राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय

ईरान संकट में भारत की ताकत दिखी: होर्मुज से निकले 8 भारतीय जहाज, चीन के 70 टैंकर फंसे

नई दिल्ली 

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान युद्ध के बीच 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' से कम से कम आठ भारतीय जहाज सुरक्षित निकल चुके हैं। सात पहले निकल चुके थे और शनिवार को ग्रीन सान्वी नाम के एक और जहाज के होर्मुज जलडमरूमध्य से बाहर निकलने की सूचना है।

विभिन्न एजेंसियों के मुताबिक, होर्मुज में अभी कई देशों के तीन सौ के करीब जहाज (ज्यादातर पेट्रोलियम ढुलाई वाले) फंसे हैं। सबसे ज्यादा जहाज चीन (तकरीबन 60-70) के हैं। लेकिन ईरान की मदद से सबसे ज्यादा भारतीय जहाज ही होर्मुज से बाहर निकल पाए हैं।

होर्मुज से निकले भारतीय जहाज

पश्चिम एशिया विवाद शुरू होने के बाद से एलपीजी संकट के मुहाने पर खड़े भारत के लिए इन जहाजों का आना किसी वरदान से कम नहीं है।

इनकी वजह से एलपीजी आपूर्ति को सुधारने में मदद मिली है, खास तौर पर वाणिज्यिक क्षेत्र को ज्यादा एलपीजी की आपूर्ति संभव हुई है। हालांकि एलपीजी आपूर्ति की स्थिति सामान्य से काफी दूर है।

ईरान युद्ध के बीच भारत की ताकत

सरकार की तरफ से पिछले दस दिनों में शिवालिक, नंदा देवीस पाइन गैस, जग वसंत,बीडब्लू टायर, बीडब्लू एल्म, जग लाडकी और अब ग्रीन सान्वी के होर्मुज से निकलने की सूचना दी गई है।

इसमें जग लाडकी के अलावा अन्य सात एलपीजी से भरे हुए थे। शिवालिक व नंदा देवी में कुल 92,712 टन एलपीजी था। पाइन गैस व जग वसंत में में 92,612 टन और टायर व एल्म से कुल 94,000 टन एलपीजी की आपूर्ति हुई।

जग लाडकी में 80,886 टन क्रूड ऑयल भी मुंद्रा पोर्ट पहुंच गया है। ये सप्लाई मुंद्रा, कांडला, मुंबई और न्यू मंगलौर जैसे बंदरगाहों पर पहुंची। कुल मिलाकर इन जहाजों से भारत को लगभग 2.79 लाख टन से ज्याादा एलपीजी मिला, जो देश की दैनिक खपत (लगभग 1 लाख टन) के हिसाब से 2-3 दिन की पूरी जरूरत को पूरा करने जितना है।

अभी देश की रिफाइनरियों ने घरेलू एलपीजी उत्पादन बढ़ा दिया है, उसे देखते हुए होर्मुज से आने वाले एलपीजी टैंकरों की भूमिका घरेलू आपूर्ति को बेहतर बनाने में ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है।

होर्मुज से धीरे-धीरे और 14 और भारतीय जहाजों के भी जल्दी निकलने की उम्मीद बढ़ गई है। सरकारी आंकड़ों पिछले महीने की शुरूआत में उस इलाके में भारत के कुल 24 जहाज वहां थे।

चीन-पाकिस्तान कर रहे मशक्कत

इसके साथ ही संकेत यह है कि अब ओमानी रूट (ओमान तट के साथ) को अपनाने की संभावना बढ़ रही है, जिससे होर्मुज के पश्चिमी हिस्से में फंसे अन्य जहाजों को निकालना भी आसान हो जाएगा।

हाल ही में तीन ओमानी टैंकर इसी रूट से गुजरे, जो भविष्य में फ्लो को और आसान बना सकता है। दूसरी ओर चीन की सरकार ने 31 मार्च को बताया है कि उसके अभी तक सिर्फ तीन कंटेनर ही होर्मुज से बाहर निकले हैं।

पाकिस्तान ने दावा किया है कि ईरान ने उसके 20 जहाजों को पास करने की अनुमति दी है, लेकिन यह दावा पूरी तरह सत्यापित नहीं हुआ है। अभी तक होर्मुज से दो पाकिस्तानी जहाज कराची पहुंच पाए हैं।

अंतरराष्ट्रीय मीडिया में यह खबर प्रकाशित हुई है कि पाकिस्तान निजी तेल-गैस जहाजों पर अपना झंडा लगाकर अमेरिका को खुश करने की कोशिश कर रहा है।

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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