छत्तीसगढ़दुर्ग-भिलाई

स्कूटी मांगने पहुंचा शराब के नशे में दिव्यांग, विधायक रिकेश ने समझाइस दी,पहले नशा छोड़िए, फिर स्कूटी भी मिलेगी

विधायक ने दिव्यांग को दुत्कारा नहीं, सम्मान से बैठाया और समझाया

भिलाई नगर- जरूरतमंद की मदद करना केवल उसके हाथ में सहायता का साधन थमा देना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि वह सहायता उसके जीवन को बेहतर बनाए। वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन ने एक दिव्यांग युवक के मामले में इसी मानवीय सोच और संवेदनशीलता का परिचय दिया।

सुपेला निवासी एक दिव्यांग युवक अपनी जरूरत के लिए ई-स्कूटी मांगने शांति नगर स्थित विधायक कार्यालय पहुंचा था। वह सड़क से ही तेज आवाज में विधायक को पुकार रहा था। आवाज सुनकर विधायक रिकेश सेन स्वयं गेट तक पहुंचे और युवक को सम्मानपूर्वक कार्यालय के भीतर बुलाया।

बातचीत के दौरान युवक की आवाज लड़खड़ाती नजर आई और उसके व्यवहार से विधायक को उसके नशे में होने का संदेह हुआ। मामले की गंभीरता को देखते हुए वैशाली नगर पुलिस एवं यातायात विभाग की टीम को बुलाकर ब्रेथ एनालाइजर से जांच कराई गई। जांच में युवक के शराब के नशे में होने की पुष्टि हुई।

विधायक रिकेश सेन ने युवक की स्थिति को समझते हुए उसे डांटने या अपमानित करने के बजाय बेहद सहज और मानवीय तरीके से समझाइश दी। उन्होंने कहा कि वैशाली नगर विधानसभा क्षेत्र के दिव्यांगजनों को नियमानुसार ई-स्कूटी उपलब्ध कराने की पहल का उद्देश्य उन्हें आत्मनिर्भर बनाना और रोजगार व रोजमर्रा की जरूरतों के लिए आने-जाने में सक्षम बनाना है।

उन्होंने युवक से कहा कि ई-स्कूटी उसके लिए सुविधा और स्वावलंबन का माध्यम बन सकती है, लेकिन यदि कोई व्यक्ति शराब के नशे का आदी है और उसी स्थिति में वाहन चलाता है तो यह सुविधा उसके लिए ही नहीं, बल्कि सड़क पर चलने वाले अन्य लोगों के लिए भी खतरा बन सकती है।

विधायक ने दिव्यांग युवक से शराब छोड़ने की अपील करते हुए उसे भरोसा दिलाया कि नशे से दूर होने के बाद उसे ई-स्कूटी सहित शासन और विधायक की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में हरसंभव सहयोग किया जाएगा।

इस पूरे घटनाक्रम में विधायक की पहल का मानवीय पक्ष भी सामने आया। उन्होंने दिव्यांग युवक की जरूरत को नजरअंदाज नहीं किया, बल्कि उसकी परिस्थिति को समझते हुए यह भी देखा कि जिस सहायता की वह मांग कर रहा है, वह उसके लिए वास्तव में सुरक्षित और उपयोगी साबित होगी या नहीं।

विधायक रिकेश सेन की इस पहल ने यह संदेश दिया कि जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी केवल योजनाओं का लाभ पहुंचाने तक सीमित नहीं है। जरूरतमंद व्यक्ति को सहायता के साथ सही दिशा देना भी उतना ही जरूरी है।एक ओर दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ई-स्कूटी जैसी सुविधा उपलब्ध कराने की पहल है, वहीं दूसरी ओर नशे की स्थिति में वाहन चलाने से होने वाले संभावित हादसे को रोकने की संवेदनशील कोशिश भी।युवक को तत्काल ई-स्कूटी देने के बजाय पहले उसे नशा छोड़ने के लिए प्रेरित करना शायद कठोर निर्णय दिखाई दे, लेकिन इसके पीछे सहायता से अधिक उसके जीवन की सुरक्षा की चिंता दिखाई दी।

Dinesh Purwar

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button