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1 मई से सख्ती: अनफिट क्रू की उड़ानों पर रोक, बढ़ता वजन अब सैलरी पर डालेगा असर

नई दिल्ली

एयर इंडिया ने अपने केबिन क्रू (फ्लाइट अटेंडेंट्स) के लिए फिटनेस के नियमों को बेहद सख्त कर दिया है। अब केवल अनुभव ही नहीं बल्कि शरीर का वजन और फिटनेस भी यह तय करेगी कि कौन आसमान में उड़ान भरेगा और कौन जमीन पर रहेगा। टाटा समूह के स्वामित्व वाली एयर इंडिया ने अपने केबिन क्रू के लिए 'कैबिन क्रू हेल्थ एंड फिटनेस कंप्लायंस पॉलिसी' लागू करने का फैसला किया है। 1 मई से प्रभावी होने वाले इन नए नियमों के तहत अब स्टाफ का BMI (बॉडी मास इंडेक्स) उनकी नौकरी और सैलरी तय करने में सबसे अहम भूमिका निभाएगा।

एयर इंडिया ने फिटनेस को मापने के लिए क्रू मेंबर्स को चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटा है:

    नॉर्मल (18 से 24.9): इसे पूरी तरह फिट माना गया है। ऐसे क्रू मेंबर्स बिना किसी रोक-टोक के उड़ान भर सकेंगे।

    अंडरवेट (18 से कम): इस श्रेणी के स्टाफ को 'अनफिट' माना जाएगा और उन्हें ड्यूटी से हटाकर मेडिकल चेकअप के लिए भेजा जाएगा।

    ओवरवेट (25 से 29.9): इन्हें भी एक्टिव फ्लाइंग से हटा दिया जाएगा। मेडिकल क्लियरेंस मिलने के बाद ही इन्हें दोबारा काम पर लौटने की अनुमति मिलेगी।

    मोटापा (30 या उससे ज्यादा): इस कैटेगरी को 'ओबीस' (Obese) माना गया है। ऐसे कर्मचारियों को किसी भी हाल में उड़ान भरने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

नियमों की अनदेखी पड़ी महंगी: सैलरी और नौकरी पर खतरा

नए नियमों के अनुसार अगर कोई क्रू मेंबर फिटनेस मानकों को पूरा नहीं करता है तो उसे भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है:

    ग्राउंडिंग और नो-पे: अनफिट पाए जाने पर कर्मचारी को तुरंत ड्यूटी से हटा दिया जाएगा और जब तक वह फिट घोषित नहीं होता, उसे बिना वेतन (Leave without pay) के छुट्टी पर रहना होगा।

    कड़ी निगरानी: अब फ्लाइट से पहले और फ्लाइट के बाद भी क्रू मेंबर्स का रैंडम BMI चेक किया जाएगा।

    वार्निंग लेटर: अनफिट पाए जाने पर सुधार के लिए 30 दिन का समय मिलेगा। अगर 30 दिन में वजन कम नहीं हुआ तो औपचारिक 'कॉशन लेटर' दिया जाएगा। अगले 30 दिन तक सुधार न होने पर 'फाइनल वार्निंग' और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

मेडिकल टेस्ट अनिवार्य
जिन क्रू मेंबर्स का BMI 30 या उससे ज्यादा है उन्हें 7 दिनों के भीतर ब्लड शुगर और लिपिड प्रोफाइल जैसे जरूरी टेस्ट करवाने होंगे। कंपनी यह देखना चाहती है कि वजन बढ़ने के पीछे कोई गंभीर बीमारी तो नहीं है।

क्यों जरूरी है यह कदम?
एयरलाइन का मानना है कि केबिन क्रू का फिट होना न केवल विमान की सुरक्षा के लिए जरूरी है बल्कि यात्रियों की सेवा और आपातकालीन स्थितियों (Emergency) से निपटने के लिए भी अनिवार्य है।

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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