
भिलाई-स्थानीय श्री शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में आई क्यू ए सी एवं आई जी पी ए वूमेन फोरम के तत्वाधान में एक सप्ताह का फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम आयोजित किया गया।उच्च शिक्षा में गुणवत्ता वृद्धि के अंतर्गत शिक्षण और मूल्यांकन पद्धति पर विशेषज्ञों के व्याख्यान आयोजित हुए। आई क्यू ए सी की समन्वयक डॉ स्वर्णली दास पॉल ने जानकारी देते हुए बताया कि उद्घाटन सत्र में गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर के डॉ विवेकानंद मंडल ने अपना उदबोधन दिया।उन्होंने प्रभावी शिक्षण शैली और शोध कार्य की गुणवत्ता पर फोकस किया।
उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा में शिक्षण,अध्ययन और विकास प्रक्रिया को मजबूत बनाने के लिए शिक्षण विधियों में नवाचार को बढ़ाना होगा और शिक्षकों के प्रशिक्षण ,तकनीक के बेहतर उपयोग की आवश्यकता है। विधार्थियों को आत्मांकलन केलिए प्रेरित करने उन्हें ज्ञान,कौशल और मूल्य सीखना होगा। शोध कार्य में नई तकनीक और पद्धति का उद्योग करते हुए बेहतर शोध परियोजनाओं पर कार्य किया जाना चाहिए।
आई आई टी भिलाई के प्राध्यापक डॉ संजीव बैनर्जी ने रिसर्च प्रोजेक्ट के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि हमें ऐसे रिसर्च प्रोजेक्ट बनाना चाहिए जिसका रोड मैप स्पष्ट हो और उसकी उपयोगिता सार्थक रहे।उन्होंने विभिन्न प्रकार की पद्धतियों की चर्चा करते हुए रिपोर्ट राइटिंग पर भी प्रकाश डाला।आई पीजी ए की छत्तीसगढ़ इकाई की अध्यक्ष डॉ मंजू सिंह रावल ने अपने उद्बोधन में फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम की उपयोगिता पर प्रकाश डाला और कहा कि उच्च शिक्षा में गुणवत्ता वृद्धि के लिए नई प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जाए,पाठ्यक्रम में बदलाव किया जाए तो बेहतर परिणाम मिलेंगे।
आई आई टी भिलाई के प्राध्यापक डॉ अभिषेक अधिकारी ने मॉडल सिलेक्शन पर और पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय की प्राध्यापक डॉ प्रीति के. सुरेश ने विधार्थियों की भूमिका की चर्चा करते हुए कहा कि हमें सीखने की पद्धतियों को बढ़ावा देना होगा,विधार्थियों को उनकी गलतियों को बताना होगा जिससे वे उसे सुधार सके।फार्मेसी की प्रोफेसर डॉ गुंजन जैसवानी ने शिक्षण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की उपयोगिता और डॉ राजेश चौधरी ने डिजिटल टूल्स पर व्याख्यान दिया जिसे सभी ने सराहा और प्रश्नों के माध्यम से जानकारी हासिल की।
कार्यशाला में विश्वविद्यालय की कुलसचिव डॉ स्मिता सिलेट ने स्वागत भाषण दिया।उन्होंने कहा कि गुणवत्ता वृद्धि में मूल्यांकन प्रणाली को बेहतर बनाना होगा साथ ही फीड बैक पर विशेष ध्यान देते हुए नई विकसित पद्धतियों का प्रयोग करना होगा। शिक्षण पद्धति रुचि पूर्ण और आत्ममूल्यांकन से जुड़ी हो।कार्यशाला में बड़ी संख्या में छात्र और शिक्षकों ने भाग लिया।विश्वविद्यालय के शोध छात्रों ने बड़े उत्साह से भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ जयश्री ने किया और आभार प्रदर्शन डॉ स्वर्णली दास पॉल ने किया।इस अवसर पर विश्वविद्यालय के डायरेक्टर विकास डॉ सुशील चंद्र तिवारी,डिप्टी रजिस्ट्रार डॉ श्रुति तिवारी उपस्थित थे।