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पिता आज भी देखा रहे आज भी है श्रद्धा वॉल्कर के अंतिम संस्कार की रहा

नई दिल्ली
आपको श्रद्धा बाल्कर हत्याकांड तो याद होगा। किस तरह से एक लड़की को प्यार के जाल में फंसाया गया और फिर कर दी गई निर्मम हत्या। इस हत्याकांड के बाद दिल्ली में मानों हड़कंप सा मच गया। लेकिन श्रद्धा के पिता को आज भी बेटी के अंतिम संस्कार का इंतजार कर रहे हैं। उनका आज भा यही सवाल है कि आखिर कब मिलेगा मेरी बेटी को इंसाफ…. इसी पूरे मामले में आज हम आपको इस खबर का पूरा विशलेषण करने जा रहे हैं।

छोटे से बाक्स में बंद है श्रद्धा का शव

दिल्ली में एक पुलिस थाने के मालखाने में एक छोटा सा बक्सा रखा है, जिसमें बंद है श्रद्धा वॉल्कर। जिसे आज भी अपने अंतिम संस्कार का इंतजार है। ये वही श्रद्धा वॉल्कर है, जिसे उसके प्रेमी ने मौत की नींद सुला दिया था और लाश के टुकड़ों को कई दिनों तक फ्रीज में बंद रखा था।

दो साल पूरे होने को हैं

इस मुकदमें को शुरू हुए करीब दो साल पूरे होने वाले हैं। लेकिन अब भी इस केस हर दिन सुनवाई का इंतजार था। अब जाकर अदालत ने फैसला किया है कि मार्च के महीने से अब हर दिन इस केस की सुनवाई होगी। हालांकि इस केस में अभी तक बहुत सी कार्रवाई अधूरी है।

महरौली थाने का है पूरा मामला

महरौली थाने से लगभग 4 किलोमीटर दूरी पर मौजूद है साकेत कोर्ट। 1 जून 2023 यानी लगभग पिछले पौने दो साल से इसी कोर्ट में श्रद्धा केस की सुनवाई लंबित है। इस सुनवाई के दौरान ऐसा कई बार हुआ जब एक छोटे से बक्से में बंद श्रद्धा को महरौली थाने के मालखाने से निकाल कर कोर्ट में पेश किया गया।

यह कहना है पिता का

श्रद्धा के पिता विकास वॉल्कर को नवंबर 2022 में पहली बार पता चला था कि उनकी बेटी अब इस दुनिया में नहीं है। उनकी बेटी श्रद्धा के इसी दोस्त यानी आफताब पूनावाला ने श्रद्धा का कत्ल करने के बाद लाश के टुकड़ों को महरौली के जंगलों में किस्तों में ठिकाने लगा दिया था। लगभग सवा दो साल से विकास वॉल्कर को पता है कि उनकी बेटी श्रद्धा अब इस दुनिया में नहीं है। श्रद्धा के नाम पर कुछ है तो छोटे से बक्से में बंद उसकी चंद हड्डियां। मगर इस बदकिस्मत बाप की बदनसीबी देखिए कि श्रद्धा तो छोड़िए उसकी लाश के बचे खुचे टुकड़े तक उन्हें अंतिम संस्कार के लिए नहीं सौंपे गए।

दो साल काट रहे हैं कोर्ट के चक्कर

बीते पौने दो साल से जब जब विकास वॉल्कर साकेत कोर्ट में हाजिर होते हैं, तो बस कभी कभार कोर्ट रूम के अंदर ही उन्हें बक्से में बंद श्रद्धा नजर आ जाती है। न जाने ये कैसा मजाक है जो कानून के नाम पर एक बेबस बाप के साथ किया जा रहा है। जिस बाप की जवान बेटी को पहले ही उससे छीन लिया गया हो, जिसके कत्ल और कत्ल के तरीके की कहानी को सुन कर श्रद्धा को न जानने वाले भी गमजदा हो जाते हों, उसी श्रद्धा के अंतिम संस्कार के लिए पिछले सवा दो साल से उसके बाप को इंतजार कराया जा रहा है।

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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