राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय

ऑर्डिनेंस फैक्ट्री जबलपुर के रिटायर्ड कर्मचारियों का दावा है कि केवल एक फैक्ट्री के गोला बारूद से पूरा पाकिस्तान नष्ट हो सकता

जबलपुर
स्वतंत्रता के बाद से अब तक भारत की कोई भी लड़ाई ऐसी नहीं रही, जिसमें जबलपुर का योगदान ना रहा हो. जबलपुर की ऑर्डिनेंस फैक्ट्री के कर्मचारी बताते हैं कि भारत पाकिस्तान के हर युद्ध में यहां बने हथियारों ने तबाही मचाई. फैक्ट्री के कर्मचारियों का दावा है कि पाकिस्तान के लिए एक फैक्ट्री का गोला बारूद ही पर्याप्त है. भारत में ऐसी 12 फैक्ट्रियां हैं. फैक्ट्री के रिटायर्ड कर्मचारियों का कहना है कि जरूरत पड़ी तो वह फिर से काम पर लग जाएंगे लेकिन युद्ध में पीछे नहीं हटेंगे.

जबलपुर में हैं 4 फैक्ट्रियां

जबलपुर की ऑर्डिनेंस फैक्ट्री खमरिया 1942 में अंग्रेजों द्वारा स्थापित की गई थी. इस फैक्ट्री की स्थापना के बाद से ही भारतीय सेना को फैक्ट्री ने हर जरूरी सामान बनाकर दिया है. जबलपुर में 4 फैक्ट्रियां हैं. ऑर्डिनेंस फैक्ट्री खमरिया, व्हीकल फैक्ट्री खमरिया, गन गेराज फैक्ट्री खमरिया और ग्रे आइरन फाऊंडरी. ऑर्डिनेंस फैक्ट्री के कर्मचारियों का दावा है कि केवल एक फैक्ट्री गोला बारूद का जितना उत्पादन कर रही है, उससे पूरा पाकिस्तान नष्ट हो सकता है. ऐसी हमारे पास 12 फैक्ट्रियां हैं.

'हर लड़ाई में यहां बने गोला-बारूद का इस्तेमाल'

फैक्ट्री के रिटार्यड अधिकारी नेम सिंह बताते हैं कि "भारत-पाकिस्तान की 1965 की लड़ाई हो, बांग्लादेश की लड़ाई हो या भारत और चीन की लड़ाई हो, ऐसी कोई भी लड़ाई नहीं थी जिसमें जबलपुर की ऑर्डिनेंस फैक्ट्री के बने गोला बारूद का इस्तेमाल नहीं हुआ. बल्कि कुछ युद्ध तो ऐसे हैं जिनमें केवल जबलपुर की फैक्ट्री का ही बना गोला बारूद इस्तेमाल किया गया. यह तो पुराने जमाने की बात है. अभी जब पुलवामा में भारतीय जवान शहीद हुए और भारत में पाक अधिकृत कश्मीर में एयर स्ट्राइक की गई थी, इस दौरान जो बम गिराए गए थे वो जबलपुर के ऑर्डिनेंस फैक्ट्री खमरिया के ही बने हुए थे."

'लड़ने के लिए मजबूत हाथ और चाहिए दमदार हथियार'

फैक्ट्री के रिटार्यड अधिकारी नरेंद्र तिवारी का कहना है कि "युद्ध केवल सीमा पर नहीं लड़ा जाता बल्कि इन फैक्ट्री में भी लड़ा जाता है. सीमा पर जो सैनिक लड़ाई लड़ रहा है उसके पास यदि हथियार नहीं होंगे तो वह लड़ाई कैसे लड़ेगा. लड़ने के लिए मजबूत हाथ और दमदार हथियार चाहिए और उनका निर्माण यहां होता है."

छोटी गोली से 1000 पाउंड तक के बनते हैं बम

ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियां छोटी पिस्टल में लगने वाली गोलियों से लेकर 1000 पाउंड वजन का बम भी बनाती है. जबलपुर की ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में मशीनगन, छोटी तोप, बड़ी तोप सभी में इस्तेमाल होने वाले गोले बनाए जाते हैं. पूरे साल इन गोलों को बनाने के दौरान कर्मचारी घायल होते हैं. क्योंकि इनमें भारी मात्रा में बारूद भरी जाती है जिसमें हल्की सी चिंगारी की वजह से विस्फोट हो जाता है. कई बार कर्मचारियों की मौत तक हो जाती है.

सेना के हर प्रकार के वाहनों का निर्माण

जबलपुर की व्हीकल फैक्ट्रियां सेना के इस्तेमाल में आने वाले रॉकेट लांचर ले जाने वाले हैवी वाहन, स्टालिन, एलटी वायर ब्राउजर, रसोई टैंकर, एम्बुलेंस एंटी लैंड माइन व्हीकल, धनुष, जनरेट र सारंग तो त्रिशूल ब्लड ग्रुप गाड़ियां, बस, ट्रक जैसे कई व्हीकल बनाती हैं. यही भारतीय सेना की ताकत है.

धनुष और सारंग तोप का निर्माण

कारगिल युद्ध के दौरान जिस तोप ने पाकिस्तानी सेना में खौफ फैला दिया था, बीते कई सालों से उस पर रिसर्च चल रही थी. आज हमारे पास धनुष और सारंग जैसी अपग्रेड तोप हैं. इस तोप की मारक क्षमता कई गुना बढ़ चुकी है. वह जमीन से ही आसमान में उड़ रहे विमान को गिरा सकती है. 50 किलोमीटर दूर के लक्ष्य को मार सकती है और उसका प्रहार इतना खतरनाक होता है कि उसका गोला जहां गिरता है वहां जमीन के भीतर गड्ढा हो जाता है. जबलपुर के फायरिंग रेंज में उनकी टेस्टिंग हुई है और अभी यह घातक हथियार भारतीय सीमा पर भारत की रक्षा कर रहा है.

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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