स्वास्थ्य

ब्रह्म मुहूर्त में 21 दिन जागने से बदल सकती है जिंदगी, जानें फायदे

 हिंदू धर्म में ब्रह्म मुहूर्त ईश्वर का समय माना जाता है. ब्रह्म मुहूर्त को अमृत वेला भी कहा जाता है, जो ध्यान, साधना और योग के लिए दिन का सबसे उत्तम और पवित्र समय माना जाता है. आमतौर पर सुबह 4 बजे से लेकर 5:30 बजे के बीच के समय को ब्रह्म मुहूर्त माना जाता है.

वहीं, वृंदावन के जाने माने बाबा प्रेमानंद महाराज ने भी ब्रह्म मुहूर्त के कई फायदे बताए हैं. प्रेमानंद महाराज के अनुसार, ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 से 6 बजे का जागने और भगवद् भजन के लिए सर्वोत्तम है. वे कहते हैं कि जो साधक इस समय सोता है, वह ब्रह्मचर्य से हीन हो जाता है और उसे शारीरिक-मानसिक बीमारियां घेर सकती हैं. चलिए अब महाराज जी से जानते हैं कि अगर ब्रह्म मुहर्त में 21 दिन लगातार उठा जाए तो क्या होता है.

ब्रह्म मुहूर्त का महत्व
प्रेमानंद महाराज के अनुसार, 'ब्रह्म का अर्थ है ज्ञान और मुहूर्त का अर्थ है समय. यानी यह वह समय है, जब ज्ञान ग्रहण करना सबसे आसान होता है. इस समय वातावरण शांत और शुद्ध होता है. ऑक्सीजन की मात्रा अधिक होती है और मन व दिमाग पूरी तरह शांत रहते हैं. ध्यान, पढ़ाई और योजना बनाने के लिए यह सबसे उत्तम समय है. इसी कारण मंदिर, गुरुद्वारे और अन्य पूजा स्थल भी इसी समय खोले जाते हैं. मान्यता है कि इस समय सकारात्मक ऊर्जा सबसे अधिक सक्रिय होती है.'

21 दिन की ध्यान विधि
प्रेमानंद महाराज के मुताबिक, 'ब्रह्म मुहूर्त और 21 दिवसीय ध्यान विधि एक ऐसी साधना है, जिसका यदि आप लगातार 21 दिनों तक अभ्यास करते हैं, तो आपकी मनोकामनाएं पूरी होने लगती हैं. इस ध्यान को ब्रह्म मुहूर्त में करना सबसे ज्यादा प्रभावशाली माना गया है. किसी भी आदत या सोच को मजबूत करने के लिए निरंतरता जरूरी होती है. अगर आप बीच में छोड़ देते हैं, तो उसका प्रभाव कम हो जाता है.'

प्राचीन ग्रंथों के अनुसार रात को चार कालों में बांटा गया है-
– रुद्र काल: शाम 6:00 से 9:00 बजे तक
– राक्षस काल: रात 9:00 से 12:00 बजे तक
– गंधर्व काल: रात 12:00 से 3:00 बजे तक
– मनोहर काल: भोर 3:00 से सुबह 6:00 बजे तक

इसी मनोहर काल के भीतर ब्रह्म मुहूर्त आता है. इसलिए सुबह 3 से 6 बजे के बीच का समय अमृत वेला माना जाता है.'

यह विधि काम कैसे करती है?
आज्ञा चक्र की शक्ति
यह संकल्प और विज्युलाइजेशन का केंद्र है. यहां ध्यान लगाने से इच्छा मजबूत होती है.

सांस रोकने का प्रभाव
जब आप सांस रोकते हैं, तो दिमाग के अनावश्यक विचार रुक जाते हैं और ध्यान एकाग्र हो जाता है.

अवचेतन मन पर असर
बार-बार संकल्प दोहराने से वह अवचेतन मन में चला जाता है, जिससे आपकी सोच और ऊर्जा उसी दिशा में काम करने लगती है.

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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