राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय

रेलवे कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी! DA 50% पार होते ही बढ़ी हॉस्टल सब्सिडी, हर महीने मिलेंगे ₹8,437

नई दिल्ली

रेलवे कर्मचारियों के बच्चों की शिक्षा को सुगम बनाने और उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए रेल मंत्रालय ने अपनी महत्वपूर्ण योजनाओं में बड़ा बदलाव किया है। मंत्रालय द्वारा चलाई जा रही 'चिल्ड्रंस एजुकेशन अलाउंस' (CEA) और 'हॉस्टल सब्सिडी' योजना के तहत मिलने वाले वित्तीय लाभ को बढ़ा दिया गया है। व्यवस्था में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करते हुए रेल प्रशासन ने नई दरों को प्रभावी कर दिया है, जिससे दूर-दराज के आवासीय विद्यालयों में पढ़ रहे बच्चों के अभिभावकों को बड़ी वित्तीय राहत मिलेगी।

DA 50 फीसदी होने का मिला सीधा लाभ
इस कल्याणकारी योजना का मुख्य लक्ष्य उन रेलकर्मियों के वित्तीय बोझ को कम करना है, जिनके बच्चे अपने माता-पिता से दूर हॉस्टल या आवासीय संस्थानों में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। वर्तमान में देश में महंगाई भत्ता (DA) बढ़कर 50 प्रतिशत के पार पहुंच चुका है।

रेलवे के नियमों के मुताबिक, जैसे ही महंगाई भत्ता इस तय सीमा को पार करता है, वैसे ही अन्य भत्तों की दरों में भी स्वतः ही संशोधन हो जाता है। इसी नियम के तहत अब हॉस्टल सब्सिडी की दरों को बढ़ाकर ₹8,437.50 प्रति माह प्रति बच्चा तय कर दिया गया है।

वास्तविक खर्च से इतर निर्धारित दर पर ही मिलेगा भुगतान
इस वित्तीय सहायता की सबसे अहम खूबी यह है कि रेल कर्मचारी को यह राशि सीधे तौर पर विभाग द्वारा तय की गई फिक्स दर के अनुसार ही मिलती है। हॉस्टल का वास्तविक खर्च चाहे इस निर्धारित रकम से कम हो या फिर ज्यादा, कर्मचारी को ₹8,437.50 प्रति महीने के हिसाब से ही भुगतान किया जाएगा। रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस योजना का लाभ केवल नियमित रूप से अपनी सेवाएं दे रहे (सेवारत) रेलवे कर्मचारियों को ही मिलेगा। साथ ही, एक कर्मचारी अधिकतम अपने दो बच्चों की शिक्षा के लिए ही इस सब्सिडी का दावा करने का पात्र होगा।

नर्सरी से लेकर तकनीकी डिप्लोमा तक की पढ़ाई शामिल
शैक्षणिक दायरे की बात करें तो यह योजना नर्सरी (यानी पहली कक्षा से पहले की तीन शुरुआती क्लासेस) से लेकर कक्षा 12वीं तक की पढ़ाई के लिए पूरी तरह वैध है। इसके अलावा, तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। यदि कोई छात्र 10वीं पास करने के बाद किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से आईटीआई (ITI), पॉलिटेक्निक या किसी भी इंजीनियरिंग डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश लेता है, तो ऐसे तकनीकी पाठ्यक्रमों के शुरुआती दो वर्षों के लिए भी कर्मचारी हॉस्टल सब्सिडी क्लेम कर सकते हैं।

एक साथ दो भत्तों पर रोक, वर्ष में एक बार होगा क्लेम
रेलवे बोर्ड के नियमों के अनुसार, कोई भी कर्मचारी एक ही बच्चे के लिए चिल्ड्रंस एजुकेशन अलाउंस और हॉस्टल सब्सिडी दोनों का लाभ एक साथ नहीं उठा सकता है। हॉस्टल में रहने वाले बच्चे के लिए केवल हॉस्टल सब्सिडी ही देय होगी। इस राशि का दावा सामान्य रूप से शैक्षणिक वर्ष की समाप्ति पर साल में केवल एक बार किया जाता है। दिव्यांग बच्चों के मामले में रेलवे बोर्ड ने विशेष संवेदनशीलता दिखाते हुए उनके लिए शिक्षा भत्ते की दरें सामान्य बच्चों से काफी अधिक रखी हैं।

आवेदन के लिए देने होंगे ये जरूरी दस्तावेज
इस योजना का लाभ लेने के लिए रेलकर्मियों को अपने संबंधित विभाग में आवश्यक दस्तावेज जमा कराने होंगे। इनमें निर्धारित प्रारूप में भरा हुआ आवेदन पत्र, स्कूल या कॉलेज द्वारा जारी प्रामाणिक सर्टिफिकेट और हॉस्टल वार्डन या मैनेजमेंट द्वारा हस्ताक्षरित वैध सर्टिफिकेट शामिल है, जो छात्र के हॉस्टल में रहने की पुष्टि करता हो। इसके साथ ही कर्मचारी को एक स्व-घोषणा पत्र (Self-Declaration) भी देना होगा, जिसमें बच्चों की सही संख्या और हॉस्टल में रहने की समयावधि की स्पष्ट जानकारी देनी होगी।

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button