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बढ़ई-प्लंबर को परमानेंट रेजिडेंसी क्यों दे रहा कनाडा

कनाडा

कनाडा में परमानेंट रेजिडेंसी (PR) को लेकर नए-नए प्रतिबंधों का ऐलान किया गया। इस वजह से भारतीयों समेत विदेशी वर्कर्स के लिए उत्तर अमेरिका के इस देश में बसना मुश्किल हो चुका है। भारतीयों की परेशानी सबसे ज्यादा बढ़ गई है, क्योंकि वे बड़ी संख्या में कनाडा में काम करने जाते हैं। हालांकि, हर समस्या का कोई न कोई समाधान होता है और PR की परेशानी का हल भी खुद कनाडा ही लेकर आया है। कनाडा के नए परमानेंट रेजिडेंसी प्रोग्राम का ऐलान किया है।

कनाडाई सरकार की तरफ से जिस PR प्रोग्राम का ऐलान हुआ है, वह आसानी से भारतीय वर्कर्स को देश में बसने की इजाजत देगा। सबसे अच्छी बात ये है कि इस प्रोग्राम इसलिए लाया गया है, क्योंकि एक सेक्टर में वर्कर्स की कमी हो गई है। आमतौर पर कनाडा में सेक्टर वाइज PR प्रोग्राम तभी लाए जाते हैं, जब वर्कर्स की कमी हो। आइए इस परमानेंट रेजिडेंसी प्रोग्राम के बारे में जानते हैं और समझते हैं किस तरह से इससे भारतीय आवेदकों को फायदा होने वाला है।

क्या है PR देने वाला कनाडा का नया प्रोग्राम?
दरअसल, कनाडा की सरकार कंस्ट्रक्शन वर्कर्स को परमानेंट रेजिडेंसी प्रोग्राम लेकर आई है। इस प्रोग्राम के जरिए स्किल कंस्ट्रक्शन वर्कर्स को देश में बुलाकर घरों के संकट को दूर करने का प्लान है। सरकार इस प्रोग्राम के जरिए कनाडा में मौजूद लगभग 6000 अवैध रूप से रहने वाले कंस्ट्रक्शन वर्कर्स को PR देगी, जबकि 14000 विदेशी वर्कर्स को परमानेंट रेजिडेंसी दी जाएगी। टेंपरेरी फॉरेन वर्कर्स (TFW) को बिना स्टडी परमिट अप्रेंटिसशिप प्रोग्राम में दाखिला लेने की भी इजाजत दी जाएगी।

अभी तक बहुत से विदेशी वर्कर कंस्ट्रक्शन, हेल्थकेयर जैसे सेक्टर्स में बिना स्टडी परमिट अप्रेंटिसशिप नहीं कर पाते थे। आसान भाषा में कहें तो इस प्रोग्राम से कंस्ट्रक्शन वर्कर्स को सीधे कनाडा में PR मिलेगा, फिर वो देश में हों या फिर विदेश से काम करने आएं। बहुत से विदेशी छात्र कंस्ट्रक्शन सेक्टर में जॉब भी कर रहे हैं, जबकि उनका वर्क परमिट एक्सपायर हो चुका है या फिर होने वाला है। इन छात्रों के पास भी इस नए प्रोग्राम के जरिए कनाडा में PR पाने का ऑप्शन होगा।

कनाडा को नया प्रोग्राम क्यों लाना पड़ा?
कनाडा इस वक्त घरों की किल्लत से जूझ रहा है। लोगों के रहने के लिए पर्याप्त घर नहीं हैं। ऐसे में सरकार ने 2030 तक 10 लाख नए घर बनाने का टारगेट सेट किया है। हालांकि, कनाडा को स्किल लेबर की कमी से भी जूझना पड़ रहा है, खासतौर पर कंस्ट्रक्श सेक्टर में। ऐसे में सरकार के लिए घरों के टारगेट को पूरा करना मुमकिन नहीं है। यही वजह है कि अभी सरकार को डॉक्टर्स-इंजीनियर्स की नहीं, बल्कि बढ़ई-प्लंबर की जरूरत है। वर्तमान में कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री में काम कर रहे 23% वर्कर्स विदेशी हैं। इनमें से बहुत से छात्र हैं, जबकि ऐसे लोगों की संख्या भी अधिक है, जो अवैध रूप से देश में हैं।

इस नए PR देने वाले प्रोग्राम को लाने का मकसद ही लेबर शॉर्टेज को कम करना है और स्किल वर्कर्स को देश में लाना है। PR प्रोग्राम से विदेशी वर्कर्स वैलिड तरीके से देश में दाखिल हो पाएंगे। TFW को कंस्ट्रक्शन सेक्टर में अप्रेंटिसशिप प्रोग्राम करने की इजाजत देकर सरकार ने विदेशी वर्कर्स के लिए ट्रेनिंग और एक्सपीरियंस हासिल करने का रास्ता खोल दिया है। इस तरह वे ना सिर्फ कंस्ट्रक्शन सेक्टर में बेहतर ढंग से योगदान दे पाएंगे, बल्कि आसानी से परमानेंट रेजिडेंसी भी पा सकेंगे।

भारतीयों को कैसे होगा फायदा?
भारतीय छात्र जो पहले से ही कनाडा के कंस्ट्रक्शन सेक्टर में काम कर रहे हैं, उन्हें कुछ निश्चित मानदंडों को पूरा करना होगा। ऐसे करने पर वे नए प्रोग्राम के तहत परमानेंट रेजिडेंसी के लिए आवेदन के योग्य होंगे। भारतीय छात्र सिविल इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी, कंस्ट्रक्शन एस्टिमेशन, बढ़ईगीरी, ईंट बिछाने, प्लंबिंग, छत निर्माण, शीट मेटल जैसे काम कर रहे हैं। इन छात्रों के पास ऑप्शन होगा कि वे अब PR हासिल कर पाएं।

कनाडा का फोकस मुख्यतौर पर स्किल वर्कर्स पर है, जिसका मतलब है कि अप्रेंटिसशिप के जरिए फॉर्मल ट्रेनिंग हासिल करने वाले छात्रों को एक्सप्रेस एंट्री सिस्टम, प्रोविंशियल नॉमिनी प्रोग्राम (PNP) या कंस्ट्रक्शन वर्कर्स के लिए नए PR प्रोग्राम जैसे कार्यक्रमों के जरिए परमानेंट रेजिडेंसी के लिए आवेदन करते समय बढ़त मिलेगी। कनाडा में स्किल वर्कर्स की वैसे भी सबसे ज्यादा डिमांड है, खासतौर पर कंस्ट्रक्शन सेक्टर में।

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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