राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय

यूक्रेन युद्ध के तीन साल बाद भी शांति की उम्मीदें धुंधली, हिंसक टकराव में आया उछाल

वाशिंगटन।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) ने आगाह किया है कि रूसी सैन्य बलों द्वारा यूक्रेनी आम नागरिकों को हवाई हमलों के जरिए निशाना बनाया जाना जारी है। इसमें लंबी दूरी की मिसाइलों व ड्रोन विमानों समेत अन्य बमों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

यूएन कार्यालय ने जोर देकर कहा कि अन्य स्थानों पर आम लोगों की तरह यूक्रेनी नागरिकों के पास भी शांति पाने का अधिकार है। मानवाधिकार मामलों के लिए उप-उच्चायुक्त नाडा अल-नशीफ ने बुधवार को जिनीवा में मानवाधिकार परिषद को यूक्रेन में मानवाधिकारों की स्थिति पर आयोजित एक बैठक में बताया कि इन हमलों के जरिए यूक्रेन के पूर्वी क्षेत्र में और अधिक इलाके को अपने नियंत्रण में लेने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन पर रूसी सैन्य बलों के पूर्ण आक्रमण के तीन वर्ष पूरे होने से पहले एक शांतिपूर्ण निपटारे की दिशा में प्रगति धुंधली नजर आ रही है, जबकि टकराव में खतरनाक तेजी आई है। यह रिपोर्ट पिछले वर्ष 1 सितंबर से 30 नवंबर की अवधि पर आधारित है। रूसी सैन्य बलों के हमलों में अब तक 574 नागरिकों की जान जा चुकी है, जोकि पिछले वर्ष की तुलना में 30 प्रतिशत अधिक है। जुलाई 2022 के बाद सितम्बर महीने में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में आम नागरिक हताहत हुए। उन्होंने कहा कि रूसी बमबारी में जल आपूर्ति, तापन व्यवस्था व परिवहन सेवाओं समेत बुनियादी ढांचे को भीषण क्षति पहुंची है। यूक्रेन के ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर भी बड़े हमले किए गए हैं।

मानवतावादी कानून का हनन
OHCHR उप-उच्चायुक्त द्वारा लगाए गए इन आरोपों को रूसी प्रतिनिधिमंडल ने खारिज करते हुए यूक्रेनी सैन्य बलों पर रूस के विभिन्न क्षेत्रों में आतंकी कृत्यों को अंजाम देने का आरोप लगाया। यूक्रेनी प्रतिनिधि ने रूसी सैन्य बलों के घातक हमलों की निंदा की। नए साल की पूर्व संध्या पर राजधानी कीव पर हुए हमलों में 100 ड्रोन विमानों का इस्तेमाल किया गया, जिसमें दो लोग मारे गए व सात घायल हुए। उप उच्चायुक्त अल-नशीफ ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून, मानवतावादी कानून के बढ़ते उल्लंघन मामलों के प्रति सचेत किया और कहा कि युद्ध अपराधों को अंजाम दिए जाने की भी आशंका है। यूक्रेनी युद्धबंदियों ने व्यापक स्तर पर व्यवस्थागत ढंग से यातना दिए जाने की बात कही है। उन्हें बुरी तरह मारा-पीटा गया, बिजली के झटके दिए गए, गला घोंटा गया और लम्बे समय तक एकांत कारावास में रखा गया। पुरुष व महिला युद्धबंदियों ने दुष्कर्म, जबरन नग्न किए जाने समेत अन्य प्रकार की यौन हिंसा का शिकार बनाए जाने के भी आरोप लगाए हैं।

बिना सुनवाई के ही मौत
नाडा अल-नशीफ ने चिंता जताई कि रूसी सैन्य बलों द्वारा पकड़े गए यूक्रेनी सैन्यकर्मियों को बिना सुनवाई के ही मार दिए जाने के मामलों में वृद्धि दर्ज की गई है। बिना अदालती कार्रवाई के जान से मार देना एक युद्ध अपराध है। हमारे कार्यालय ने इस अवधि के दौरान 19 अलग-अलग घटनाओं में ऐसे 62 मामलों पर जानकारी जुटाई है और ऐसे पांच मामलों की पुष्टि की है। यूक्रेन में संयुक्त राष्ट्र निगरानी मिशन के अनुसार, फरवरी 2022 के बाद से अब तक हिंसक टकराव में 12,300 आम नागरिकों की मौत हुई है, जिनमें 650 से अधिक बच्चे हैं। 27 हजार से अधिक लोग घायल हुए हैं। साथ ही, 700 से अधिक मेडिकल केंद्रों, 1500 से अधिक स्कूलों व कॉलेज, हिंसा में क्षतिग्रस्त या पूर्ण रूप से ध्वस्त हो गए हैं।

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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