राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय

मध्यप्रदेश में एनालॉग पनीर पर शिकंजा, 24 घंटे में 8 हजार किलो सामग्री जब्त

 भोपाल

तीन पड़ोसी राज्यों में एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध के बाद शुक्रवार को मध्य प्रदेश में भी उत्पादन, भंडारण, बिक्री और उपभोग पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। अब, खाद्य सुरक्षा अधिकारी प्रदेश भर में सैंपल लेने के साथ संदेह के आधार पर पनीर व दूध से बनी अन्य सामग्री जब्त कर रहे हैं। प्रतिबंध के 24 घंटे के भीतर ही मिलावट के संदेह में पनीर, घी, मावा मिलाकर आठ हजार किलो सामग्री जब्त की जा चुकी है। पनीर के सौ से अधिक सैंपल लिए गए हैं, जिनकी रिपोर्ट दो सप्ताह के भीतर आएगी।

पड़ोसी राज्यों में बैन के बाद जागा एमपी का खाद्य एवं औषधि प्रशासन

बता दें कि भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने इसी वर्ष अप्रैल में इसके दूध के पनीर की तरह उपयोग का संदेह जताया था। सभी राज्यों के लिए सार्वजनिक सूचना जारी की गई थी, पर मध्य प्रदेश में खाद्य एवं औषधि प्रशासन का अमला महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और गुजरात में प्रतिबंध लगने के बाद सक्रिय हुआ। वर्ष 2025-26 में पनीर के 13 प्रतिशत सैंपल फेल हुए थे, फिर भी निगरानी तेज नहीं की गई। मापदंडों का सख्ती से पालन कराया जाता तो एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध की नौबत ही नहीं आती।

FSSAI के दिशा-निर्देशों की अनदेखी और होटल संचालकों के लिए निर्देश

एफएसएसएआई ने अपने दिशा-निर्देश में राज्यों को साफ कहा था कि उत्पादन इकाइयों, होटल आदि स्थानों पर सघन निगरानी की जाए। जहां एनालॉग पनीर बिक्री के लिए रखा है, उसमें लेबल लगाया जाए कि यह 'एनालाग' है। प्रत्येक उत्पादन इकाई की जांच के लिए कहा गया था। नोटिस में साफ किया गया था कि पनीर के नाम पर एनालॉग पनीर बेचना कानून का गंभीर उल्लंघन है और इसे तुरंत बंद किया जाना चाहिए। होटल संचालकों को कहा गया था कि वे शेफ को ट्रेनिंग दें कि पनीर के नाम से एनालाग पनीर का इस्तेमाल न करें।

राष्ट्रीय सलाहकार समिति की बैठक में भी जताई गई थी आशंका

वर्ष 2025 में एफएसएसएआई की राष्ट्रीय सलाहकार समिति की बैठक में भी कई राज्यों के खाद्य सुरक्षा आयुक्तों ने आशंका जताई थी कि एनालॉग को दूध से बना पनीर बताकर इसकी बिक्री व होटलों में इसका उपयोग किया जा सकता है।
पैकेट में बंद कर बेचा जाए तो आसानी से हो सकती है पहचान

एक खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि खुला होने पर दूध के पनीर और एनालॉग पनीर में फर्क करना कठिन होता है। ऐसे में एफएसएसएआई को एनालॉग पनीर को हर हाल में पैकेट में ही बेचने के निर्देश जारी करने चाहिए थे। इससे पैकेट में उत्पाद की जानकारी देखकर यह पता करना आसान रहता कि यह एनालाग पनीर है। एफएसएसएआई ने एनालाग पनीर बनाने की अनुमति दे रखी है।

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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