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ट्रंप का दावोस में बम बयान: यूरोप को सुनाया, ग्रीनलैंड पर नर्वस हुए, फिर EU ने फोड़ा बड़ा बम!

दावोस
 अमेरिका और यूरोप के बीच हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं. दावोस में यूरोपीय देशों के नेताओं ने ट्रंप पर जमकर भड़ास उतारी. इसके बाद जब ट्रंप मंच पर पहुंचे तो उन्होंने भी किसी को नहीं छोड़ा. ट्रंप को पहली बार ईगो का जवाब ईगो से ही मिल रहा है. EU ट्रंप की दावोस स्पीच के बाद EU का पारा और भी चढ़ गया है और ट्रंप के भाषण के ठीक बाद ट्रेड बम फोड़ गिया गया है. यूरोपीय संसद की व्यापार समिति के अध्यक्ष बर्न्ड लैंग ने इसे लेकर एक बड़ा ऐलान कर दिया है. उन्होंने बताया है कि अमेरिका और यूरोपीय देशों के बीच अब क्या बचा है?
यूरोप ने ट्रंप को कैसे दिया झटका?

यूरोपीय संसद की व्यापार समिति के अध्यक्ष बर्न्ड लैंग ने घोषणा की है कि अमेरिका-यूरोपीय संघ व्यापार समझौता ‘अगले आदेश तक स्थगित’ कर दिया गया है. उन्होंने टैरिफ और ग्रीनलैंड का हवाला देते हुए कहा, ‘अब आधिकारिक तौर पर यूरोपीय संघ-अमेरिका के बीच ट्रेड समझौता अगले आदेश तक स्थगित है’.

उन्होंने मंगलवार को बड़ा ऐलान करते हिए कहा कि ‘हमने टर्नबेरी समझौते के कानूनी काम पर यूरोपीय संसद के काम को निलंबित करने का फैसला किया है. हमारी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता खतरे में है. सामान्य व्यापार संभव नहीं है’.
क्या है टर्नबेरी समझौता?

बता दें कि अमेरिका-यूरोप के ट्रेड रिश्ते टूटने की खबरें तब से ही फैल रही थीं, जब से ट्रंप ग्रीनलैंड मामले पर आक्रामाक हुए थे. टर्नबेरी समझौता असल में डोनाल्ड ट्रंप और यूरोपीय संघ के बीच होने वाली वह ‘महा-डील’ थी, जिसे ट्रंप ने स्कॉटलैंड में स्थित अपने टर्नबेरी गोल्फ रिसॉर्ट में डिजाइन किया था. इसका मकसद अमेरिका और यूरोप के बीच कारों और तकनीक पर लगने वाले टैक्स को कम करके चीन के खिलाफ एक साझा आर्थिक मोर्चा बनाना था.
अब यूरोपीय संघ ने इसे ‘फ्रीज’ कर दिया है, जिससे यह करोड़ों डॉलर का व्यापारिक सपना अब एक भीषण ग्लोबल ट्रेड वॉर में बदलता नजर आ रहा है.

ट्रंप ने चेतावनी दी है कि 1 फरवरी से, अमेरिका डेनमार्क, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड, फिनलैंड, ब्रिटेन और नॉर्वे से आने वाली वस्तुओं पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाएगा. उन्होंने ये भी कहा कै कि ग्रीनलैंड पर बात नहीं बनी तो टैरिफ बढ़ाकर 25 प्रतिशत भी किया जा सकता है.

यूरोप को सुनाया, ग्रीनलैंड पर दिखे नर्वस

दावोस की बर्फीली वादियों में इस वक्त सियासी पारा हाई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अपनी सत्ता के दूसरे कार्यकाल के पहले साल के अंत में एक बड़े-बड़े दावों के साथ वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) पहुंचे हैं. यूरोपीय देश पहले से ही यहां पर ट्रंप के खिलाफ भड़ास निकाल चुके हैं. EU देशों के द्वारा अमेरिका को ‘ट्रेड बजूका’ की धमकी दी जा चुकी है. अब ट्रंप अपना पक्ष रखने के लिए यहां पहुंचे हैं, उन्होंने अपनी स्पीच में पहले ये बताया कि कैसे उनके राज में अमेरिका ‘डेड देश’ से ‘आर्थिक चमत्कार बना दिया’. इसके अलाव उन्होंने ग्रीनलैंड से लेकर यूक्रेन तक सभी मुद्दों पर विस्फोटक बयान दिए हैं.
Greenland पर नर्वस हुए ट्रंप

