राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय

अल नीनो की मार: मलावी में सूखा, भारत ने राहत के लिए भेजे 1,000 मीट्रिक टन चावल

नई दिल्ली
अफ्रीकी देश मलावी में अल नीनो की वजह से भारी सूखा पड़ा है। ऐसे हालात में भारत ने मलावी को 1,000 मीट्रिक टन चावल की मानवीय मदद भेजी है। भारत ने इस कदम के साथ ही ग्लोबल साउथ में साझेदारों का समर्थन करने और साउथ-साउथ सहयोग की भावना को आगे बढ़ाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है।

भारत के विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी देते हुए लिखा, "खाद्य सुरक्षा के लिए भारत-मलावी साझेदारी। अल नीनो के असर से आए सुखाड़ के बाद खाद्य सुरक्षा के लिए मलावी की कोशिशों का समर्थन करने के लिए, भारत ने न्हावा शेवा पोर्ट से मलावी के लोगों के लिए 1,000 मीट्रिक टन चावल की मानवीय खेप भेजी है। यह ग्लोबल साउथ में पार्टनर्स को सपोर्ट करने और साउथ-साउथ सहयोग की भावना को आगे बढ़ाने के लिए भारत की लगातार प्रतिबद्धता को दिखाता है।" बता दें, मलावी में 40 लाख से ज्यादा लोग (आबादी का 20 प्रतिशत) खाने की बहुत ज्यादा कमी का सामना कर रहे हैं, जिससे कुपोषण बढ़ रहा है और परिवार खाना छोड़ रहे हैं।

अल नीनो की वजह से मलावी में अनियमित बारिश हो रही है और चिलवा झील जैसे बड़े पानी के स्रोत सूख गए हैं। वहीं, मलावी सरकार ने आपदा की स्थिति घोषित कर दी है। बता दें, पिछले साल अक्टूबर में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने जॉर्ज चापोंडा को मलावी के विदेश मंत्री के तौर पर उनकी नियुक्ति पर बधाई दी थी। जयशंकर ने कहा कि वह भारत और मलावी के बीच द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक हैं।

जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में लिखा, "जॉर्ज चापोंडा को मलावी रिपब्लिक के विदेश मंत्री के तौर पर उनकी नियुक्ति पर बधाई। भारत के साथ उनके करीबी संबंध को देखते हुए, हम अपने द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक हैं।" मलावी के नए राष्ट्रपति पीटर मुथारिका की डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (डीपीपी) के पुराने सदस्य जॉर्ज चापोंडा को वहां का विदेश मंत्री नियुक्त किया गया था।

भारत और मलावी के बीच अच्छे द्विपक्षीय संबंध हैं। विदेश मंत्रालय के मुताबिक नियमित उच्चस्तरीय बातचीत से भारत और मलावी के द्विपक्षीय संबंध और मजबूत हुए हैं। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु भी 2024 में मलावी के राजकीय दौरे पर गई थीं।राष्ट्रपति भवन की एक विज्ञप्ति में कहा गया कि अपनी यात्रा के दौरान राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने तत्कालीन मलावी समकक्ष लाजरस मैकार्थी चकवेरा से मुलाकात की और भारत-मलावी संबंधों को और गहरा करने के लिए कई मुद्दों पर चर्चा की थी।

इसके साथ ही उन्होंने कला और संस्कृति, युवा मामलों, खेल और फार्मास्यूटिकल सहयोग पर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर भी किए थे। इस दौरान राष्ट्रपति मुर्मु ने लिलोंग्वे में नेशनल वॉर मेमोरियल का दौरा किया और पहले और दूसरे विश्व युद्ध और दूसरे सैन्य अभियानों के दौरान अपनी जान देने वाले सैनिकों और नागरिकों को पुष्पांजलि अर्पित की थी।

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button