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रोशनी लौटाने की मुहिम में छत्तीसगढ़ आगे: 1.63 लाख से अधिक मोतियाबिंद ऑपरेशन से हजारों चेहरों पर लौटी मुस्कान

रोशनी लौटाने की मुहिम में छत्तीसगढ़ आगे: 1.63 लाख से अधिक मोतियाबिंद ऑपरेशन से हजारों चेहरों पर लौटी मुस्कान

सरकारी, NGO और निजी संस्थानों की साझेदारी से 91% लक्ष्य हासिल, 15 जिले बने कैटरेक्ट ब्लाइंडनेस बैकलॉग फ्री

रायपुर 
छत्तीसगढ़ में आंखों की रोशनी बचाने और मोतियाबिंद से दृष्टिहिनता मुक्त समाज की दिशा में स्वास्थ्य विभाग की पहल लगातार प्रभावी साबित हो रही है। राष्ट्रीय दृष्टिहीनता एवं अल्प दृष्टि नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य ने वर्ष 2025-26 में निर्धारित लक्ष्य की तुलना में उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज करते हुए 1 लाख 63 हजार 641 से अधिक मोतियाबिंद ऑपरेशन पूरे किए गए हैं। यह कुल निर्धारित लक्ष्य का लगभग 91 प्रतिशत है, जिसने प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण और सुलभ नेत्र चिकित्सा सेवाओं की मजबूत तस्वीर प्रस्तुत की है।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा Vision 20-20 की अवधारणा के अनुरूप शासकीय संस्थानों, गैर-शासकीय संगठनों (NGO) और निजी अस्पतालों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया गया है। इसका परिणाम यह है कि दूरस्थ क्षेत्रों तक भी नेत्र उपचार सेवाएं पहुँच रही हैं और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। शासन द्वारा अनुबंधित संस्थाओं को नियमानुसार भुगतान सुनिश्चित किए जाने से सेवाओं की निरंतरता और प्रभावशीलता भी बनी हुई है। राज्य में कुल उपलब्धि में शासकीय एवं NGO अस्पतालों की भागीदारी 51 प्रतिशत रही, जबकि निजी क्षेत्र ने 49 प्रतिशत योगदान देकर इस स्वास्थ्य अभियान को गति दी। विभागीय अधिकारियों के अनुसार यह साझेदारी मॉडल न केवल उपचार की पहुँच बढ़ा रहा है, बल्कि समयबद्ध और व्यवस्थित नेत्र चिकित्सा प्रबंधन का भी उदाहरण बन रहा है।

कोविड काल में नेत्र ऑपरेशन प्रभावित होने के कारण मोतियाबिंद के लंबित मामलों में वृद्धि हुई थी, लेकिन अब स्वास्थ्य विभाग ने विशेष अभियान चलाकर स्थिति को तेजी से सुधारा है। भारत सरकार की राष्ट्रीय नेत्र ज्योति योजना के तहत घर-घर सर्वे कर चिन्हित मरीजों का उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है, जिससे जिलों को कैटरेक्ट ब्लाइंडनेस बैकलॉग फ्री स्टेटस (CBBFS) दिलाने की दिशा में ठोस प्रगति हो रही है।

प्रदेश के 15 जिले अब तक यह स्टेटस प्राप्त कर चुके हैं, जबकि अन्य जिलों में भी अभियान तेज गति से जारी है। रायपुर स्थित माना का 150 बिस्तरीय नेत्र चिकित्सालय राज्य स्तरीय रेफरल सेंटर के रूप में कार्य करते हुए दूर-दराज के मरीजों को विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध करा रहा है। वहीं, बड़े शहरों में स्थित NGO बेस अस्पतालों के माध्यम से विभिन्न जिलों के मरीजों का प्रोटोकॉल आधारित सुरक्षित ऑपरेशन सुनिश्चित किया जा रहा है। समय पर जांच, पहचान और निःशुल्क उपचार की यह व्यवस्था हजारों लोगों के जीवन में नई रोशनी लेकर आई है और छत्तीसगढ़ को नेत्र स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक मजबूत मॉडल के रूप में स्थापित कर रही है।

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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