राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय

बिहार में सात लाख से अधिक नीलाम पत्रवाद लंबित, 17,458 करोड़ रुपये दांव पर

पटना
राजस्व पर्षद की अध्यक्ष हरजोत कौर ने नीलाम पत्रवादों के लंबित मामलों के जल्द निबटारे का निर्देश दिया है। शुक्रवार को हुई समीक्षा बैठक में उन्होंने बताया कि राज्य में सात लाख से अधिक नीलाम पत्रवाद के मामले लंबित हैं।

इन मामलों में 17,458.3 करोड़ रुपये की राशि सन्निहित है। उन्होंने कहा कि नए दायर हो रहे वादों के साथ पुराने मामलों की भी समुचित निगरानी जरूरी है।

25 वर्ष एवं उससे अधिक पुराने नीलाम पत्रवादों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने का निर्देश दिया गया। इसके लिए संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर कार्रवाई करने को कहा गया।

पुराने मामलों के निस्तारण पर विशेष जोर
हरजोत कौर ने लंबित वादों की संख्या कम करने के लिए नीलाम पत्र वाद पदाधिकारियों की संख्या बढ़ाने का निर्देश दिया।

उन्होंने कहा कि प्रमंडलीय आयुक्त यह सुनिश्चित करेंगे कि प्रत्येक नीलाम पत्र वाद पदाधिकारी सप्ताह में न्यूनतम तीन दिन सर्टिफिकेट केस से संबंधित न्यायिक कार्य करें।

इससे मामलों के निस्तारण की गति बढ़ाने में मदद मिलेगी। उन्होंने अधिकारियों को पुराने मामलों की नियमित समीक्षा करने को भी कहा। साथ ही, लंबित मामलों की प्रगति की लगातार निगरानी पर जोर दिया गया।

आयुक्तों को हर माह लक्ष्य तय करने का निर्देश
राजस्व पर्षद की अध्यक्ष ने कहा कि प्रमंडल स्तर पर सभी आयुक्तों को हर माह लंबित वादों की संख्या और बकाया राशि में कमी लाने का लक्ष्य दिया जाएगा।

उन्होंने बैठक में शामिल अधिकारियों से कहा कि सभी विभाग अपने स्तर से भी नीलाम पत्रवादों की समीक्षा करें। विभागवार लंबित मामलों की पहचान कर उनके शीघ्र निस्तारण की दिशा में कार्रवाई करने को कहा गया। अधिकारियों को पुराने मामलों में विशेष प्राथमिकता के साथ काम करने का निर्देश दिया गया।

वसूली के बाद कोर्ट फी जमा करने की अपील
बैकों के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए हरजोत कौर ने कहा कि कई मामलों में बकाया राशि की वसूली हो चुकी है, लेकिन कोर्ट फी जमा नहीं होने के कारण वाद अब भी लंबित हैं।

उन्होंने ऐसे मामलों में बैंकों को जल्द से जल्द कोर्ट फी जमा करने को कहा। इससे वसूली हो चुके मामलों का भी विधिवत निस्तारण किया जा सकेगा।

बैठक में राजस्व पर्षद के सदस्य संजीव हंस के अलावा सभी प्रमंडलीय आयुक्त, विभिन्न विभागों और बैंकों के अधिकारी मौजूद रहे।

 

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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