शिक्षा

IIT दिल्ली की दो सहेलियों ने बनाया 565 करोड़ रुपये का स्टार्टअप

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) से इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद से जहां छात्र बड़ी टेक कंपनियों में काम करने का सपना देखते हैं या नया टेक्नोलॉजी स्टार्टअप शुरू करने का सपना देखते हैं. वहीं, आईआईटी दिल्ली की नीतू यादव और कीर्ति जांगड़ा ने कुछ अगल करने की सोची. उन्होंने गांव और डेयरी किसानों की पुरानी परेशानियों को समझा और उसे सॉल्व करने के  लिए अपना खुद का एक स्टार्टअप शुरू कर दिया, जो आज करोड़ो की कंपनी बन चुकी है.

कॉलेज में देखा बड़ा ख्वाब
बता दें कि दोनों दोस्त ने आईआईटी दिल्ली से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की. पढ़ाई के बाद दोनों ने अलग-अलग कंपनियों में नौकरी की. एक ने टेक्नोलॉजी और प्रोडक्ट मैनेजमेंट में काम किया, जबकि दूसरी ने कंसल्टिंग और पब्लिशिंग सेक्टर में एक्सपीरियंस हासिल किया. अच्छी नौकरी होने के बाद भी वह कुछ ऐसा करना चाहती थी जो नया है और समाज के काम आ सकें.

कहां से आया आइडिया?
लेकिन इस समय सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि दोनों के दिमाग में इस स्टार्टअप का आइडिया कहां से आया? तो बता दें कि उन्होंने देखा कि आजकल लगभग हर चीज ऑनलाइन खरीदी या बेची जा सकती है लेकिन गाय-भैंस की खरीद-बिक्री अब भी पारंपरिक तरीकों से होती है. किसान आज भी बिचौलियों पर निर्भर रहते हैं जिसकी वजह से उन्हें सही कीमत और भरोसेमंद खरीदार नहीं मिल पाता है. इस परेशानी से डील करने के लिए उन्होंने अपने स्टार्टअप की नींव रखी.

साल 2019 में शुरू की कंपनी
दोनों ने साथ मिलकर साल 2019 में एनिमल टेक्नोलॉजी की शुरुआत एक छोटे से वीकेंड प्रोजेक्ट के रूप में की. उनका उद्देश्य था कि किसान मोबाइल ऐप के जरिए आसानी और सुरक्षित तरीके से गाय-भैंस खरीद और बेच सकें. हालांकि, शुरुआत में यह आसान नहीं था. ऐसा इसलिए क्योंकि ग्रामीण इलाकों के लोगों का ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भरोसा जीतना बहुत बड़ा टास्क था.

लेकिन आज लाखों किसानों को मिला फायदा
हालांकि, धीरे-धीरे किसानों का भरोसा बढ़ता गया औप प्लेटफॉर्म का यूज तेजी से बढ़ा. आज इसपर लाखों खरीदार और विक्रेता जुड़ गए हैं. कंपनी के मुताबिक, हजारों पशु बिक्री के लिए लिस्टेड हैं और यह प्लेटफॉर्म हजारों किसानों के लिए एक भरोसेमंद डिजिटल बाजार बन चुका है. इसके बाद से ही कंपनी की वैल्यूएशन करीब 565 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है.

कोई नई टेक्नोलॉजी नहीं…
बता दें कि इसके लिए किसी नई टेक्नोलॉजी नहीं बनाई गई, बल्कि पहले से मौजूद टेक्नोलॉजी का यूज किया गया जहां डिजिटल बदलाव की सबसे ज्यादा जरूरत थी.

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button