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रेलवे का नया पैसेंजर बुकिंग सिस्टम बनेगा गेम चेंजर, 1 मिनट में 1.5 लाख टिकट और 40 लाख इंक्वायरी संभालेगा

 नई दिल्ली

रेल टिकट बुकिंग को तेज, आसान और ज्यादा भरोसेमंद बनाने के लिए रेलवे अपने पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) को अपग्रेड कर रहा है. नया सिस्टम मौजूदा व्यवस्था के मुकाबले कई गुना ज्यादा लोड संभाल सकेगा. रेलवे के मुताबिक, अपग्रेडेड पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम एक मिनट में 1.5 लाख से ज्यादा टिकट बुकिंग और 40 लाख से ज्यादा पैसेंजर इंक्वायरी संभालने में सक्षम होगा. फिलहाल मौजूदा सिस्टम करीब 32,000 बुकिंग और 4 लाख इंक्वायरी प्रति मिनट संभाल सकता है। 

रेलवे के सेंटर फॉर रेलवे इंफॉर्मेशन सिस्टम्स (CRIS) ने करीब चार दशक पहले पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम डेवलप किया था. 1986 में शुरू हुए इस सिस्टम ने मैनुअल रिजर्वेशन रजिस्टर और काउंटर आधारित बुकिंग को इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में बदल दिया. 1990 के दशक में इसका नेटवर्क रेलवे के अलग-अलग जोन तक पहुंचा. इसके बाद 2002 में इंटरनेट टिकट बुकिंग शुरू हुई और 2014 में नेक्स्ट जेनरेशन ई-टिकटिंग सिस्टम (NGeT) लॉन्च किया गया. आज रेलवे की रिजर्वेशन व्यवस्था का बड़ा हिस्सा इसी तकनीकी ढांचे पर निर्भर है। 

बढ़ती ऑनलाइन बुकिंग से पुराने सिस्टम पर दबाव

पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम को अपग्रेड करने की जरूरत इसलिए भी पड़ी है क्योंकि रेलवे की ऑनलाइन टिकट बुकिंग तेजी से बढ़ी है. रेलवे के आंकड़ों के मुताबिक जून 2025 से जून 2026 के बीच, एक साल में पीआरएस के जरिए 65.08 करोड़ रिजर्व टिकट बुक किए गए. इनमें 57.90 करोड़ टिकट ऑनलाइन बुक हुए, यानी करीब 89% बुकिंग डिजिटल माध्यम से हुई. जुलाई 2026 तक रेलवे के कुल टिकट बुकिंग में ऑनलाइन बुकिंग की हिस्सेदारी बढ़कर 89.84% हो गई थी. इस दौरान 5.72 करोड़ से ज्यादा ऑनलाइन यूजर अकाउंट और 5 लाख से ज्यादा कन्करेंट यूजर्स/सेशन दर्ज किए गए। 

अगस्त से शुरू हुआ फेज्ड माइग्रेशन
रेलवे ने इस साल मई में बताया था कि अगस्त 2026 से नए पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम पर माइग्रेशन की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से शुरू की जाएगी. रेलवे के मुताबिक, फेज्ड माइग्रेशन शुरू हो चुका है और नई IRCTC बीटा वेबसाइट भी इसी ट्रांजिशन का हिस्सा है. पब्लिक रिलेशंस, रेलवे बोर्ड के एडिशनल डायरेक्टर जनरल धर्मेंद्र तेवारी के मुताबिक, पुराने पीआरएस से नए सिस्टम पर माइग्रेशन के दौरान नई यूजर फ्रेंडली वेबसाइट और पुराने सिस्टम के बीच लेयर-बाय-लेयर मैचिंग की जाएगी. इसके लिए धीमी और स्थिर तरीके से लोड आधारित टेस्टिंग की जा रही है, ताकि सिस्टम पर अचानक ज्यादा दबाव न पड़े। 

तत्काल बुकिंग में भी दिखा है सुधार
IRCTC के मुताबिक, 15 जुलाई को बीटा वेबसाइट लॉन्च होने के बाद टिकट बुकिंग की स्पीड में सुधार देखने को मिला. महीने के पहले और दूसरे पखवाड़े की तुलना में तीन मिनट के भीतर पूरी होने वाली तत्काल बुकिंग में 5 फीसदी से ज्यादा बढ़ोतरी हुई. इसी तरह पांच मिनट की विंडो में बुकिंग 3 फीसदी बढ़ी, जबकि 30 मिनट की विंडो में 2 फीसदी से ज्यादा की वृद्धि दर्ज की गई। 

पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम काम क्या है?
पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम रेलवे की रिजर्वेशन व्यवस्था का मुख्य कंप्यूटराइज्ड सिस्टम है. यह टिकट बुकिंग, कैंसिलेशन और बदलाव के साथ सीट अलॉटमेंट, वेटिंग लिस्ट, RAC, रिजर्वेशन चार्ट और पैसेंजर इंक्वायरी जैसे काम संभालता है. रेलवे के रिजर्वेशन काउंटर, IRCTC वेबसाइट, मोबाइल ऐप, RailOne ऐप और अथॉराइज्ड एजेंट इसी सिस्टम से जुड़े हैं. यानी देशभर में रिजर्व टिकट बुकिंग की पूरी प्रक्रिया बड़े स्तर पर पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम के जरिए संचालित होती है। 

यात्रियों को होगा सबसे ज्यादा फायदा
नए सिस्टम का सबसे सीधा फायदा यात्रियों को टिकट बुकिंग की स्पीड और इंक्वायरी के दौरान मिल सकता है. खासकर तत्काल टिकट बुकिंग के दौरान जब एक साथ बड़ी संख्या में यूजर्स सिस्टम पर आते हैं, तब ज्यादा क्षमता वाला पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम महत्वपूर्ण होगा. रेलवे ने रिजर्वेशन की एडवांस रिजर्वेशन पीरियड (ARP) यानी पहले से टिकट बुक करने की सीमा 120 दिनों से घटाकर 60 दिन कर दी है. जुलाई 2025 में आधार-ऑथेंटिकेटेड तत्काल बुकिंग शुरू की गई थी और बाद में OTP वेरिफिकेशन भी जोड़ा गया। 

AI और क्लाउड तकनीक का इस्तेमाल
रेलवे के मुताबिक नया पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम आधुनिक तकनीकों पर आधारित होगा. इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग (ML), बिग डेटा एनालिटिक्स, क्लाउड कंप्यूटिंग, ब्लॉकचेन, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और AR/VR जैसी तकनीकों के इस्तेमाल की संभावना है. मौजूदा पीआरएस को 2010 में Itanium सर्वर और OpenVMS प्लेटफॉर्म पर लॉन्च किया गया था. उस समय की जरूरतों के हिसाब से तैयार यह सिस्टम अब बढ़ते डिजिटल ट्रैफिक और ऑनलाइन बुकिंग के दबाव का सामना कर रहा है. नया सिस्टम क्लाउड-इनेबल्ड, मल्टीलिंगुअल और ज्यादा यूजर फ्रेंडली बनाने की दिशा में तैयार किया जा रहा है। 

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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