिकारी, और किसान मिलकर भारत को कृषि के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाएंगे.

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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