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चिकित्सकों में सेवा और संवेदनशीलता का भाव स्वास्थ्य सेवाओं के विधिवत प्रदाय के लिए अहम : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल

उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि चिकित्सा शिक्षा का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को बेहतर चिकित्सकीय ज्ञान और कौशल प्रदान करना नहीं है, बल्कि उनके भीतर सेवा, संवेदनशीलता, मानवीय मूल्यों और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी उतना ही आवश्यक है। युवा चिकित्सकों के व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाकर उन्हें मरीज और उसके परिवार की भावनाओं को समझने वाला संवेदनशील चिकित्सक बनाना समय की आवश्यकता है। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि इसी उद्देश्य से मध्यप्रदेश शासन ने सेवांकुर भारत के साथ एमओयू किया है। सेवांकुर भारत मेडिकल विद्यार्थियों के बीच कार्य करने वाली संस्था है, जो वर्तमान में देश के 200 से अधिक मेडिकल कॉलेजों और 17 हजार से अधिक विद्यार्थियों से जुड़ी है। संस्था विद्यार्थियों में सेवा, नेतृत्व, संवेदनशीलता और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के लिए कार्य कर रही है। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने मंत्रालय में “एक सप्ताह देश के नाम" अभियान की समीक्षा की।

मरीज के लिए डॉक्टर का व्यवहार भी उपचार का हिस्सा

उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि डॉक्टर की मुस्कान, उसका व्यवहार और मरीज के प्रति संवेदनशील संवाद कई बार उपचार की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जब कोई मरीज या उसका परिवार कठिन परिस्थिति में अस्पताल पहुंचता है, तो वह डॉक्टर की ओर आशा और विश्वास से देखता है। ऐसे समय में चिकित्सक का सहयोग, आत्मीय व्यवहार और भरोसा देने वाला संवाद मरीज के मन में सकारात्मक ऊर्जा और उपचार के प्रति विश्वास पैदा करता है।उन्होंने कहा कि चिकित्सक का अच्छा व्यवहार केवल शिष्टाचार नहीं, बल्कि चिकित्सा सेवा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए युवा चिकित्सकों के व्यक्तित्व में संवेदना और सेवा-भाव का विकास उनकी मेडिकल शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए।

ग्रामीण भारत को करीब से समझें युवा चिकित्सक

उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि "एक सप्ताह देश के नाम" अभियान इस दिशा में महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है। इसके माध्यम से मेडिकल विद्यार्थियों और युवा चिकित्सकों को समाज के विभिन्न वर्गों, विशेषकर ग्रामीण एवं वंचित क्षेत्रों के लोगों के बीच जाकर उनके जीवन और परिस्थितियों को करीब से समझने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि जब विद्यार्थी ग्रामीण भारत को नजदीक से देखेंगे, वहां की सामाजिक एवं आर्थिक परिस्थितियों, स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों और लोगों की अपेक्षाओं को समझेंगे, तो उनके भीतर मरीजों के प्रति सहानुभूति के साथ-साथ वास्तविक संवेदनशीलता और सेवा की दृष्टि विकसित होगी। यह अनुभव उन्हें भविष्य में अधिक जिम्मेदारी और मानवीय दृष्टिकोण के साथ चिकित्सा सेवा करने के लिए प्रेरित करेगा।

मेडिकल कॉलेजों की संख्या और सीटें बढ़ाने के साथ संस्कार भी जरूरी

उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ाने के साथ मेडिकल सीटों में वृद्धि और चिकित्सकों की भर्ती पर भी निरंतर कार्य कर रही है। आने वाले समय में बड़ी संख्या में युवा चिकित्सा क्षेत्र में प्रवेश करेंगे। ऐसे में यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि चिकित्सा क्षेत्र में आने वाली नई पीढ़ी ज्ञान और तकनीकी दक्षता के साथ सेवा एवं मानवीय मूल्यों से भी समृद्ध हो। उन्होंने कहा कि आज के मेडिकल विद्यार्थी ही कल के चिकित्सक और स्वास्थ्य व्यवस्था के महत्वपूर्ण स्तंभ होंगे। इसलिए उनके प्रशिक्षण के दौरान समाज से उनका जुड़ाव बढ़ाना और उन्हें सेवा के विभिन्न अवसरों से परिचित कराना दीर्घकालीन रूप से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाएगा।

प्रत्येक मेडिकल कॉलेज में अभियान को आगे बढ़ाने के निर्देश

उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों के अधिष्ठाताओं से अपेक्षा की कि सेवांकुर भारत के साथ हुए एमओयू को प्रभावी और सतत पहल के रूप में आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक मेडिकल कॉलेज में एक कॉलेज प्रतिनिधि नामित किया जाए। सेवांकुर भारत का परिचयात्मक सत्र आयोजित कर विद्यार्थियों को संस्था के उद्देश्यों एवं गतिविधियों की जानकारी दी जाए। इच्छुक विद्यार्थियों को "एक सप्ताह देश के नाम" अभियान से स्वैच्छिक रूप से जुड़ने के लिए प्रेरित किया जाए।चयनित विद्यार्थियों के ओरिएंटेशन एवं कार्यक्रम के समन्वय में मेडिकल कॉलेज आवश्यक सहयोग प्रदान करें। सेवांकुर भारत और मेडिकल कॉलेजों के बीच निरंतर एवं सार्थक सहयोग विकसित किया जाए। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वयं सेवांकुर भारत के साथ एमओयू की पहल की है। इसका उद्देश्य चिकित्सा क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों को और अधिक प्रभावी बनाना तथा चिकित्सा शिक्षा को समाज और सेवा से अधिक मजबूती से जोड़ना है। इसलिए सभी मेडिकल कॉलेज इस पहल को सक्रियता से अपनाएं और इसके उद्देश्यों को सफल बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।

सेवा के संस्कार से तैयार होगी संवेदनशील चिकित्सकों की नई पीढ़ी

उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि मध्यप्रदेश में ऐसी चिकित्सक पीढ़ी तैयार हो, जिसकी पहचान केवल उसकी चिकित्सा विशेषज्ञता से नहीं, बल्कि उसकी सेवा भावना, संवेदनशील व्यवहार और सामाजिक जिम्मेदारी से भी हो। उन्होंने कहा कि मरीज के प्रति संवेदनशीलता, ग्रामीण और वंचित समाज की परिस्थितियों की समझ तथा सेवा का भाव युवा चिकित्सकों के व्यक्तित्व का स्वाभाविक हिस्सा बने—यही इस पहल की वास्तविक सफलता होगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मेडिकल कॉलेजों और सेवांकुर भारत के निरंतर सहयोग से मध्यप्रदेश में चिकित्सा सेवा को और अधिक मानवीय एवं समाजोन्मुख बनाने में महत्वपूर्ण सफलता मिलेगी। बैठक में प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा  सुखवीर सिंह, आयुक्त  धनराजू एस, वनवासी कल्याण आश्रम के  गिरीश कुबेर, जनजातीय मंत्रणा परिषद, राजभवन के डॉ. रूपनारायण मांडवे, वीसी के माध्यम से डॉ. अश्विनी कुमार तुपकरी,  महादेव पड़वल,  गौरव शर्मा सहित प्रदेश के चिकित्सा संस्थानों के अधिष्ठाता उपस्थित रहे।

 

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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