ग्रीनलैंड के मुद्दे पर ट्रंप थोड़ा नर्वस नजर आए. उन्होंने इस पर बात करने पहले शर्माते हुए हंस कर सभी की परमीशन ली. ट्रंप का कहना है कि ग्रीनलैंड पर स्टैंड को लेकर उन्हें दुनिया में निगेटिव तरीके से दिखाया जा रहा है. हालांकि, इस पर उनका स्टैंड बदला नहीं है. ट्रंप ने एक बार फिर वही पुराना राग अलापा है कि ग्रीनलैंड उन्हें सिक्योरिटी के लिए चाहिए. ट्रंप ने एक बार फिर से सफाई दी लेकिन फिर से दादागीरी वाले मोड में ही पहुंच गए. ट्रंप ने यूरोपीय देशों से कहा कि NATO को अमेरिका ने बहुत दिया लेकिन जब बदले में कुछ देने की बारी आई तो सब पीछे हट गए.

उन्होंने ग्रीनलैंड पर कहा ‘मुझे बल प्रयोग करने की आवश्यकता नहीं है, मैं बल प्रयोग नहीं करना चाहता, मैं बल प्रयोग नहीं करूंगा’. ट्रंप अब नाटो की ओर मुड़ते हैं, जिनके बारे में उनका कहना है कि वे रक्षा व्यवस्था में अधिक निवेश कर रहे हैं. उनका कहना है कि ‘जब तक मैं अत्यधिक बल प्रयोग करने का निर्णय नहीं लेता, हमें कुछ नहीं मिलेगा. हम अजेय हो जाएंगे, लेकिन हम ऐसा नहीं करेंगे’.

ट्रंप ने अपनी स्पीच के दौरान ग्रीनलैंड को ‘बर्फ का विशाल, सुंदर टुकड़ा’. उन्होंने कहा, ‘इसे जमीन कहना मुश्किल है. यह बर्फ का एक विशाल टुकड़ा है लेकिन हमने ग्रीनलैंड को बचा लिया’.
यूरोपीय देशों की लगाई क्लास

ट्रंप ने यूरोपीय देशों को खरी-खोटी सुनाते हुए कह डाला है कि ‘यूरोप सही दिशा में नहीं जा रहा है. यूरोप की नीतियों की वजह से ऐसा हाल है कि कुछ शहर तो अब पहचानने लायक नहीं बचे हैं’.
NATO को चेतावनी के साथ बातचीत का ऑफर

ट्रंप ने कहा कि वे डेनमार्क और ग्रीनलैंड के साथ अमेरिका द्वारा इस क्षेत्र के अधिग्रहण पर बातचीत करना चाहते हैं, और इसे ऐतिहासिक मिसाल के अनुरूप बताया. उन्होंने कहा, ‘मैं तत्काल बातचीत चाहता हूं’. उन्होंने बताया कि अमेरिका और यूरोपीय देशों ने अतीत में भी क्षेत्र हासिल किए हैं. उन्होंने इस सुझाव को खारिज कर दिया कि ऐसा कदम नाटो को कमजोर करेगा, और कहा कि इससे गठबंधन की सुरक्षा और मजबूत होगी.

अपने भाषण के अंत में, ट्रंप ने एक चेतावनी भी दी. उन्होंने जोर देकर कहा, ‘आप हां कह सकते हैं, और हम इसके लिए बहुत आभारी होंगे, या आप ना कह सकते हैं, और हम इसे याद रखेंगे’.

‘NATO बदले में बहुत कम देता है’

ट्रंप ने इस दावे को खारिज कर दिया कि ग्रीनलैंड पर अमेरिका का कब्जा नाटो को नुकसान पहुंचाएगा, बल्कि उन्होंने गठबंधन के प्रति अपनी पुरानी शिकायतों को दोहराया. उन्होंने कहा, ‘नाटो अमेरिका के साथ बहुत अन्यायपूर्ण व्यवहार करता है’. और आगे कहा, ‘हम इतना कुछ देते हैं और बदले में हमें बहुत कम मिलता है’.

ट्रंप ने आगे कहा, ‘अगर मैं नाटो में शामिल न होता तो नाटो अस्तित्व में ही न होता’. उन्होंने यूरोपीय सहयोगियों पर अमेरिका के योगदान को न समझने का आरोप लगाते हुए कहा, ‘वे हमारे योगदान की कद्र नहीं करते. मैं नाटो और यूरोप की बात कर रहा हूं’.

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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