राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय

5 हजार साल पुराने पारिजात वृक्ष पर संकट: यूपी में ‘देव वृक्ष’ बीमार, इलाज में जुटे वैज्ञानिक

उत्तर प्रदेश 

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में महाभारत कालीन पांच हजार वर्ष पुराना देव वृक्ष पारिजात हुए बीमार…। वनस्पति अनुसंधान संस्थान फैजाबाद के वैज्ञानिकों की देखरेख में इलाज शुरू हुआ। वैज्ञानिकों की सलाह पर बीमार देव वृक्ष पारिजात के निचले भाग का इलाज करते हुए लेप लगाया गया है। फिलहाल वन विभाग की टीम इलाज में जुटी हुई है।

गौरतलब है कि पारिजात धाम बरौलिया में महाभारत काल का लभगभ पांच हजार वर्ष पुराना पारिजात का वृक्ष है। इस वृक्ष से जिले ही नहीं बल्कि विभिन्न प्रांतों के लोगों की आस्था भी जुड़ी हुई है। मान्यता है कि अर्जुन ने महारानी कुंती की पूजा के लिए अपने बाण से इस वृक्ष को स्वर्ग से धरती पर लाए थे। तब से देव वृक्ष पारिजात यहां विद्यमान है।

आसपास के आस्थावानों का कहना है कि यदि समय रहते पांच हजार वर्ष पुराने इस देव वृक्ष पारिजात का उपचार कर स्वस्थ्य नहीं किया गया तो आने वाले समय में महाभारत कालीन इस देव वृक्ष पारिजात का इतिहास भी पन्नों पर देखने को मिलेगा। बता दें कि विगत दिनों प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में बाराबंकी में स्थित देव वृक्ष पारिजात का जिक्र करते हुए प्रशंसा की है।

पारिजात के महंत मंगल दास ने प्रदेश सरकार के मुखिया से पारिजात की साफ सफाई, खराब पडे वाटर कूलर, शौर ऊर्जा लाइटें सही करवाने एवं पारिजात परिसर में आवाश्यकता अनुसार विकास कार्य करवाने की मांग की है। उन्होंने बताया कि चार पांच दिनों पूर्व वनस्पति अनुसंधान संस्थान फैजाबाद के वैज्ञानिकों की सलाह पर बीमार देव वृक्ष पारिजात का उपचार करते हुए लेप लगाया गया है।

देव वृक्ष पारिजात परिसर में अव्यवस्थाओं का बोलबाला

महाभारत कालीन पांच हजार वर्ष पुराने पारिजात वृक्ष परिसर में अव्यवस्थाओं को बोलबाला है। पारिजात परिसर में करीब एक दर्जन शौर ऊर्जा लाइटें वृक्षों की छाया में लगी हुईं हैं। लाइटों की बैट्री पूर्ण रूप से चार्ज नहीं हो पाती हैं। दो चार घंटे लाइट जल कर बुझ जाती हैं। पारिजात वृक्ष परिसर वन विभाग की देख रेख में है। उसी के कुछ भाग में वन विभाग ने नर्सरी भी कर रखी है।

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button