राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय

कैग की रिपोर्ट में डीडीए पर सवाल, 39 हजार से ज्यादा फ्लैट खाली और करोड़ों रुपये फंसे

नई दिल्ली
दिल्ली विकास प्राधिकरण ( DDA ) के कामकाज पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने सवाल उठाए हैं। खासकर आवास योजनाओं और फ्लैटों की बिक्री में कमियां सामने आई हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि दिल्ली सरकार को भुगतान करने के बाद भी कुछ अधिग्रहित जमीन का भौतिक कब्जा डीडीए ने नहीं लिया।

2017 के बाद 10 आवास योजनाएं शुरू कीं
पिछले सप्ताह संसद में पेश रिपोर्ट के मुताबिक, 2017-18 से 2021-22 की लेखा परीक्षा अवधि में डीडीए ने अलग-अलग इलाकों में कई तरह के मकान और फ्लैट बेचने के लिए 10 आवास योजनाएं शुरू कीं। रिपोर्ट में कहा गया कि पुरानी सूची को अलग-अलग आवास योजनाओं में बिक्री के लिए रखा गया। वहीं, पिछली योजनाओं में फ्लैट लौटाने और रद्द होने के कारणों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।

बुनियादी सुविधाओं के बिना योजनाएं शुरू करने का आरोप
कैग ने कहा कि आवास योजनाओं में पेश किए गए फ्लैटों के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा उपलब्ध है या नहीं, यह सुनिश्चित किए बिना ही योजनाएं शुरू कर दी गईं। रिपोर्ट के अनुसार, 2017 के बाद शुरू की गई 10 आवास योजनाओं में डीडीए ज्यादातर फ्लैट बेच नहीं पाया।

    31 मार्च 2024 तक डीडीए के पास कुल 39,904 फ्लैट खाली थे। इनमें 38,576 फ्लैट यानी 96.7 प्रतिशत निम्न आय वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के थे। इन फ्लैटों की बिक्री से मिलने वाली करीब 4,983 करोड़ रुपये की रकम भी फंसी हुई है।
    कैग की रिपोर्ट में डीडीए के पास मौजूद बिना बिके पार्किंग गैरेज का भी जिक्र है। इनके कारण कम से कम 78.4 करोड़ रुपये का राजस्व नहीं मिल पाया।

नरेला में जमीन का कब्जा नहीं लिया
लेखा परीक्षा के दौरान कैग ने नरेला में जमीन अधिग्रहण को लेकर भी कमी बताई। 2017-18 तक कुल 2,689 हेक्टेयर अधिग्रहित जमीन में से 419.6 हेक्टेयर का भौतिक कब्जा डीडीए ने नहीं लिया था। अधिग्रहित जमीन के कुछ हिस्से 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के प्रावधानों के तहत समाप्त हो गए थे। इसके बावजूद डीडीए ने दिल्ली सरकार को भुगतान किया था।

भुगतान के बाद जमीन का क्या हुआ?
कैग ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसे मामलों की मौजूदा स्थिति की जानकारी नहीं मिली। यह भी पता नहीं चल सका कि भुगतान की गई रकम डीडीए को वापस की गई या जमीन का भौतिक कब्जा बाद में डीडीए को सौंपा गया। रिपोर्ट के मुताबिक, इस जानकारी के अभाव में लागत संबंधी रिकॉर्ड में दर्ज जमीन के भंडार की वास्तविकता की पुष्टि नहीं की जा सकी।

मंत्रालय ने बताया कानूनी रास्ता अपना रहा डीडीए
आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने अपने जवाब में कहा कि डीडीए अदालतों में जमीन के अधिकार खत्म होने को चुनौती देकर कानूनी रास्ता अपना रहा है। कैग ने इस जवाब पर कहा कि इसे इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए देखा जाना चाहिए कि नरेला में अधिग्रहित पूरी जमीन का कब्जा डीडीए ने वास्तव में नहीं लिया था।

 

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button