राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय

पाकिस्तान-अफगानिस्तान तनाव: भारत की रणनीति पर उठ रहे सवाल

इस्लामाबाद
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। पाकिस्तान की वायुसेना ने सीमा पार अफगानिस्तान के अंदर कई आतंकी ठिकानों पर भीषण हवाई हमले किए। पाकिस्तान ने इसे खुफिया जानकारी पर आधारित सटीक ऑपरेशन बताया है, वहीं अफगानिस्तान की तालिबान सरकार का दावा है कि इन हमलों में महिलाओं और बच्चों सहित दर्जनों निर्दोष नागरिक मारे गए हैं। इस सबके बीच सबकी निगाहें भारत पर भी टिकी हैं।

पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने रविवार तड़के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी कि पाकिस्तानी सेना ने तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और उसके सहयोगी संगठनों के सात कैंपों पर टारगेट हमले किए हैं। उन्होंने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय इस्लामिक स्टेट (IS) के गुर्गों को भी निशाना बनाया गया है।

दूसरी ओर, काबुल में अफगान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने इन हमलों की कड़ी निंदा की। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी विमानों ने नंगरहार और पक्तिका प्रांतों में नागरिक बस्तियों को निशाना बनाया। मुजाहिद ने कहा कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक सुरक्षा की विफलता और कमजोरी को छिपाने के लिए अफगानिस्तान की संप्रभुता का उल्लंघन कर रहा है।

बाजौर हमला: हाल ही में उत्तर-पश्चिमी खैबर पख्तूनख्वा के बाजौर में एक आत्मघाती हमलावर ने बारूद से लदे वाहन को सुरक्षा चौकी से टकरा दिया था, जिसमें 11 सैनिक और एक बच्चे की मौत हो गई थी। हमलावर अफगान नागरिक बताया गया।

बन्नू और इस्लामाबाद: शनिवार को ही बन्नू में एक सैन्य काफिले पर हमला हुआ जिसमें दो जवान शहीद हुए। इससे पहले इस्लामाबाद की एक शिया मस्जिद में हुए धमाके में 31 लोगों की जान चली गई थी। इस हमले के लिए पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने भारत को भी जिम्मेदार ठहराया था।

पाकिस्तान का दावा है कि इन सभी हमलों के तार अफगानिस्तान में बैठे टीटीपी कमांडरों से जुड़े हैं और उनके पास इसके ठोस सबूत हैं।

पाकिस्तान की सेना ने चेतावनी दी है कि वह अब किसी भी प्रकार का संयम नहीं बरतेगी। सेना के बयान के अनुसार, पाकिस्तान के नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है और वह आतंकियों का पीछा उनके ठिकानों तक करेगा, चाहे वे कहीं भी हों। पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी अपील की है कि वे तालिबान सरकार पर दबाव डालें ताकि अफगान धरती का इस्तेमाल दूसरे देशों के खिलाफ न हो।

अक्टूबर 2025 में भी पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के अंदर इसी तरह के हमले किए थे। हालांकि कतर और तुर्की की मध्यस्थता में शांति वार्ता की कोशिशें की गईं, लेकिन वे विफल रहीं। 2021 में अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी के बाद से इस्लामाबाद को उम्मीद थी कि सीमा पर शांति रहेगी, लेकिन इसके विपरीत टीटीपी के हमलों में भारी वृद्धि हुई है।

भारत का क्या रहेगा स्टैंड?
दक्षिण एशिया में बढ़ते कूटनीतिक और सैन्य तनाव के बीच भारत ने एक बार फिर अपना रुख स्पष्ट किया है। विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान कहा था कि पाकिस्तान के साथ भारत की एकमात्र और सबसे बड़ी समस्या 'सीमा पार आतंकवाद' है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक इस जड़ को नहीं काटा जाता, तब तक संबंधों में सुधार की गुंजाइश सीमित है।

रणधीर जायसवाल का यह बयान पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ की उस धमकी के संदर्भ में आया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर काबुल अपनी जमीन पर पनप रहे आतंकवाद को नहीं रोकता तो इस्लामाबाद अफगानिस्तान के अंदर हवाई हमले करने से पीछे नहीं हटेगा। जब जायसवाल से इस संबंध में भारत की स्थिति के बारे में पूछा गया तो उन्होंने सधे हुए शब्दों में कहा, "आप जानते हैं कि अफगानिस्तान के साथ हमारे संबंध किस स्तर पर हैं और पाकिस्तान के साथ हमारे रिश्तों की क्या स्थिति है। मैं इसे यहीं छोड़ूंगा। जहां तक पाकिस्तान का सवाल है, हमारे बीच असली समस्या सीमा पार आतंकवाद है, जिसे संबोधित किया जाना अनिवार्य है।"

विशेषज्ञों का मानना है कि रणधीर जायसवाल का बयान यह दर्शाता है कि भारत इस क्षेत्र में हो रही सैन्य हलचलों पर पैनी नजर रखे हुए है। भारत ने हमेशा इस बात की वकालत की है कि आतंकवाद किसी भी रूप में हो, वह क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा है। हालांकि, भारत ने अफगानिस्तान में तालिबान शासन के साथ अपने संबंधों को मानवीय और रणनीतिक स्तर पर संतुलित रखा है, जो पाकिस्तान की तुलना में कहीं अधिक स्थिर नजर आते हैं।

 

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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