राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय

बंगाल SIR विवाद गरमाया: BJP ने पूर्व मुख्य सचिव की गिरफ्तारी की मांग तेज की

कोलकाता
पश्चिम बंगाल में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर जहां सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस पहले से ही हंगामा कर रही है, वहीं अब इस विवाद में विपक्षी भाजपा भी कूद पड़ी है। भारतीय जनता पार्टी ने SIR पर एक उच्चस्तरीय बैठक में पूर्व मुख्य सचिव मनोज पंत की मौजूदगी को लेकर सवाल खड़े किए हैं और इसे पूरी तरह अवैध करार देते हुए उनकी गिरफ्तारी की मांग की है। पश्चिम बंगाल BJP के पूर्व अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने उत्तर 24 परगना के बारासात में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राज्य की तृणमूल कांग्रेस सरकार पर न्यायपालिका को प्रभावित करने की कोशिश का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि बैठक केवल निर्धारित अधिकारियों के साथ होनी चाहिए, जिसमें राज्य के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, एडवोकेट जनरल और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल शामिल हों। मजूमदार ने कहा कि मनोज पंत अब मुख्य सचिव नहीं हैं, ऐसे में उनकी बैठक में मौजूदगी पूरी तरह गैरकानूनी है। ऐसे में उनके खिलाफ FIR दर्ज हो और उनकी गिरफ्तारी की जानी चाहिए।

बैठक में और कौन-कौन थे?
हालांकि, राज्य सरकार के अधिकारियों ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि पंत को कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पाल की अनुमति से बैठक में शामिल किया गया था। उनके साथ वर्तमान मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती भी मौजूद थीं। अधिकारियों ने यह भी बताया कि राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल भी बैठक में उपस्थित थे।

पंत पर पहले भी हो चुका है विवाद
हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब मनोज पंत की मौजूदगी को लेकर विवाद हुआ हो। इससे पहले भी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के दौरान उनकी मौजूदगी पर सवाल उठे थे। इसी बीच, कोलकाता में मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय के बाहर मंगलवार को उस समय तनाव फैल गया जब नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी वहां पहुंचे। आरोप है कि कुछ टीएमसी समर्थक बूथ लेवल अधिकारियों ने गो बैक के नारे लगाए और कथित तौर पर जूता भी फेंका, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच झड़प हो गई।

TMC की प्रतिक्रिया
पुलिस को स्थिति नियंत्रित करने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा और इस दौरान एक व्यक्ति के घायल होने की खबर है। वहीं, TMC प्रवक्ता कुणाल घोष ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पार्टी इस तरह की घटनाओं का समर्थन नहीं करती, लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि सुवेंदु अधिकारी लगातार लोगों को उकसा रहे हैं, जिसके चलते ऐसी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने SIR प्रक्रिया और प्रशासनिक निष्पक्षता को लेकर राज्य की राजनीति को और गर्मा दिया है।

 

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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