राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय

उत्तर प्रदेश बजट पर विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया: स्पष्ट नीतियों से झलकती सकारात्मक दिशा

उत्तर प्रदेश के बजट पर विशेषज्ञों की राय 
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स्पष्ट नीतियों से सकारात्मक सोच

योगी सरकार ने प्रदेश के विकास को लेकर अपनी समग्र दृष्टि पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। तीन महत्वपूर्ण बिंदुओं को एकीकृत रूप से देखें तो सरकार का मंतव्य भी सामने आ जाएगा। पहला तो राज्य सरकार की ओर से पहली बार प्रस्तुत किया गया आर्थिक सर्वेक्षण, दूसरा सदन में रख गए बजट के बिंदु और तीसरा राज्यपाल के अभिभाषण पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से की गई चर्चा। इन तीनों का ही सार यह है कि प्रदेश सरकार के एजेंडे में लोक लुभावन बजट नहीं, प्रदेश को अब क्षमता वृद्धि की राह पर ले जाना है और इसीलिए दीर्घकालिक सोच को प्रधानता दी गई है। चूंकि यूपी की अर्थव्यवस्था मजबूत है इसलिए पूंजीगत व्यय पर अधिक जोर दिया जाना अब स्वाभाविक है और अच्छी बात यह है कि इसके लिए नीतियां बिलकुल स्पष्ट हैं। राज्य की आर्थिक स्थिरता ने ही निवेशकों को आकर्षित किया है। इसमें उस बुनियादी ढांचे का विशेष स्थान है, जो सहज साधन के रूप में विकसित हुआ। एक्सप्रेसवे का नेटवर्क, नए हवाई अड्डे, लाजिस्टिक पार्क और औद्योगिक कारिडोर की वजह से निवेशक आने वाले दिनों में और आकर्षित होंगे। मेरी दृष्टि में यह बजट सकारात्मक सोच वाला है जिसमें विकास का एक बड़ा आधार दिखाई देता है। 
डा. शरद कोहली, आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ

बिजनेस स्टेबिलिटी को बढ़ावा
आर्थिक सर्वेक्षण और 2026-27 के बजट दोनों को देखें तो यह स्पष्ट है कि सरकार राजकोषीय अनुशासन बनाए रखते हुए विकास दर को स्थिर बनाए रखना चाहती है। यह दृष्टिकोण इस बात का परिचायक है कि सामाजिक क्षेत्र को भी उत्पादकता से जोड़ा जा रहा है। पूंजीगत व्यय पर स्पष्ट फोकस की सोच भी स्पष्ट है कि संरचनात्मक परिवर्तन की दिशा में आगे बढ़ा जाए। यह एक तरह से संदेश है कि सरकार ने इन्फ्रास्ट्रक्चर का अपना एजेंडा बरकरार रखा है जिससे आगे चलकर प्रदेश में स्थायी विकास होता दिखाई देगा। सड़क, एक्सप्रेस-वे, लॉजिस्टिक्स, औद्योगिक कॉरिडोर, सिंचाई और ऊर्जा पर बड़े आवंटन यह दर्शाते हैं कि सरकार निजी निवेश को लेकर आधारभूत ढांचा मजबूत करना चाहती है। इससे राज्य में आर्थिक स्थिरता आएगी और निवेशक ऐसा ही माहौल चाहते हैं। आधारभूत ढांचा मजबूत होने से औद्योगिक गतिविधि को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। फियरलेस गवर्नेंस और ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस स्टेबिलिटी को बढ़ावा देती हैं। मेरे विचार में यूपी सरकार ने एक ऐसा बजट प्रस्तुत किया है, जिसमें राज्य की आर्थिक स्थिरता के साथ ही निवेश संकेतकों को लेकर भी सकारात्मक संदेश उभरता है। 
इस बात का प्रयास दिखाई देता है कि वेलफेयर की आधारशिला पर क्षमता निर्माण और पूंजी निवेश की इमारत खड़ी की जाए। 
प्रो. मेनका सिंह, दिल्ली विश्वविद्यालय

 

उत्तर प्रदेश का 2026-2027 का बजट सकारात्मक संदेशों से भरा हुआ है। यह साफ करता है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार लोक लुभावन राजनीति के बजाय प्रदेश की लॉन्ग टर्म आर्थिक मजबूती पर काम कर रही है। इस बजट की सबसे बड़ी खासियत है इंफ्रास्ट्रक्चर और पूंजीगत निवेश पर स्पष्ट फोकस। प्रदेश की जीएसडीपी 30.25 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचना और 13.4 प्रतिशत की वृद्धि दर दिखाती है कि विकास केवल कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि धरातल पर उतर रहा है। प्रति व्यक्ति आय 1,09,844 रुपये तक पहुंचना और आगे 1,20,000 रुपये का अनुमान इस दिशा को और मजबूत करता है।
लगभग 06 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालना और बेरोजगारी दर का 2.24 प्रतिशत तक आना यह बताता है कि विकास का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर स्थित हर व्यक्ति तक पहुंच रहा है।
साथ ही, 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव और 15 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं का क्रियान्वयन यह संकेत देता है कि उत्तर प्रदेश अब निवेश आधारित, स्थिर और भविष्य उन्मुख अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है।
प्रो. हिमांशु, अर्थ शास्त्री, जेएनयू

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में उत्तर प्रदेश विकास की नई ऊंचाइयां छू रहा है। यूपी का बजट 2026-27 यह स्पष्ट करता है कि योगी सरकार तात्कालिक लाभ से आगे बढ़कर प्रदेश की दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता को प्राथमिकता दे रही है। 9,12,696.35 करोड़ रुपये के इस बजट में 19.5 प्रतिशत पूंजीगत व्यय रखा जाना इस बात का संकेत है कि इंफ्रास्ट्रक्चर और स्थायी विकास सरकार के एजेंडे के केंद्र में हैं। राजकोषीय घाटे को 3 प्रतिशत की सीमा में रखना और ऋण-जीएसडीपी अनुपात को 23.1 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य यह दर्शाता है कि आर्थिक अनुशासन और वित्तीय प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार का इसे चरणबद्ध तरीके से 20 प्रतिशत से नीचे लाने का संकल्प भविष्य की आर्थिक मजबूती तो सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्धता का संकेत है। शिक्षा, चिकित्सा और कृषि जैसे बुनियादी क्षेत्रों में संतुलित आवंटन यह दिखाता है कि विकास केवल ढांचागत ही नहीं, बल्कि समावेशी भी है। यह बजट स्पष्ट संकेत देता है कि उत्तर प्रदेश अब मजबूत, स्थिर और दीर्घकालिक विकास मॉडल की ओर बढ़ रहा है।
प्रो. शिरीष मिश्र, केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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