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भोपाल में आरबीआई ऑफिसर पर रेप का केस, पीड़‍िता बोली- ‘मेरी सुनवाई नहीं हो रही’

भोपाल।

भारतीय रिजर्व बैंक के भोपाल मुख्यालय में तैनात एक सहायक प्रबंधक पर उसकी पूर्व सहकर्मी ने दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया है। पुलिस कार्रवाई की जगह पीड़िता को ही थाने का चक्कर लगवा रही है। पीड़िता का आरोप है कि वह जब भी अपने केस की प्रगति जानने थाने जाती है वहां की थाना प्रभारी बात को घुमा देती हैं।

अभी उन्होंने कहा है कि आरोपित का ट्रांसफर मुंबई हो गया और उच्च अधिकारी उन्हें वहां जाने की अनुमति नहीं दे रहे हैं। ऐसे में कार्रवाई अटकी हुई है। पीड़िता का दावा है कि आरोपित अब भी भोपाल कार्यालय में ही है। वह परिवार के साथ शहर में ही रह रहा है। पीड़िता के मुताबिक उसने वर्ष 2013 में आरबीआई में नौकरी शुरू की थी। शुरुआत में उसकी पोस्टिंग मुंबई में थी। इसी दौरान मूल रूप से महाराष्ट्र के बुलढाणा निवासी आरोपित भी वहां नियुक्त हुआ था। कुछ समय बाद दोनों का भोपाल ट्रांसफर हो गया था और दोनों यहां एक ही कैंपस में रहते थे। 2017 में आरोपित ने पीड़िता को बताया कि उसके घर में पार्टी है और सभी दोस्त आएंगे।

नशीला पदार्थ मिलाकर किया रेप
जब पीड़िता वहां पहुंची तो सिर्फ आरोपित ही मौजूद था। उसने जूस में नशीला पदार्थ मिलाकर पिला दिया। वह बेहोश हो गई तो उसका फायदा उठाकर उसने दुष्कर्म किया। आरोपित ने उसका वीडियो भी बना लिया था और उससे शारीरिक संबंध बनाने का दबाव बना रहा था। इससे वह काफी डरी हुई थी। वर्ष 2021 में उसने पुलिस को इसकी शिकायत की। तीन साल तक लगातार महिला थाना के चक्कर काटने के बावजूद पीड़िता की सुनवाई नहीं हुई थी। महिला अपनी फरियाद लेकर पुलिस आयुक्त के पास पहुंची तो उनके निर्देश पर इस साल 28 नवंबर को मामला दर्ज हुआ।

महिला के खिलाफ चोरी की एफआईआर कर चुका है आरोपित
बताया जा रहा है कि आरोपित ने दुष्कर्म का केस दर्ज कराने वाली महिला पर चोरी की एफआईआर दर्ज कराई थी। यह रिपोर्ट 2019 में दर्ज हुई थी। इसी आधार पर आरबीआई ने महिला को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था। मामला न्यायालय में लंबित है।

दूसरे राज्य में गिरफ्तारी की मांग आती है तो अनुमति दी जाती है
पीड़‍िता की शिकायत पर एफआईआर तो दर्ज हो गई है। मेरे संज्ञान में यह नहीं है कि महिला थाने ने दूसरे राज्य में गिरफ्तारी के लिए कोई अनुमति मांगी है। इसको चेक करा लेंगे। अगर किसी थाने से ऐसी मांग आती है तो अनुमति दी जाती है। – हरिनारायणचारी मिश्र, पुलिस आयुक्त, भोपाल

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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