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लालू यादव को कोर्ट से बड़ा झटका, लैंड फॉर जॉब स्कैम में पूरे परिवार पर तय हुए आरोप

नई दिल्ली

पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव को कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को 'लैंड फॉर जॉब स्कैम' मामले में लालू प्रसाद यादव, उनके परिवार और अन्य के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश सुनाया है. रेल मंत्रालय में चतुर्थ श्रेणी में नौकरियों के बदले भूमि लेने के घोटाले में राउज एवेन्यू स्थित स्पेशल कोर्ट ने लालू यादव और अन्य के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश सुनाया.

कोर्ट ने संदेह की कसौटी पर पाया कि लालू और परिवार की ओर से व्यापक साजिश रची गई थी. चार्जशीट में लालू यादव के करीबी सहयोगियों को नौकरियों के बदले जमीन अधिग्रहण में सह-साजिशकर्ता के रूप में मदद मिली.

कोर्ट ने कहा कि लालू यादव और उनके परिवार की बरी करने की मांग की दलील सही नहीं है. इसके साथ ही, इस बात के पुख्ता संकेत मिले हैं कि लालू यादव और उनके परिवार के सदस्य सरकारी पद से अलग होकर आपराधिक उद्यम के रूप में काम कर रहे थे.

  कोर्ट ने बहु चर्चित लैंड फॉर जॉब मामले में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव, मीसा भारती समेत 40 से अधिक आरोपियों पर आरोप तय कर दिए है. अदालत ने लालू यादव पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है, साथ ही आईपीसी के तहत अन्य अपराधों का भी आरोप है. जबकि उनके परिवार के सदस्यों पर धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश का आरोप लगाया गया है. स्पेशल जज विशाल गोगने ने यह फैसला सुनाया. इससे पहले 19 दिसंबर, 2025 को सुनवाई के दौरान सीबीआई ने सभी आरोपियों से संबंधित वेरिफिकेशन रिपोर्ट कोर्ट को सौंपा था.

इससे पहले कोर्ट ने सीबीआई के मामले में आरोप तय करने पर 25 अगस्त को फैसला सुरक्षित रख लिया था. इस मामले की आरोपी राबड़ी देवी ने प्रिंसिपल एंड डिस्ट्रिक्ट जज के समक्ष याचिका दायर कर केस को कोर्ट से दूसरी कोर्ट में ट्रांसफर करने की मांग की थी.इससे पहले 19 दिसंबर, 2025 को सुनवाई के दौरान सीबीआई ने सभी आरोपियों से संबंधित वेरिफिकेशन रिपोर्ट कोर्ट को सौंपा था.

लैंड फॉर जॉब केस में मीसा भारती 

बता दें कि 19 दिसंबर 2025 को सुनवाई के दौरान सीबीआई ने सभी आरोपियों से संबंधित वेरिफिकेशन रिपोर्ट कोर्ट को सौंपा था. सीबीआई ने कहा था कि इस मामले में 103 आरोपी हैं जिसमें से पांच की मौत हो चुकी है. इससे पहले कोर्ट आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने पर दो बार फैसला टाल चुका है. 4 दिसंबर और 10 नवंबर 2025 को कोर्ट किसी न किसी वजह से फैसला टाल चुका है. कोर्ट ने सीबीआई के मामले में आरोप तय करने पर 25 अगस्त को फैसला सुरक्षित रख लिया था.

तेज प्रताप यादव पर आरोप तय

इस मामले की आरोपी राबड़ी देवी ने प्रिंसिपल एंड डिस्ट्रिक्ट जज के समक्ष याचिका दायर कर जज विशाल गोगने की कोर्ट से दूसरी कोर्ट में ट्रांसफर करने की मांग की थी. प्रिंसिपल एंड डिस्ट्रिक्ट जज दिनेश भट्ट ने 19 दिसंबर को राबड़ी देवी की याचिका खारिज कर दिया था.

लैंड फॉर जॉब केस में लालू यादव

सुप्रीम कोर्ट ने 18 जुलाई 2025 को ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था. 7 अक्टूबर 2022 को लैंड फॉर जॉब मामले में सीबीआई ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और मीसा भारती समेत 16 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल किया था. ट्रायल कोर्ट ने 25 फरवरी 2025 को सीबीआई की ओर से दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लिया था.

लैंड फॉर जॉब घोटाला क्या है?

बता दें कि लैंड फॉर जॉब घोटाला, कथित भ्रष्टाचार का केस है। यह साल 2004 से 2009 के बीच हुआ, जब लालू प्रसाद यादव केंद्रीय रेल मंत्री हुआ करते थे। आरोप है कि लालू यादव ने अपने रेल मंत्री के पद का गलत इस्तेमाल किया और इसके जरिए रेलवे के 'ग्रुप-डी' के पदों पर नियुक्तियां की। इन नियुक्तियों के बदले उन्होंने और उनके परिवार ने उम्मीदवारों से रियायती दरों पर या गिफ्ट के तौर पर जमीनें हासिल की थीं।
98 आरोपियों में लालू परिवार का कौन-कौन शामिल?

जांच के दौरान, इस केस में लालू यादव के अलावा उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेज प्रताप यादव, बेटे तेजस्वी यादव, बेटियां मीसा भारती और हेमा यादव सहित कुल 98 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें अब लालू परिवार को सदस्यों पर आरोप तय हो गए हैं, जबकि 52 लोगों को आरोप मुक्त किया जा चुका है।
लालू परिवार को कितनी सजा हो सकती है?

लैंड फॉर जॉब स्कैम केस में आरोप तय होने के बाद लालू परिवार के सदस्यों की संभावित सजा पर बात करते हुए सुप्रीम कोर्ट के वकील संदीप मिश्रा ने INDIA TV से बताया, 'प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के सेक्शन 8, 9, 11, 12 और 13, ये सभी लगे हुए हैं। इन सभी में 7 साल तक की सजा का प्रावधान का है। वहीं, धारा 467, 468 और 471 भी हैं तो कुल मिलाकर इनको अधिकतम 10 साल तक की सजा हो सकती है, अगर सारी सजाएं एक साथ चलती हैं। लेकिन सजा अगर एक के बाद एक शुरू करने वाला कोई ऑर्डर अदालत देती है तो इसमें ये सजा बढ़ भी सकती है।'
अलग-अलग सजा को लेकर प्रावधान क्या है?

उन्होंने आगे कहा, 'अदालत जब आदेश देती है, तो कहती है कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी, तो उसमें जो अपर साइड सजा होती है, वही सजा दोषी को भुगतनी पड़ती है। यानी अधिकतम जितने साल की सजा कोर्ट की तरफ से सुनाई जाती है, उतने साल ही दोषी को जेल में रहना पड़ता है।'

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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