राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय

हैदराबाद में टी-हब के नवाचार मॉडल का मध्यप्रदेश प्रतिनिधिमंडल ने किया अध्ययन

भोपाल

मध्यप्रदेश को ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा विभिन्न राज्यों में संचालित नवाचार एवं जीसीसी इकोसिस्टम का अध्ययन किया जा रहा है। इसी क्रम में विभाग के प्रतिनिधिमंडल ने हैदराबाद स्थित टी-हब का अध्ययन भ्रमण किया। इसके बाद जीसीसी, स्टाफिंग एवं टैलेंट क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों और उद्योग संगठनों के साथ मध्यप्रदेश जीसीसी कनेक्ट: लीडरशिप राउंडटेबल आयोजित की गई।

टी-हब के संचालन मॉडल का किया अध्ययन

प्रतिनिधिमंडल ने हैदराबाद में टी-हब के संचालन मॉडल और स्टार्टअप्स को उपलब्ध कराए जा रहे सहयोग का अध्ययन किया। टी-हब राज्य सरकार, शैक्षणिक संस्थानों और उद्योग के समन्वय से संचालित होता है तथा स्वयं अर्जित राजस्व के माध्यम से वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर है। चर्चा में स्टार्टअप्स के लिए संरचित कार्यक्रम, मेंटरशिप और निवेशकों से जुड़ने के अवसरों के साथ कॉर्पोरेट इनोवेशन मॉडल की जानकारी ली गई। इस मॉडल में स्थापित कंपनियां अपनी समस्याओं से जुड़े विषय स्टार्टअप्स के समक्ष रखती हैं और स्टार्टअप्स उनके समाधान विकसित करने पर कार्य करते हैं। टी-हब द्वारा डीप-टेक और सस्टेनेबिलिटी आधारित स्टार्टअप्स पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

भ्रमण के दौरान प्रभावी इनक्यूबेशन के लिए निरंतर वित्तीय सहयोग, पर्याप्त संचालन क्षमता और पेशेवर कार्यान्वयन टीम को महत्वपूर्ण कारक बताया गया। इन अनुभवों को मध्यप्रदेश के इनक्यूबेशन तंत्र को और मजबूत करने में उपयोगी माना गया।

मध्यप्रदेश को जीसीसी डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने पर चर्चा

जीसीसी लीडरशिप राउंडटेबल में मध्यप्रदेश को निवेश के लिए आकर्षक जीसीसी डेस्टिनेशन बनाने के संबंध में विभिन्न सुझाव प्राप्त हुए। इंदौर या भोपाल में किसी प्रमुख जीसीसी की स्थापना के माध्यम से निवेश को बढ़ावा देने और इसके लिए उपयुक्त प्रोत्साहन पैकेज तैयार करने का सुझाव दिया गया। प्रतिनिधियों ने निवेश प्रोत्साहनों के लिए पूरी तरह ऑनलाइन और सरल प्रक्रिया विकसित करने, वरिष्ठ प्रतिभाओं को आकर्षित करने के लिए कर्मचारी आधारित प्रोत्साहन देने तथा बाहर से आने वाले कर्मचारियों के लिए स्कूल प्रवेश, पति-पत्नी के रोजगार और आवास संबंधी सुविधाओं में सहयोग देने पर भी सुझाव दिए।

बैठक में पुणे, हैदराबाद और बेंगलुरु से विस्तार करने वाली कंपनियों और नए विदेशी निवेशकों के लिए अलग-अलग रणनीति अपनाने, GCC और टैलेंट-एनेबलर कंपनियों को स्थानीय स्तर पर नियुक्तियों के लिए सहयोग देने तथा एग्री-प्रोसेसिंग, फूड एंड बेवरेज और ईवी-ऑटो जैसे क्षेत्रों में विशेष फोकस करने के सुझाव भी सामने आए।

प्लग-एंड-प्ले अधोसंरचना और टैलेंट पाइपलाइन विकसित करने पर चर्चा

प्रतिनिधियों ने एक माइक्रो-मार्केट में प्लग-एंड-प्ले अधोसंरचना विकसित करने का सुझाव दिया, जहां तीन माह में 100 सीटों की क्षमता और एक वर्ष में इसे बढ़ाकर 1,000 सीटों तक किया जा सके। साथ ही टियर-1 शहरों की तुलना में वेतन और जीवन-यापन की लागत से जुड़े आंकड़े सार्वजनिक कर डेटा आधारित तरीके से मध्यप्रदेश की स्थिति को मजबूत करने की बात कही गई। दीर्घकालिक टैलेंट पाइपलाइन तैयार करने के लिए शिक्षण संस्थानों और जीसीसी के बीच साझेदारी, एआई स्किलिंग, स्टार्टअप इनक्यूबेशन और विदेशों में रह रहे मध्यप्रदेश मूल के पेशेवरों से संपर्क बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग इन सुझावों का जीसीसी नीति निर्माण की जारी प्रक्रिया के तहत परीक्षण करेगा। इस संबंध में आगे भी विभिन्न हितधारकों के साथ परामर्श किया जाएगा।

 

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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