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2017 से पहले यूपी में होती थी गो तस्करी, योगी सरकार ने बंद किए अवैध बूचड़खाने

2017 से पहले यूपी में होती थी गो तस्करी, योगी सरकार ने बंद किए अवैध बूचड़खाने

प्रदेश की साढ़े सात हजार गोशालाओं में 12,58,000 गोवंश का संरक्षण: श्याम बिहारी

प्रदेश में 94,000 हेक्टेयर में गो आधारित प्राकृतिक खेती को बढ़ावा

सीएम योगी के नेतृत्व में गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए चल रहा अभियान

बुंदेलखंड के 7 जिलों में 23,500 हेक्टेयर में हो रही गो आधारित प्राकृतिक खेती

यूपी में 1 करोड़ 90 लाख गोवंश, गो आधारित प्राकृतिक खेती तय करेगी किसानों के भविष्य की दिशा

लखनऊ
 प्रदेश में गो संरक्षण और प्राकृतिक खेती को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में गो तस्करी की घटनाएं होती थीं, लेकिन योगी आदित्यनाथ सरकार आने के बाद अवैध बूचड़खानों पर कार्रवाई कर उन्हें बंद किया गया। इसके बाद से गो संरक्षण की व्यवस्था मजबूत हुई है और आज प्रदेश की साढ़े सात हजार गोशालाओं में लगभग 12,58,000 गोवंश का संरक्षण किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री योगी के मार्गदर्शन में गोशालाओं को बनाया जा रहा आत्मनिर्भर
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए ‘गो आधारित प्राकृतिक खेती मिशन’ तेजी से लागू किया जा रहा है। वर्तमान में पूरे उत्तर प्रदेश में करीब 94,000 हेक्टेयर क्षेत्र में गो आधारित प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है, जबकि बुंदेलखंड के बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, जालौन, झांसी, ललितपुर और महोबा में लगभग 23,500 हेक्टेयर क्षेत्र में यह अभियान संचालित है।

एक गाय से प्रतिदिन 5 लीटर गोमूत्र और 10 किलोग्राम गोबर
श्याम बिहारी गुप्ता ने कहा कि आने वाले समय में गो आधारित प्राकृतिक खेती ही किसानों के भविष्य की दिशा तय करेगी। एक गाय से प्रतिदिन लगभग 5 लीटर गोमूत्र और 10 किलोग्राम गोबर प्राप्त होता है, जो प्राकृतिक खेती के लिए अत्यंत उपयोगी है। प्रदेश में करीब 1 करोड़ 90 लाख गोवंश होने के कारण इस क्षेत्र में अपार संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि गोमूत्र और गोबर से तैयार जैविक उत्पादों के उपयोग से किसानों की लागत घट रही है और उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार हो रहा है। इससे जहां किसानों की आय बढ़ रही है, वहीं मिट्टी की उर्वरता भी संरक्षित हो रही है।

7,716 स्थानों पर गो संरक्षण
प्रदेश में 7,716 स्थानों पर गो संरक्षण का कार्य किया जा रहा है और गोशालाएं अब जैविक खाद उत्पादन के केंद्र के रूप में विकसित हो रही हैं। प्राकृतिक खेती के इस मॉडल से न केवल किसानों को लाभ मिल रहा है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिल रही है।

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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