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भोपाल में आज अधिकारी बने शिक्षक, 102 सरकारी स्कूलों में अफसरों ने ली क्लास, बच्चों से किया संवाद

भोपाल/ इंदौर 

इंदौर-उज्जैन समेत प्रदेशभर में 1 अप्रैल से नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत हो गई है। स्कूलों में पहले दिन विद्यार्थियों का तिलक लगाकर स्वागत किया गया। इस दौरान बाल सभाओं का आयोजन हुआ। साथ ही छात्रों को पाठ्यपुस्तकों का वितरण भी किया गया।

अब ‘स्कूल चलें हम’ अभियान के तहत 4 अप्रैल को प्रदेशभर के स्कूलों में कलेक्टर समेत प्रशासनिक अधिकारी कक्षाएं लेने पहुंचे। इंदौर जिले में 162 प्रशासनिक अधिकारी सरकारी स्कूलों में पहुंचे। इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा प्रताप नगर स्थित आश्रम क्रमांक-2 में विद्यार्थियों से संवाद किया।

इधर, राजधानी भोपाल में 102 स्कूलों में 102 अधिकारी छात्रों के साथ चर्चा की। वहीं, उज्जैन में 106 अधिकारी स्कूलों में पहुंचे।

सत्र के पहले दिन स्कूलों में विशेष मध्यान्ह भोजन की व्यवस्था की गई। शिक्षा विभाग द्वारा कार्यक्रमों की लगातार समीक्षा की जा रही है, ताकि सत्र की शुरुआत व्यवस्थित रूप से हो सके।

इंदौर निगम कमिश्नर स्कूल पहुंचे
इंदौर नगर निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल नेहरू पार्क स्थित बाल विनय मंदिर स्कूल पहुंचे, जहां उन्होंने बच्चों के साथ समय बिताया और उनके प्रैक्टिकल प्रोजेक्ट्स को समझा। इस दौरान उन्होंने छात्रों से बातचीत कर उनकी सीखने की प्रक्रिया को करीब से देखा।

सिंघल ने कहा कि यह अनुभव उनके लिए बेहद खास रहा। बच्चों का आत्मविश्वास देखकर उन्हें खुशी हुई और उनके द्वारा प्रोजेक्ट्स की प्रस्तुति ने उन्हें अपने स्कूल के दिनों की याद दिला दी। उन्होंने लैब में बच्चों के काम की सराहना करते हुए कहा कि यही बच्चे देश का भविष्य हैं।

कलेक्टर बोले-कभी निराश न हों
कलेक्टर शिवम वर्मा प्रताप नगर स्थित आश्रम क्रमांक-2 पहुंचे। उन्होंने बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा कि कभी निराश ना हों। प्रतियोगिता में भाग लेना ही बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने अपने जीवन के बारे में बताया कि एक छोटे से गांव से उन्होंने पढ़ाई शुरू की। इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रवेश को अपना लक्ष्य बनाया और इसे पूरा भी किया। बाद में एक ऑयल कंपनी में नौकरी करते हुए यूपीएससी की तैयारी की और सफल हुए।

घर-घर संपर्क से बढ़ेगा नामांकन
सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने के लिए शिक्षकों को घर-घर संपर्क अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रत्येक स्कूल से एक शिक्षक अभिभावकों से संपर्क कर बच्चों को प्रवेश के लिए प्रेरित करेगा।

85% से अधिक अंक वालों के अभिभावकों का सम्मान
पिछले सत्र में 85% से अधिक अंक लाने वाले विद्यार्थियों के अभिभावकों को स्कूल स्तर पर सम्मानित किया जाएगा। विभाग का मानना है कि इससे छात्रों का मनोबल बढ़ेगा।

शिक्षा विभाग का लक्ष्य नर्सरी से 12वीं तक के सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों की तर्ज पर विकसित करना है। इसके लिए सत्र की शुरुआत से ही शैक्षणिक गतिविधियों की कार्ययोजना लागू की जा रही है।

नए सत्र के साथ खास शुरुआत
प्रदेशभर में 1 अप्रैल से शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत हो चुकी है। भोपाल में भी पहले दिन स्कूलों में विद्यार्थियों का तिलक लगाकर स्वागत किया गया। स्कूलों में बाल सभाएं आयोजित हुईं और बच्चों को पाठ्यपुस्तकों का वितरण किया गया। 

अभियान का उद्देश्य: बढ़े नामांकन
इस पहल का मकसद सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाना और पढ़ाई के प्रति बच्चों की रुचि बढ़ाना है। शिक्षा विभाग ने शिक्षकों को घर-घर संपर्क अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। हर स्कूल से एक शिक्षक अभिभावकों से मिलकर बच्चों को स्कूल में प्रवेश दिलाने के लिए प्रेरित करेगा।

अभिभावकों का भी होगा सम्मान
पिछले सत्र में 85% से अधिक अंक लाने वाले विद्यार्थियों के अभिभावकों को स्कूल स्तर पर सम्मानित किया जाएगा। विभाग का मानना है कि इससे छात्रों का मनोबल बढ़ेगा और पढ़ाई के प्रति सकारात्मक माहौल बनेगा।

सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने की तैयारी
शिक्षा विभाग का लक्ष्य है कि नर्सरी से लेकर 12वीं तक के सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों के बराबर सुविधाएं और गुणवत्ता दी जाए। इसी को ध्यान में रखते हुए सत्र की शुरुआत से ही अलग-अलग शैक्षणिक गतिविधियों की योजना लागू की जा रही है। 

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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