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जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे- अयोध्या-बरेली समेत यूपी के इन जिलों में सरकारी जमीन पर वक्फ का कब्जा

लखनऊ-उत्तर प्रदेश में शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड जहां मुस्लिम समाज के गरीब लोगों की मदद के लिए वक्फ की गई बेशकीमती जमीनों की हेराफेरी करने का माध्यम बन गए, वहीं, सरकारी संपत्तियों और धार्मिक स्थलों पर भी गलत तरीके से उनका दावा और कब्जा होता गया। प्रदेश में दोनो वक्फ बोर्ड में कुल 1.32 लाख संपत्तियां दर्ज हैं। शासन स्तर से करायी गयी एक जांच की रिपोर्ट के अनुसार इसमें भी करीब 11712 एकड़ की 57792 संपत्तियां सरकारी हैं। हालांकि वक्फ काउंसिल के रिकार्ड की मानें तो संपत्तियों के पंजीकरण में भी दोनों वक्फ बोर्ड ने गोलमाल किया है।

काउंसिल की रिपोर्ट के अनुसार दोनों वक्फ बोर्ड के पास 1.32 लाख नहीं, 2.15 लाख संपत्तियां पंजीकृत हैं। उत्तर प्रदेश में सरकारी जमीनों पर गलत तरीके से अवैध वक्फ के मामले की जांच पिछले साल करायी गयी थी। पिछले साल संसद में पेश हुए वक्फ संशोधन विधेयक के बाद गठित हुई संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) जब लखनऊ पहुंची तो यह रिपोर्ट साझा की गई थी।

इस रिपोर्ट के अनुसार सार्वजनिक उपयोग की भूमि और शत्रु संपत्ति पर अवैध तरीके से वक्फ बोर्ड अपना दावा कर रहे हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि प्रदेश के 40 ऐसे जिले हैँ जिनकी सैकड़ों संपत्तियां शिया व सुन्नी वक्फ बोर्ड के रिकार्ड में तो दर्ज हैं नहीं, लेकिन तहसील रिकार्ड में उनका नामांतरण नहीं किया गया है।

इन जिलों में फिरोजाबाद, मैनपुरी, मथुरा, अलीगढ़, एटा, कासगंज, अयोध्या, आजमगढ़, देवरिया, कुशीनगर, महाराजगंज, जालौन, ललितपुर, औरैया, फर्रुखाबाद, कन्नौज, कानपुर देहात, हरदोई, रायबरेली, बुलंदशहर, गाजियाबाद, हापुड़,बलिया, बदायूं, शाहजहांपुर, सिद्धार्थनगर, बहराइच, बलरामपुर, गोंडा, श्रावस्ती, भदोही, मीरजापुर, सोनभद्र, बिजनौर,कौशांबी, प्रयागराज, चंदौली, जौनपुर, वाराणसी और महोबा शामिल हैं।

वक्फ के रिकार्ड में भी हेराफेरी
उत्तर प्रदेश में दोनों वक्फ बोर्ड के पास पंजीकृत संपत्तियों को लेकर ही सवाल उठ रहे हैं। सुन्नी वक्फ बोर्ड के पास 1.24 लाख और शिया वक्फ बोर्ड के पास आठ हजार संपत्तियां पंजीकृत हैं। वक्फ काउंसिल की रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश में सुन्नी वक्फ बोर्ड के पास दो लाख और शिया वक्फ बोर्ड में 15 हजार संपत्तियां पंजीकृत हैं।

इसकी पुष्टि शासन स्तर से हुई जांच की रिपोर्ट करती है। वक्फ बोर्ड के रिकार्ड के मुताबिक महोबा में एक भी संपत्ति दर्ज नहीं है। वहीं सोनभद्र में एक संपत्ति दर्ज है। जिलास्तर के गजट के अनुसार महोबा में 245 और सोनभद्र में 171 वक्फ संपत्तियां हैँ। दोनों वक्फ बोर्ड की दर्ज सपंत्तियों की जानकारी पोर्टल पर उपलब्ध कराने के लिए एक निजी कंपनी को जिम्मेदारी दी गई थी। कंपनी ने पूरा डाटा ही फीड नहीं किया है।

नहीं हो पा रहा आडिट
वक्फ बोर्ड की कार्यशैली को लेकर पहले भी सवाल उठे हैँ। वर्ष 1976 में केंद्र की कांग्रेस की सरकार ने वक्फ संपत्तियों की जांच करायी थी, जिसमें मुतव्वली को अनावश्यक रूप से अधिक अधिकार को लेकर सवाल उठाए थे। वर्ष 2005 में सच्चर कमेटी ने भी वक्फ संपत्तियों का आडिट कराने की सिफारिश की थी।

वर्ष 2017 में मेरठ-दिल्ली रोड पर अब्दुल्लापुर और कंकरखेड़ा में वक्फ की डेढ़ लाख बीघा जमीन को गलत तरीके से बेच दिया गया था। तत्कालीन अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री मोहसिन रजा ने तब इस मामले में एफआइआर दर्ज कराने के साथ वक्फ बोर्ड की सीएजी जांच कराने के लिए पत्र लिखा था। उस पर सीएजी की ओर से प्रदेश के दोनों वक्फ बोर्ड को आडिट में सहयोग करने के लिए बार-बार पत्र भेजे गए। हालांकि दोनों वक्फ बोर्ड ने आडिट में सहयोग ही नहीं किया।

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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