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संघर्ष से समृद्धि तक : बैंक से ऋण मिला तो सुनीता के कारोबार ने भरी उड़ान

संघर्ष से समृद्धि तक : बैंक से ऋण मिला तो सुनीता के कारोबार ने भरी उड़ान 

स्वयं सहायता समूह से जुड़कर बदली जिंदगी की दिशा, आत्मनिर्भर बनकर समाज में पाया सम्मान

योगी सरकार की नीतियों से मिला लाभ, खड़ा किया सफल व्यवसाय, 4 अन्य लोगों को भी दिया रोजगार

लखनऊ
 अमेठी जनपद के संग्रामपुर विकासखण्ड की ग्राम पंचायत उत्तरगांव पुरवा डिहवा की रहने वाली 41 वर्षीय सुनीता देवी का जीवन राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ने से पहले बेहद कठिन परिस्थितियों में गुजर रहा था। पहले उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर थी। उनके पति मुरलीधर दूसरे शहर में सिलाई का काम करते थे, लेकिन रहने-खाने का खर्च निकालने के बाद परिवार के लिए बहुत कम पैसा बच पाता था। परिवार के पास न तो खेती थी और न ही स्थायी आय का कोई साधन। घर के नाम पर केवल एक छोटी-सी कच्ची कोठरी थी, जिसमें पूरे परिवार का गुजारा करना बेहद कठिन था। कभी काम मिलता तो कुछ आय हो जाती थी, और कभी-कभी वह भी नहीं। ऐसे में भविष्य अंधकारमय लगने लगा था, लेकिन सुनीता देवी ने परिस्थितियों के आगे हार मानने के बजाय संघर्ष का रास्ता चुना।

स्वयं सहायता समूह के साथ मिली नई दिशा

सुनीता देवी ने गांव में संचालित सहारा महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़कर अपने जीवन की नई शुरुआत की। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें केवल आर्थिक सहायता ही नहीं मिली बल्कि सही मार्गदर्शन भी प्राप्त हुआ। उन्होंने समूह से 10,000 रुपये का पहला ऋण लेकर अपने घर पर ही सिलाई मशीन से कपड़े बनाने का काम शुरू किया और तैयार कपड़ों को गांव-गांव फेरी लगाकर बेचना शुरू किया। धीरे-धीरे उनकी मेहनत रंग लाने लगी और आय बढ़ने के साथ आत्मविश्वास भी बढ़ा। कुछ समय बाद उन्होंने समूह से 50,000 रुपये का ऋण और लिया और अमेठी में किराये पर एक कमरा लिया। उसके बाद किराये पर “शिवम स्पोर्ट्स” के नाम से एक दुकान खोली। इसमें वह ट्रैक सूट, टी-शर्ट आदि की सिलाई कर बेचते हैं। बाद में उन्होंने अमेठी में अपनी खुद की दुकान खोल ली।

योगी सरकार की मदद से बदली तकदीर, ऋण से व्यवसाय को मिली ताकत 
समय के साथ सुनीता देवी ने लगातार मेहनत की और अगस्त 2025 में ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक से उन्हें सीसीएल के तहत 3 लाख का ऋण मिला। इस पूंजी का उपयोग करके उन्होंने अपने व्यवसाय का विस्तार किया। उनकी दुकान “शिवम स्पोर्ट्स” की आज अमेठी क्षेत्र में एक पहचान बन चुकी है। विशेष रूप से सर्दियों के मौसम में ट्रैक सूट और स्पोर्ट्स वियर की मांग बढ़ने से उनकी आय दोगुनी तक हो जाती है। आज उनकी मासिक आय लगभग 90,000 रुपये से अधिक हो चुकी है। इतना ही नहीं, उन्होंने खुद की दुकान और पक्का घर भी बनवा लिया है। उनके बच्चों की पढ़ाई भी इसी वजह से पूरी हो पाई है। जो ऋण उन्हें बैंक से मिला है उसे चुकाने के लिए वह हर महीने किस्त बैंक में जमा करतीं हैं। सुनीता ने 4 लोगों को भी रोजगार भी दिया है। कारखाना और दुकान चलाने में उनके पति और बेटा सहयोग करते हैं।

आत्मनिर्भरता से समाज में मिला सम्मान
आज सुनीता देवी अपने गांव में एक सशक्त महिला की पहचान बना चुकीं हैं। जो कभी आर्थिक तंगी से जूझ रहीं थीं, वह आज अपने परिश्रम से न केवल अपने परिवार को समृद्ध बना चुकीं हैं बल्कि दूसरों को भी रोजगार और प्रेरणा दे रहीं है। सुनीता मानतीं हैं कि स्वयं सहायता समूह और योगी सरकार ने उनके जीवन में एक सकारात्मक बदलाव किया है, जिसने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी। आज गांव की कई महिलाएं उनसे प्रेरित होकर समूह से जुड़ रही हैं और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं।

सुनीता की कहानी यह संदेश देती है कि जब आत्मविश्वास के साथ-साथ सरकार का सहयोग मिल जाए, तो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़ी से बड़ी कठिनाई को हल किया जा सकता है। उन्होंने अपने व्यवसाय को और बढ़ाने के लिए जमीन भी ले ली है। यदि उन्हें सरकार से और ऋण मिलेगा तो वह जल्द ही अमेठी में दूसरी दुकान शुरू करेंगी।

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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