राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय

डॉक्टर ने 600 मरीजों को लगाए नकली पेसमेकर, अब तक 200 लोगों की मौत

सैफई

उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई, इटावा के डॉ. समीर सर्राफ पर घटिया पेसमेकर लगाकर करीब 600 रोगियों की जान से खिलवाड़ करने और बदले में मोटा कमीशन लेकर विदेश यात्राएं करने का गंभीर आरोप लगा है। .जांच में प्रथम दृष्यटा आरोप सही पाए जाने पर डॉक्टर को इटावा पुलिस ने मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया। उस पर अनावश्यक आर्बिट्रेरी (उपकरण) खरीद, पेसमेकर खरीद में धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार व अनावश्यक विदेश यात्राएं करने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज की गई है।

तय कीमत से नौ गुना ज्यादा रेट पर पेसमेकर खरीदे, वह भी घटिया
जांच में पाया में गया कि डॉक्टर ने एसजीपीजीआई की तय कीमत से नौ गुना ज्यादा रेट पर पेसमेकर खरीदे, वह भी घटिया। एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने बताया कि फरवरी 2022 में डॉ. समीर सर्राफ के खिलाफ आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई के चिकित्सा अधीक्षक रहे डॉ आदेश कुमार ने रिपोर्ट दर्ज कराया था। डॉक्टर समीर वहां कॉर्डियोलॉजी विभाग असिस्टेंट प्रोफेसर थे।

करोड़ों की खरीदारी

तब तत्कालीन चिकित्सा अधीक्षक ने पुलिस को 24 दिसंबर 2022 को स्पीड पोस्ट से पत्र भेजा था, जिसकी जांच तत्कालीन पीजीआई पुलिस चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक के.के. यादव के द्वारा करने के बाद मामला दर्ज किया था. इसमें आरोप था कि सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी के कैथ लैब का एक से डेढ़ साल का सामान उपलब्ध होने के बावजूद यहा तैनात डॉ. समीर सर्राफ एवं संलिप्त अन्य लोगों ने वर्ष 2019 में करीब एक करोड़ मूल्य की अनावश्यक चीजें खरीदीं. इसमें लाखों रुपये की धांधली हुई. सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कई स्तर पर जांच के बाद इस धांधली की पुष्टि के बाद पेमेंट भी रोका था.

क्या है पूरा मामला? 
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सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी के कार्डियोलॉजी विभाग में कार्यरत डॉ.समीर सर्राफ ने मरीजों को नकली पेसमेक एसजीपीजीआई की तय कीमत से अधिक कई गुना रेट पर मरीजों को लगाया था। जब इसकी शिकायत एक मरीज ने संस्थान के प्रशासन से की तो सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी प्रशासन ने एक जांच कमेटी गठित की थी। जांच कमेटी ने भ्रष्टाचार पाया और तय कीमत से 9 गुना अधिक कीमत वसूलने की अनियमितताएं पाई थी। इसके बाद सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी प्रशासन ने एक्सपर्ट की राज्य स्तरीय एक बड़ी जांच टीम गठित कर दी थी और सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी के तत्कालीन कुलसचिव सुरेश चंद शर्मा ने तत्कालीन चिकित्सा अधीक्षक प्रो. डॉ. आदेश कुमार को पत्र लिखकर कहा गया था कि यह मामला अस्पताल से जुड़ा हुआ है। 

 

उल्लेखनीय है कि समीर सर्राफ पर मरीजों के परिजनों से अवैध रूप से पैसे ऐंठने का भी आरोप है। इसके अलावा उसके ऊपर अस्पताल में सामान होते हुए करोड़ों का सामान मँगाने का आरोप है। साथ ही वित्तीय अनियमितता, पीड़ित मरीजों को वित्तीय हानि पहुँचाने और मरीजों की जान खतरे में डालने के आरोप में भी उनके ऊपर केस दर्ज है।

कुछ रिपोर्ट्स बताती है कि 20 मार्च 2021 को विश्वविद्यालय में वह वित्तीय अनियमितता और सत्यनिष्ठा से कर्तव्यों का पालन न करने के दोषी पाया गया थे। उस समय भी उसे निलंबित किया गया था और उसके खिलाफ जाँच हुई थी।।

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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