Bihar के 55 कॉलेज बनेंगे ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’, उच्च शिक्षा में बड़े सुधार की तैयारी

पटना
बिहार में उच्च शिक्षा की स्थिति अच्छी नहीं है। इस क्षेत्र में बड़े सुधार की जरूरत है। राज्य के सभी विश्वविद्यालयों समेत अंगीभूत महाविद्यालयों में एक क्वालिटी एजुकेशन इकोसिस्टम विकसित करने की जरूरत है। राज्य सरकार ने जिन 55 प्रतिष्ठित अंगीभूत कॉलेजों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने के लिए चयन किया है उसके लिए विशेष रणनीति और कार्य योजना बनाकर जमीन पर उतारने होंगे।
उच्च शिक्षण संस्थानों में केवल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि जो नये प्राध्यापक आ रहे हैं उनमें टीचिंग एंड लर्निंग कंटेंट भी विकसित करना होगा, एआई तकनीकी भी उपयोग करने होंगे। ये सुझाव मंगलवार को विशेषज्ञों द्वारा उच्च शिक्षा विभाग की ओर से आयोजित कार्यशाला में दिए गए।
शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने चयनित कॉलेजों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनान पर आयोजित कार्यशाला का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा में बड़े सुधार के लिए आए सुझावों को सरकार कार्य योजना में शामिल करेगी। इनसे रणनीति बनाने और नीतियां तैयार करने में भी मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि पहले चरण में राज्य में चयनित कॉलेजों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया। जाएगा, जहां उच्च गुणवत्ता एआई तकनीक, कौशल, बेहतर भवन, आधुनिक प्रयोगशाला, डिजिटल शिक्षा एवं रिसर्च सुविधाएं उपलब्ध रहेगी।
इस मौके पर विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह ने कहा कि उच्च शिक्षा में गुणात्मक सुधार हेतु हर संभव उपाय किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री के सचिव डॉ. चन्द्रशेखर सिंह ने कहा कि उच्च शिक्षा में नामांकन दर को बढ़ाना होगा।
उच्च सचिव राजीव रौशन ने कार्यशाला ने विषय प्रवेश कराते हुए कहा कि यह महत्वपूर्ण कार्यशाला है। उच्च शिक्षा में गुणात्मक सुधार सरकार की प्राथमिकता है। उच्च शिक्षा निदेशक प्रो.एनके अग्रवाल ने अतिथियों का स्वागत किया। उपनिदेशक डॉ. दीपक कुमार सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन किया। राज्य उच्च शिक्षा परिषद के उपसचिव रामसागर सिंह ने कार्यशाला का समन्वय किया।
पाठ्यक्रम को अपग्रेड करने को देना होगा प्राथमिकता
शिक्षाविद् एवं पटना विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. रास बिहारी सिंह ने कहा कि उच्च शिक्षा में समस्याओं का पहाड़ है जिसके समाधान हेतु सरकार को बड़े लक्ष्य तय करके कार्य करने की प्राथमिकता देनी होगी। सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को एक क्वालिटी एजुकेशन इकोसिस्टम से जोड़ना होगा।
सरकार और संस्थान के बीच संवादहीनता खत्म करने होंगे, एकेडमिक करिकुलम में सुधार करने होंगे और सिलेबस निरंतर अपग्रेड करते रहना होगा।मुंगेर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजय कुमार ने कहा कि आज अधिकांश कॉलेजों में लैब एक्टिव नहीं हैं क्योंकि प्रयोगशाला सहायक नहीं हैं।
मगध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.शशि प्रताप शाही ने कहा कि विज्ञान के दौर में उच्च शिक्षा को तकनीकी से जोड़कर आगे बढ़ाने की जरूरत है। पटना विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. नमिता सिंह ने कहा कि आज कॉलेजों में जो नये प्राध्यापक आ रहे हैं उनमें टीचिंग एंड लर्निंग कंटेंट विकसित करना होगा।
महत्वपूर्ण सुझाव
- उच्च-तकनीकी प्रयोगशालाओं, आधुनिक पुस्तकालयों और अनुभवी शिक्षकों की आवश्यकता
- शिक्षकों और छात्रों से निरंतर शैक्षणिक संवाद और काउंसलिंग को प्राथमिकता
- बुनियादी ढांचे के उन्नयन और शोध सुविधाओं को बढ़ावा और प्रोत्साहन
- शोधार्थियों को शोध करने की अधिक सुविधा और अकादमिक स्तर पर बेहतर संसाधन प्रदान करना
- शिक्षकों को बेहतर और आधुनिक शिक्षण विधियों में सक्षम बनाना
- बेहतर कार्य योजना के लिए अनुभवी शिक्षकों एवं छात्रों के सुझावों को शामिल करना
विमर्श में शामिल शिक्षाविद्:
वैज्ञानिक प्रो.भवनाथ झा, इतिहासकार प्रो. रत्नेश्वर मिश्र, कुलपति डॉ.एसपी सिंह (आर्यभट्ट ज्ञान विवि), प्रो.संजय कुमार चौधरी (एलएन मिथिला विवि), प्रो.पीके बाजपेयी (जेपी विवि), पूर्व कुलपति प्रो. केसी सिन्हा एवं प्रो. डाली सिन्हा, नैक कोऑर्डिनेटर प्रो. अरुण कुमार।




