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गाड़ी में मॉडिफिकेशन का शौक भारी पड़ेगा, चालान और इंश्योरेंस में समस्याएं

इंदौर.

इंदौर शहर में गाड़ियों को स्टाइलिश बनाने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। एलईडी लाइट, तेज आवाज वाले साइलेंसर, हाई पावर म्यूजिक सिस्टम और स्ट्रक्चर में बदलाव युवाओं की पहली पसंद बन रहे हैं, लेकिन यह शौक कई बार सीधे कानून के दायरे में ला खड़ा करता है।

परिवहन नियमों के मुताबिक वाहन में बिना अनुमति किए गए बदलाव अवैध हैं और इसके लिए भारी चालान से लेकर गाड़ी जब्ती तक की कार्रवाई हो सकती है। मोटर व्हीकल एक्ट के तहत वाहन निर्माता द्वारा तय स्पेसिफिकेशन में बदलाव नहीं किया जा सकता। ट्रैफिक पुलिस के अनुसार सबसे ज्यादा कार्रवाई जिन मामलों में होती है, उनमें शामिल हैं – हाई बीम या रंगीन एलईडी-फ्लैश लाइट, मॉडिफाइड या तेज आवाज वाले साइलेंसर, गाड़ी की बॉडी-चेसिस में बदलाव, मूल रंग बदलना (बिना आरटीओ अनुमति), फैंसी या नियम विरुद्ध नंबर प्लेट और ओवरसाइज टायर या ग्राउंड क्लीयरेंस में छेड़छाड़। ट्रैफिक अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में हर महीने सैकड़ों चालान बनाए जा रहे हैं। कई बार वाहन जब्त कर कोर्ट कार्रवाई भी की जाती है।

हादसे में कौन जिम्मेदार
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, अगर मॉडिफिकेशन की वजह से हादसा होता है तो प्राथमिक जिम्मेदारी वाहन मालिक की होती है। हालांकि, अगर यह साबित हो जाए कि गैरेज ने गलत तरीके से बदलाव किया या सुरक्षा मानकों का उल्लंघन किया, तो उस पर भी कार्रवाई हो सकती है। वाहन में अनधिकृत बदलाव कराना खुद मालिक का निर्णय होता है, इसलिए दुर्घटना की स्थिति में जिम्मेदारी से बचना आसान नहीं होता।

इंश्योरेंस क्लेम पर भी खतरा
इंश्योरेंस एडवाइजर आशीष शर्मा का कहना है कि इंश्योरेंस कंपनियां वाहन के मूल ढांचे के आधार पर पॉलिसी जारी करती हैं। यदि गाड़ी में बिना जानकारी दिए बदलाव किया गया है, तो क्लेम खारिज किया जा सकता है।

  • आग लगने या शार्ट सर्किट के मामलों में विशेष जांच होती है
  • मॉडिफाइड वायरिंग या बैटरी मिलने पर क्लेम रिजेक्ट हो सकता है
  • साइलेंसर या इंजन में बदलाव से जुड़े एक्सीडेंट भी क्लेम विवाद में आते हैं

क्या करें

  • कोई भी बदलाव कराने से पहले आरटीओ से अनुमति लें
  • केवल प्रमाणित एसेसरीज का उपयोग करें
  • इंश्योरेंस कंपनी को बदलाव की जानकारी दें

क्या न करें

  • साइलेंसर, लाइट या नंबर प्लेट में अवैध बदलाव
  • लोकल गैरेज से बिना मानक के फिटिंग
  • गाड़ी की बाडी या इंजन में छेड़छाड़।

इंश्योरेंस क्लेम, वारंटी में भी परेशानी 
कंपनियां तय मापदंड के अनुसार वाहन बनाती हैं, जिनमें सुरक्षा पर विशेष फोकस होता है। बदलाव से कई बार सुरक्षा मापदंडों की अनदेखी हो जाती है, इसलिए मॉडिफिकेशन नहीं कराना चाहिए। मॉडिफिकेशन के बाद इंश्योरेंस क्लेम में भी परेशानी आती है। वहीं कंपनी द्वारा दी जा रही वाहन की वारंटी भी खत्म हो सकती है। बदलाव करने से अच्छा है कि वाहन का अपर माडल चुनें, ताकि ओरिजनल फिटिंग मिले।
– आदित्य कासलीवाल, वाइस प्रेसिडेंट, ऑटो मोबाइल एसोसिएशन

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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