राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय

कानपुर देहात में योगी सरकार का बड़ा एक्शन, 944 हेक्टेयर जमीन का आवंटन रद्द

लखनऊ
उत्तर प्रदेश की विद्युत व्यवस्था को निर्बाध करने में लगी योगी आदित्यनाथ सरकार ने कानपुर देहात के दो बड़े प्रोजेक्ट में अनावश्यक विलंब और लापरवाही पर बड़ी कार्रवाई की है। सरकार ने दो प्राइवेट कंपनियों की जमीन का आवंटन रद कर दिया है।

योगी आदित्यनाथ सरकार ने कानपुर देहात की भोगनीपुर तहसील में थर्मल पावर प्रोजेक्ट्स लगाने के लिए दो प्राइवेट कंपनियों लैंको अनपारा पावर लिमिटेड और हिमावत पावर प्राइवेट लिमिटेड को दी गई लगभग 944 हेक्टेयर जमीन का आवंटन रद कर दिया है। इन दोनों कंपनियों ने इस जमीन पर लोन लेने के बाद भी कुछ काम नहीं किया है। राज्य सरकार ने निर्देश दिया है कि जमीन वापस सरकार को सौंपी जाए और इसे राज्य के ऊर्जा विभाग के नाम दर्ज किया जाए।

जालसाजी-अपराध पर जीरो टॉलरेंस
सरकार ने जालसाजी-अपराध पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए कानपुर देहात में दो कंपनियों को आवंटित 944 हेक्टेयर जमीन का आवंटन रद कर उसे सरकार के पक्ष में दर्ज करने का अंतिम निर्देश जारी कर दिया है। वर्ष 2011 में थर्मल पावर प्लांट लगाने के नाम पर मैसर्स लैन्को अनपरा पावर लिमिटेड और मैसर्स हिमावत पावर प्राइवेट लिमिटेड को भोगनीपुर तहसील में जमीनें आवंटित की गई थीं। कंपनियों ने 15 वर्ष बाद भी कोई काम शुरू नहीं किया और बिना इजाजत जमीनों को बैंकों में गिरवी रख दिया। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की की अनुमति मिलते ही ऊर्जा विभाग ने कानपुर देहात के जिलाधिकारी को निर्देश जारी किए हैं कि खतौनी से दोनों कंपनियों का नाम खारिज कर यह जमीन उत्तर प्रदेश सरकार और ऊर्जा विभाग के नाम दर्ज की जाए।

कंपनियों ने तोड़ी अनुबंध की शर्त, की धोखाधड़ी
अनुबंध की शर्त के अनुसार, कंपनियों को जमीन का कब्जा मिलने के तीन वर्ष में पावर प्रोजेक्ट का निर्माण पूरा करना था। तीन वर्ष से अधिक का लंबा समय बीत जाने के बाद भी कंपनियों ने पावर प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य आज तक शुरू ही नहीं किया। इस तरह दोनों ही कंपनियों ने एग्रीमेंट की पहली सबसे बड़ी शर्त का सीधा उल्लंघन किया। इसके बाद जांच में धोखाधड़ी की दूसरी बड़ी बात सामने आई।

जमीन को बैंक में रखा बंधक
एग्रीमेंट की शर्त में साफ लिखा था कि कंपनियां राज्य सरकार की अनुमति के बिना जमीन को किसी को बेच नहीं सकतीं, न ही लीज पर दे सकती हैं और न ही गिरवी रख सकती हैं। इसके बावजूद मैसर्स हिमावत पावर ने बिना किसी अनुमति के जमीन को आईडीबीआई बैंक में बंधक रख दिया। वहीं मैसर्स लैन्को अनपरा पावर ने भी सरकार को बिना बताए जमीन को केनरा बैंक और पंजाब नेशनल बैंक में गिरवी रख दिया। कंपनियों ने इस संबंध में ऊर्जा विभाग को कोई पत्र नहीं भेजा और न ही शासन से कोई इजाजत ली, जिससे राज्य सरकार को बड़ी आर्थिक क्षति पहुंची।

नोटिस का नहीं दिया जवाब
शर्तों का उल्लंघन होने पर शासन ने सख्त रुख अपनाया और अनुबंध की शर्त 4(6) के तहत 25 मई 2026 को दोनों कंपनियों को 15 दिन के भीतर जवाब देने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया। यह नोटिस कंपनियों के रजिस्टर्ड पते और ईमेल पर भेजा गया, जो कंपनियों को प्राप्त भी हो गया। इसके बावजूद निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी कंपनियों की तरफ से कोई स्पष्टीकरण या उत्तर उपलब्ध नहीं कराया गया। इससे स्पष्ट हो गया कि कंपनियों के पास शर्तों के उल्लंघन का कोई जवाब नहीं था।

अपर मुख्य सचिव ने जारी किया आदेश
कंपनियों के जान-बूझकर काम न करने, सरकार को आर्थिक क्षति पहुंचाने और नोटिस का जवाब न देने के कारण 25 अगस्त 2026 को अपर मुख्य सचिव डॉ आशीष कुमार गोयल ने अंतिम आदेश निर्गत कर दिया। आदेश में राज्यपाल की अनुमति से पूरी 944.029 हेक्टेयर जमीन को ऊर्जा विभाग में वापस निहित करने के लिए कहा गया। इसके साथ ही, आदेश की प्रति कानपुर देहात जिलाधिकारी को भेजकर यह निर्देश दिया गया है कि वे तत्काल राजस्व अभिलेखों (खतौनी) में इस पूरी जमीन को ऊर्जा विभाग व राज्य सरकार के नाम अंकित कराने की नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें।

यह है पूरा मामला
इस पूरे मामले की शुरुआत 28 जून 2011 को हुई थी, जब ऊर्जा विभाग और दोनों कंपनियों के बीच एग्रीमेंट हुआ था। मैसर्स लैन्को अनपरा पावर लिमिटेड को भोगनीपुर तहसील के ग्राम कृपालपुर, चपरघटा, रसूलपुर भुरण्डा और भरतौली में 90.3260 हेक्टेयर पट्टा भूमि तथा 285.0524 हेक्टेयर अधिग्रहीत निजी भूमि मिलाकर कुल 375.378 हेक्टेयर जमीन दी गई थी। वहीं, मैसर्स हिमावत पावर प्राइवेट लिमिटेड को ग्राम अमिलिया, सिहारी, कछगाँव और चपरघटा में 217.813 हेक्टेयर पट्टा भूमि तथा 350.838 हेक्टेयर अधिग्रहीत निजी भूमि मिलाकर कुल 568.651 हेक्टेयर जमीन उपलब्ध कराई गई थी।

 

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button