राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय

पाकिस्तान में बढ़ी तेल की कीमतें, पेट्रोल 458 रुपए लीटर और डीजल 520 पार, आम जनता की कमर टूटी

लाहौर 

 पाकिस्तान ने  डीजल और पेट्रोल की कीमतें 50% से ज्यादा बढ़ा दीं। एक महीने से भी कम समय में यह दूसरी बड़ी बढ़ोतरी है। यह बढ़ोतरी मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक तेल कीमतों में हो रही तेज वृद्धि के चलते की गई है।

डीजल की कीमत 55% से ज्यादा बढ़ाकर 520.35 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है, जबकि पेट्रोल की कीमत लगभग 55% बढ़ाकर 458.40 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है। अमेरिकी तेल कीमतों में 11% से ज्यादा की उछाल आई, जबकि ब्रेंट क्रूड की कीमतें 7% से ज्यादा बढ़ गईं। यह बढ़ोतरी तब हुई जब एक दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि सैन्य अभियान और तेज किए जाएंगे।

डॉन की रिपोर्ट के अनुसार पेट्रोलियम मंत्री मलिक ने कहा कि नई कीमतें शुक्रवार से प्रभावी होंगी. दरअसल ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल युद्ध के बाद से पाकिस्तान ईंधन संकट में डूबा हुआ है और ऐसा पहली बार नहीं है जब 28 फरवरी को शुरू जंग के बाद पाकिस्तान में तेल के दाम बढ़ाए गए हैं। 

अपनी ही बात से पलटे शहबाज
डॉन की रिपोर्ट के अनुसार एक सप्ताह पहले ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि उन्होंने युद्ध शुरू होने के बाद से पेट्रोल की कीमत में 95 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 203 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की तीसरी सिफारिश को खारिज कर दिया है. इससे पहले, पीएम ने कहा था कि उन्होंने डीजल की कीमत में 177 रुपये प्रति लीटर और पेट्रोल की कीमत में 76 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी को खारिज कर दिया है. प्रधानमंत्री ने यह भी कहा था कि 13 मार्च को अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद उन्होंने पहले भी इसी तरह की सिफारिश को खारिज कर दिया था. लेकिन अब पहले से ही आर्थिक संकट से जूझती पाक सरकार बेबस दिख रही है। 

युद्ध शुरू होने के बाद, पाकिस्तान सरकार ने शुरुआत में 6 मार्च को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 55 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी. अब एक बार फिर यह बढ़ोतरी की गई है। 

 आखिर क्यों लगी पाकिस्तान में 'महंगाई की आग'?

पाकिस्तान इस वक्त चौतरफा संकट से घिरा है। इसके पीछे तीन मुख्य कारण हैं:

    वैश्विक तनाव : ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते संघर्ष ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों को आग लगा दी है। दुबई क्रूड $128.52 प्रति बैरल तक पहुंच गया है।

    रुपए की बदहाली : डॉलर के मुकाबले पाकिस्तानी रुपया लगातार गिर रहा है, जिससे तेल का आयात करना बेहद महंगा हो गया है।

    IMF की शर्तें : कर्ज के बोझ तले दबे पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की कड़ी शर्तों को मानना पड़ रहा है, जिसके कारण सरकार चाहकर भी सब्सिडी नहीं दे पा रही।

आम आदमी पर क्या होगा असर?

यह सिर्फ पेट्रोल की कीमत नहीं है, यह एक 'महंगाई का चक्रवात' है जो हर चीज को निगल जाएगा:

    किराया आसमान पर : बस, रिक्शा और ट्रक का भाड़ा बढ़ने से दफ्तर जाने वाले और छात्रों की जेब खाली हो जाएगी।

    थाली से गायब होगी रोटी : जब ट्रांसपोर्टेशन महंगा होगा, तो आटा, दाल, दूध और सब्जियों की कीमतें भी दोगुनी हो जाएंगी।

    धंधा चौपट : डिलीवरी बॉय, टैक्सी ड्राइवर और छोटे व्यापारियों के लिए अब अपना काम जारी रखना नामुमकिन सा हो गया है।

भारत vs पाकिस्तान : एक बड़ी तुलना
जहां भारत में आज पेट्रोल औसतन ₹100-₹110 के बीच स्थिर है, वहीं पाकिस्तान में यह 4 गुना ज्यादा महंगा हो चुका है। भारत ने रूस से सस्ता तेल खरीदने की रणनीति और मजबूत पेट्रोलियम रिजर्व के दम पर अपनी जनता को इस वैश्विक संकट से बचा लिया। दूसरी ओर, पाकिस्तान की राजनीतिक अस्थिरता और कर्ज पर निर्भरता ने उसे इस मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है।

आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल-ईस्ट में युद्ध के हालात नहीं सुधरे, तो अगली समीक्षा में पेट्रोल ₹500 का आंकड़ा भी पार कर सकता है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का कहना है कि लागत तो ₹544 होनी चाहिए थी, लेकिन उन्होंने 'थोड़ी राहत' दी है। मगर जनता पूछ रही है कि ऐसी राहत का क्या करें जिससे चूल्हा जलाना ही मुश्किल हो जाए?

 

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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