धार्मिक

आज से माघ मेला की शुरुआत, जानें पवित्र स्नान की तिथियाँ और उनका धार्मिक महत्व

प्रयागराज 
नए साल के आगमन के साथ ही साल 2026 को लेकर धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से खास उत्साह देखने को मिल रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह वर्ष सूर्य ग्रह के प्रभाव वाला माना जा रहा है, ऐसे में लोगों के जीवन, स्वास्थ्य और कर्मों पर सूर्य की ऊर्जा का विशेष असर पड़ने की मान्यता है। इसी शुभ संयोग के साथ वर्ष की शुरुआत में लगने वाला माघ मेला भी आरंभ होने जा रहा है। यह मेला हर साल माघ मास में आयोजित किया जाता है और इसकी शुरुआत पौष पूर्णिमा से मानी जाती है।

माघ मेले के दौरान देश-विदेश से श्रद्धालु प्रयागराज संगम पहुंचकर कल्पवास करते हैं। मान्यता है कि इस अवधि में किया गया स्नान, दान और तपस्या अक्षय पुण्य प्रदान करती है। प्रशासन और मेला समिति द्वारा इसकी तैयारियां बीते कई महीनों से की जा रही थीं। करीब 40 से 45 दिनों तक चलने वाला यह भव्य धार्मिक आयोजन आस्था और परंपरा का अनूठा संगम माना जाता है। आइए जानते हैं माघ मेले के दौरान कौन-कौन सी तिथियां सबसे अधिक महत्वपूर्ण मानी जाती हैं, जिन पर स्नान और दान का विशेष फल प्राप्त होता है।

माघ मेला 2026 कब से कब तक रहेगा?

वर्ष 2026 में माघ मेले की शुरुआत आज यानी 3 जनवरी 2025 से हो रही है। इस दिन पौष पूर्णिमा का पहला पवित्र स्नान किया जाएगा। यह मेला करीब 40 से अधिक दिनों तक चलेगा और इसका समापन 15 फरवरी 2026, महाशिवरात्रि के दिन होगा। इस पूरे कालखंड में कई प्रमुख स्नान पर्व, धार्मिक अनुष्ठान और त्योहार मनाए जाएंगे, जिनमें मकर संक्रांति और माघ पूर्णिमा विशेष महत्व रखते हैं।

संगम स्नान का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यता है कि माघ मेले के दौरान संगम में स्नान करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। शास्त्रों के अनुसार माघ माह में किया गया स्नान, दान और जप कई गुना फल देता है। इसी कारण इस दौरान साधु-संत, कल्पवासी और श्रद्धालु संगम तट पर निवास कर साधना, ध्यान और पूजा-पाठ करते हैं।
कल्पवास और साधना का विशेष महत्व

माघ मेले में कल्पवास का विशेष महत्व होता है। कल्पवासी इस पूरे माह संगम तट पर रहकर सात्विक जीवन अपनाते हैं। वे ब्रह्म मुहूर्त में स्नान, सूर्य उपासना, हवन, जप और ध्यान करते हैं। माना जाता है कि इस दौरान की गई साधना से जन्म-जन्मांतर के बंधन समाप्त हो जाते हैं और आत्मा शुद्ध होती है।

संगम स्नान का धार्मिक महत्व

माघ मास में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम पर स्नान का विशेष महत्व बताया गया है. पुराणों के अनुसार माघ महीने में संगम में स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट होते हैं और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है.यह समय दान, जप, तप और ध्यान के लिए सर्वोत्तम माना गया है.

कल्पवास का महत्व

कल्पवास माघ मेले की सबसे विशेष और पवित्र परंपरा है.कल्पवासी पूरे माघ मास संगम तट पर रहकर  सादा और संयमित जीवन व्यतीत करते हैं.इस दौरान वे ब्रह्ममुहूर्त में स्नान करते हैं, एक समय सात्विक भोजन , भूमि पर शयन, जप, तप, ध्यान और दान, क्रोध, अहंकार और भोग से दूरी  बनाए रखते हैं

शास्त्रों में कहा गया है कि एक माघ मास का कल्पवास हजारों वर्षों की तपस्या के समान फल देता है.विशेष रूप से उम्रदराज और गृहस्थ इस परंपरा का पालन करते हैं.

माघ मेले की प्रमुख स्नान तिथियां

माघ मेले के दौरान कई महत्वपूर्ण स्नान पर्व आते हैं—

3 जनवरी – पौष पूर्णिमा (कल्पवास आरंभ)

14 जनवरी – मकर संक्रांति 

21 जनवरी – मौनी अमावस्या (राजयोग स्नान)

30 जनवरी – बसंत पंचमी

5 फरवरी – माघी पूर्णिमा

15 फरवरी – महाशिवरात्रि (कल्पवास समापन)

आस्था और संस्कृति का महापर्व

माघ मेला भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और आध्यात्मिक चेतना का जीवंत स्वरूप है.यहां संतों के प्रवचन, यज्ञ, भजन-कीर्तन और धार्मिक चर्चाओं से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर जाता है.

माघ मेले में इन बातों का रखें विशेष ध्यान

माघ मेले के दौरान श्रद्धालुओं को कुछ नियमों का पालन करना चाहिए। इस समय मांस-मदिरा, प्याज और लहसुन जैसे तामसिक भोजन से दूर रहना चाहिए। छल-कपट, क्रोध और गलत शब्दों के प्रयोग से बचें। स्नान करते समय मन को शांत रखें और हंसी-मजाक न करें। पूरे समय अच्छे विचार रखें और सात्विक जीवनशैली अपनाएं।

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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