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बेबी केयर अस्पताल की आग कैसे बनी 7 मासूमों का काल, नहीं था पानी का कोई सोर्स और बिजली के तार नीचे लटक रहे थे

नई दिल्ली
दिल्ली के विवेक विहार में बने बेबी केयर अस्पताल में आग का तांडव देख हर कोई सदमें हैं। शनिवार को यहां ऐसी भीषण आग लगी कि कई परिवार उजड़ गए। कई मासूमों की दुनिया में आने के कुछ घंटों के भीतर ही मौत हो गई। जिस अस्पताल में आग लगी वो अब खंडहर बन गया है। बताया जा रहा है कि अस्पताल में ऑक्सीजन सिलेंडर भी मौजूद के जिसकी वजह से आग भड़क उठी।

जानकारी के मुताबिक अस्पताल रिहायशी इलाके में मौजूद था। इसके आसपास रहने वाले लोगों ने दावा किया है कि अस्पताल के ग्राउंड फ्लोर में अवैध रूप से ऑक्सिजन सिलेंडर रिफिलिंग का काम चलता था। यहां बड़े सिलेंडरों से छोटे सिलेंडर भरे जाते थे। जब आग लगी तो ऑक्सीजन सिलेंडर में धमाके हो घए जिससे आग और भड़क गई। हालांकि यह अभी साफ नहीं है कि आग इन सिलेंडरों में हुए धमाके की वजह से लगी है या किसी और वजह से। शनिवार रात करीब 11.3ज बजे अस्पताल में आग भड़क उठी। यह आग इतनी भीषण थी कि इस पर काबू पाने में 4-5 घंटे गए। इस दौरान सबसे ज्यादा जरूरी अस्पताल के अंदर मौजूद बच्चों को बचाना था। दमकल विभाग के कर्मचारियों ने आसपास के लोगों की मदद से ग्रिल पार कर किसी तरह 12 नवजात शिशुओं को बाहर निकाला। लेकिन लाख कोशिशों के बावजूद इनमें से 7 को बचाया नहीं जा सका।

आग जहां फैली वहां वीडियो बना रहे थे लोग
बताया जा रहा है दमकल विभाग के कर्मियों को आग बुझाने में काफी परेशानी हुई जिससे आग पर काबू पाना और चुनौतीपूर्ण हो गया। फायर सर्विस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, घटनास्थल पर कई लोग जमा हो गए थे और आग का वीडियो रिकॉर्ड कर रहे थे। उनमें से कई लोग आग बुझाने की कोशिश कर रहे लोगों के करीब भी आ गए। उन्होंने कहा कि लोगों को उन जगहों के करीब आने से बचना चाहिए जहां आग बुझाने की कोशिश की जा रही हो ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आग बुझाने वाले लोग सुचारू रूप से काम कर सकें। आग अस्पताल से निकलकर अगली इमारत में एक बुटीक और एक निजी बैंक और दूसरी इमारत में एक चश्मे के शोरूम और घरेलू सामान बेचने वाली एक दुकान तक फैल गई थी। अधिकारी ने बताया कि एक स्कूटर, एक एम्बुलेंस और पास के पार्क के एक हिस्से में भी आग लग गई। उन्होंने कहा, लेकिन स्थानीय लोग पार्क और इमारत के बीच खड़े थे और वीडियो रिकॉर्ड कर रहे थे।

बिजली की लटकती तारें
अधिकारियों ने कहा कि ऐसे अभियानों के दौरान सबसे बड़ी चुनौती जनता को नियंत्रित करना है।  अधिकारी ने कहा, "हमारे सामने एक और चुनौती यह थी कि वहां पानी का कोई सोर्स नहीं था और बिजली के तार नीचे लटक रहे थे। हम जांच कर रहे हैं कि क्या इमारत के पास फायर एनओसी था। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि बच्चों को अस्पताल के पीछे एक खिड़की से अन्य लोगों की मदद से बचाया गया। उन्हें दूसरे अस्पताल ले जाया गया जहां छह को मृत घोषित कर दिया गया जबकि एक की इलाज के दौरान मौत हो गई।

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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