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छत्तीसगढ़ में नया धर्म स्वातंत्र्य कानून लागू: राज्यपाल की मंजूरी के बाद नियम हुए प्रभावी

रायपुर.

छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण रोकने बनाए गए नए विधेयक पर आज राज्यपाल रमेन डेका ने हस्ताक्षर किया। अब आज से प्रदेश में नया धर्म स्वातंत्र्य कानून लागू हो गया है। धर्मांतरण पर नए विधेयक के अनुसार अब सख्त कार्रवाई होगी।

धर्म स्वातंत्र्य विधेयक पर राज्यपाल के हस्ताक्षर मामले में पीसीसी चीफ दीपक बैज ने कहा है कि हम उम्मीद करते हैं कि इस कानून का उपयोग किसी निर्दोष पर नहीं होगा। हम मांग करते हैं कि पिछले साढ़े 3 साल से आरक्षण विधेयक राजभवन में पेंडिंग है, जिसमें OBC और अनुसूचित जाति के लिए कानून बनाए थे, इस पर भी हस्ताक्षर किया जाए, लेकिन राजयपाल ने हस्ताक्षर नहीं किया। बीजेपी जो कानून लाती है उसमें राज्यपाल हस्ताक्षर करते हैं, ये दोहरा मापदंड क्यों?

वहीं छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण स्वातंत्र्य कानून पारित होने पर विधायक पुरंदर मिश्रा ने शुभकामाएं दी है। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और डिप्टी सीएम विजय शर्मा का आभार जताते हुए कहा, धर्मांतरण कानून लाए और पारित हो गया। लोगों को भ्रमित करने वाली बात का आज द एंड हो गया। मिश्रा ने कहा, बीजेपी सभी धर्मों का सम्मान करती है, लेकिन कोई प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराएगा तो स्वीकार नहीं किया जाएगा। विधायक पुरंदर मिश्रा ने कांग्रेस पर धर्मांतरण करने का आरोप लगाते हुए कहा, कांग्रेस नहीं चाहती कि भारत विश्वगुरु बने।धर्मांतरण अब रुकेगा। विदेशी ताकत भारत को विश्वगुरु बनने नहीं देना चाहते, वो धर्मांतरण करवाते हैं। कांग्रेस के शासनकाल में 500 चर्च बने।

जानिए छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक- 2026 में क्या है प्रावधान –
छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक- 2026 में अवैध तरीके से धर्मांतरण कराने पर 7 से 10 साल तक की जेल और कम से कम 5 लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान है. यदि पीड़ित नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित है, तो सजा 10 से 20 साल तक की जेल और कम से कम 10 लाख रुपये जुर्माना का प्रावधान है. सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में सजा और कठोर होगी, जिसमें 10 साल से लेकर आजीवन कारावास और कम से कम 25 लाख रुपये जुर्माना का प्रावधान किया गया है. विधेयक के तहत आने वाले अपराध संज्ञेय और अजमानतीय होंगे, मामलों की सुनवाई विशेष न्यायालय में की जाएगी.

विधेयक के मुताबिक, महिमामंडन कर, झूठ बोलकर, बल, अनुचित प्रभाव, प्रलोभन, दबाव, मिथ्या जानकारी या कपटपूर्ण तरीके से धर्म परिवर्तन कराना अवैध माना जाएगा और प्रतिबंधित होगा. यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत जिला मजिस्ट्रेट या सक्षम प्राधिकारी को पहले सूचना देनी होगी. प्रस्तावित धर्मांतरण की जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाएगी, और 30 दिनों के भीतर आपत्ति दर्ज कराने का प्रावधान होगा. विधेयक में प्रलोभन, प्रपीड़न, सामूहिक धर्मांतरण और डिजिटल माध्यम से धर्मांतरण जैसे शब्दों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है. साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि पैतृक धर्म में वापसी को धर्मांतरण नहीं माना जाएगा. एक धर्म का व्यक्ति अगर दूसरे धर्म में शादी करता है, तो ऐसे विवाह को सम्पन्न करवाने वाले फादर, प्रीस्ट, मौलवी या ऐसे विवाह को करवाने वाला जिम्मेदार व्यक्ति विवाह की तारीख से आठ दिन पहले घोषणापत्र सक्षम प्राधिकारी के सामने प्रस्तुत करेगा. सक्षम प्राधिकारी ये तय करेगा कि विवाह कहीं धर्मांतरण के उद्देश्य से तो नहीं किया जा रहा है, ऐसा हुआ तो अवैध घोषित किया जा सकेगा.

शिक्षा व्यवस्था को ख़त्म कर रही सरकार : PCC चीफ
RTE को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा, सरकार की नाकामियों की वजह से नर्सरी में बच्चों के एडमिशन का सिस्टम खत्म हुआ। गरीब के बच्चे अब शिक्षा नहीं ले पाएंगे। इसके लिए सरकार जिम्मेदार है। गरीब बच्चों को नर्सरी से शिक्षा मिलनी चाहिए। यह सरकार शिक्षा व्यवस्था को ख़त्म कर रही है। हम मांग करते हैं कि गरीब बच्चों को नर्सरी से एडमिशन मिलना चाहिए। बीजेपी के गांव चलो अभियान पर PCC चीफ दीपक बैज ने कहा, कांग्रेस ने गांव चलो अभियान की शुरुआत की है, बीजेपी इसी का नकल कर रही है। दो साल में बीजेपी ने सरकार में क्या किया, 1 लाख युवाओं को नौकरी मिली क्या? किसानों का पूरा धान सरकार ने खरीदा क्या? प्रदेश की आम जनता इस समय परेशान है। इन सब मुद्दों से प्रदेश की जनता आक्रोशित हैं।

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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