
भिलाई-स्थानीय श्री शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में वाणिज्य विभाग के तत्वावधान में दो दिवसीय बहुविषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई। संगोष्ठी वाणिज्य और प्रबंधन में तकनीकी नवाचार की भूमिका पर आधारित थी।संगोष्ठी की संयोजक और विभागाध्यक्ष डॉ संजू सिंग ने जानकारी देते हुए बताया कि संगोष्ठी का उद्घाटन हेमचंद विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ संजय तिवारी ने किया।
विश्वविद्यालय के कुलाधिपति आई पी मिश्रा ने शुभारंभ अवसर पर कहा कि आजादी के बाद से जब हम 50 करोड़ से 150 करोड़ हो गए हैं समय के साथ व्यापार और तकनीकी ने व्यापक प्रगति की है। ये दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। व्यवसाय में में नवाचार ने व्यापार करने के तरीके को ही नहीं बल्कि उपभोक्ताओं के सोचने और खरीददारी के तरीकों को भी बदला है।
इसके अलावा भुगतान प्रणाली में भी क्रांतिकारी परिवर्तन हुआ है,नेट बैंकिंग,डिजिटल वॉलेट से कैश पर निर्भरता कम हुई है। उन्होंने संस्कृत की चौपाइयों के माध्यम से भारतीय ज्ञान परम्परा के सारगर्भित उदाहरण से नवाचार का उल्लेख किया।
मुख्य अतिथि डॉ संजय तिवारी ने विषय की प्रासंगिकता का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रौद्योगिकी एवं नवाचार ने पूरी तरह व्यापार और प्रबंधन को बदल दिया है।और ये केवल व्यावसायिक लागत को कम नहीं कर रहे हैं बल्कि नए रास्ते भी खोल रहे हैं। ई कॉमर्स और डिजिटल मार्केटिंग ने छोटे व्यवसायों को दुनिया भर के ग्राहकों तक पहुंचाया है। सोशल मीडिया और ऑनलाइन मार्केटिंग ने पारंपरिक विज्ञापनों की जगह ले ली है जिससे कम लागत में सटीक ग्राहकों तक पहुंच बनी है।उन्होंने भारत के सोने की चिड़िया कहे जाने की व्याख्या करते हुए कहा कि यहां के वस्त्र,मसाले और खाद्य सामग्री का बड़ा वैश्विक व्यापार था और बदले में सोना हमें मिलता था।आज भी हम इस प्रतिस्पर्धा की होड़ में कहीं भी कम नहीं है,हमारा मानव संसाधन,तकनीक का लोहा पूरी दुनिया मानती है।
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए डॉ जया मिश्रा ने कहा कि ए आई,मशीन लर्निंग व्यवसायों को बेहतर डेटा आधारित निर्णय लेने में मदद कर रही है।इन्वेंटरी सोफ्टवेयर और डेटा एनालिटिक्स से प्रबंधन आसान हुआ है।क्लाउड कम्प्यूटिंग और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुदूर तक पहुंच बनी है। उन्होंने डिजिटल इंडिया और स्टार्टअप की विस्तृत चर्चा की।
संगोष्ठी में कल्याण ,मुंबई की प्रोफेसर अनीता मन्ना,उच्च शिक्षा विभाग के अपर संचालक डॉ तपेश चंद गुप्ता,प्रोफेसर एच पी सिंह सलूजा,डॉ हंसा शुक्ला के व्याख्यान हुए।बड़ी संख्या में शोधार्थियों एवं शिक्षकों ने शोध पत्र की प्रस्तुति दी।इस अवसर पर स्मारिका तथा प्राध्यापक डॉ सुमन पांडे की पुस्तक का विमोचन भी किया गया।कार्यक्रम में विधार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जिसे सभी ने सराहा।कार्यक्रम का संचालन डॉ अंजू कुमारी,हीना गोदवानी,विमल कुमार,कल्पना त्रिवेदी,प्रशांत सुदेलवार,प्राची शर्मा,पूर्वी मिश्रा,संगीता तिवारी,मयूरी असाटी,रेशु चौरसिया ने किया।कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विभिन्न महाविद्यालयों के शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।




