राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय

प्रदेश में नदियों के पुनर्जीवन के लिये किया जा रहा है श्रमदान

भोपाल
प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान में पानी के महत्व को समझाने और संरक्षण के लिये सामूहिक श्रमदान के साथ संगोष्ठी, जल-रैली, दीवार-लेखन के कार्य को भी महत्व दिया जा रहा है। अभियान में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने के लिये भी महिला जन-प्रतिनिधियों की मदद ली जा रही है। राज्य में यह अभियान 30 जून तक लगातार जारी रहेगा। इसके साथ ही जगह-जगह पर सघन पौध-रोपण की योजना तैयार की जा रही है। सघन पौघ-रोपण का कार्य बरसात के मौसम में जन-सहभागिता से पूरा किया जायेगा।

आठनेर में जल संरक्षण रैली
बैतूल जिले में कलेक्टर श्री नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी के निर्देश पर विभिन्न गतिविधियाँ लगातार संचालित हो रही हैं। बैतूल ब्लॉक के ग्राम भडूस एवं आठनेर में महिलाओं की एक विशेष जल संगोष्ठी हुई। संगोष्ठी में जल संरचनाओं के संरक्षण, स्वच्छता और उसके महत्व के विषय में जानकारी दी गयी। संगोष्ठी के बाद तालाबों को पॉलिथिन और कचरे से मुक्त रखने की शपथ दिलायी गयी। उत्कृष्ट विद्यालय परिसर में जल संरक्षण विषय पर जागरूकता रैली निकाली गयी। ब्रह्मकुमारी संस्था की अर्चना दीदी ने जल के महत्‍व, जल-स्रोतों की स्वच्छता और संरक्षण पर विचार व्यक्त किये।

कुडैल नदी के पुनर्जीवन के लिये तैयार की गयी कार्य-योजना
रतलाम में जल गंगा संवर्धन अभियान में ग्रामीण विकास विभाग और ऑर्ट ऑफ लिविंग संस्था द्वारा मिलकर शहर की कुडैल नदी के पुनर्जीवन का निर्णय लिया गया। कुडैल नदी का उद्गम स्थल ग्राम पंचायत ढीकवा जनपद पंचायत रतलाम है। नदी के कैचमेंट एरिया में 24 ग्राम पंचायत और 39 ग्राम शामिल हैं। नदी के जल संरक्षण की कार्य-योजना तैयार की गयी है, जिसमें कंटूर ट्रेंच, बोल्डर बंड, खेत-तालाब, कुआँ रिचार्ज, चेकडेम और स्टॉप डेम को शामिल किया गया है। कुडैल नदी अपने उद्गम स्थल से 28 किलोमीटर का रास्ता तय कर जावरा की मलेनी नदी में मिलती है। सम्पूर्ण कैचमेंट क्षेत्र में रिज टू वैली पद्धति को ध्यान में रखते हुए जल संरक्षण एवं संवर्धन के कार्य किये जायेंगे, जिससे अधिक से अधिक वर्षा जल को रोककर जमीन में उतारा जा सके।

ग्राम रामाबालोदा में तालाब का गहरीकरण
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप उज्जैन जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान में विभिन्न गतिविधियाँ लगातार जारी हैं। जस्ताखेड़ी और उन्डासा तालाब की साफ-सफाई की गयी। जिले में जन-भागीदारी से नहरों की साफ-सफाई के साथ घाटों की रंगाई-पुताई का कार्य किया जा रहा है। जल संसाधन विभाग ने कोयलखेड़ी तालाब (तराना) में गहरीकरण का कार्य हाथ में लिया है। साहिबखेड़ी तालाब की साफ-सफाई का कार्य भी तेजी से किया जा रहा है। कृष्ण-सुदामा तालाब की पाल एवं नहर की सफाई का कार्य जन-भागीदारी से किया जा रहा है। काजीखेड़ी तालाब के स्लूस वेल का सफाई कार्य किया जा रहा है।

मदन सागर तालाब में निकाली गयी जलकुंभी
टीकमगढ़ जिले के जतारा के मदन सागर तालाब में सामूहिक श्रमदान कर जलकुंभी निकाली गयी। सामूहिक श्रमदान में शामिल ग्रामीणों को जल-स्रोतों के आसपास साफ-सफाई रखने की शपथ दिलायी गयी। ग्राम के विद्यार्थियों को उद्यानिकी विभाग की नर्सरी का भ्रमण कराया गया। विभाग के श्री धर्मेन्द्र मौर्य ने नर्सरी में तैयार किये जाने वाले पौधों की विधि और उनकी किस्मों के बारे में जानकारी दी। जतारा में सामूहिक श्रमदान में गायत्री परिवार और नवांकुर संस्था के सदस्यों ने अपनी भागीदारी दी।

ब्रम्हकुंड जल चौपाल में ग्रामीणों ने लिया संकल्प
सतना जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान की बड़े पैमाने पर गतिविधियाँ चल रही हैं। जन-अभियान परिषद और दीनदयाल शोध संस्थान के संयुक्त प्रयासों से माँ मंदाकिनी नदी के पुनर्जीवन का कार्य किया जा रहा है। मझगवाँ के ग्राम भटवा में मंदाकिनी नदी के उद्गम स्थल पर जल चौपाल का आयोजन हुआ। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मंदाकिनी नदी की वर्तमान स्थिति और चुनौतियों के संबंध में आपसी विचार-विमर्श किया। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि ब्रम्हकुंड के पास पहले बड़ी संख्या में बगीचे थे। बगीचे होने के कारण कुंड में हमेशा जल-स्तर अच्छी स्थिति में रहा करता था। पेड़ों की कमी की वजह से कुंड का जल-स्तर लगातार कम होता जा रहा है। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अखिलेश ने बताया कि गाँव की समस्या का सबसे सटीक समाधान ग्रामवासी ही कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि सघन पौध-रोपण और जल संरक्षण इस समस्या का सर्वोत्तम समाधान है। उन्होंने कहा कि पानी की स्थिति में सुधार के लिये ग्रामीणों को राज्य शासन पर निर्भरता कम करनी होगी। सामूहिक श्रमदान के बाद ब्रम्हकुंड में गंगा आरती की गयी।

ग्राम पंचायत जीर में खेत-तालाब का निर्माण
सिंगरौली जिले में चल रहे अभियान में जल संचयन संरचनाओं, जिनमें तालाब, बावड़ी और नदियों की साफ-सफाई कर उन्हें नया स्वरूप दिया जा रहा है। ग्रामीणों को रूफवॉटर हॉर्वेस्टिंग, हैण्ड-पम्प के समीप शॉकपिट के निर्माण के लिये प्रेरित किया जा रहा है। ग्राम पंचायत जीर में खेत-तालाब का निर्माण कार्य सामूहिक श्रमदान के साथ किया गया। जिले में विद्यार्थियों को पानी बचाने की शपथ दिलायी जा रही है। चौपाल और गोष्ठी के जरिये पंचायत पदाधिकारियों और ग्रामीणों को जल का महत्व बताया जा रहा है।

 

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button