राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय

शेख हसीना खुद बांग्लादेश लौटेंगी या भारत भेजेगा? जानें क्यों लिया वापसी का फैसला

नई दिल्ली

भारत में शरण पाईं बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की वापसी को लेकर चर्चाएं शुरू हो गईं हैं। उन्होंने ही दिसंबर में अपने मुल्क लौटने की संभावनाएं जताई हैं। खास बात है कि उन्होंने ये ऐलान ऐसे समय पर किया है, जब ढाका ने उन्हें मौत की सजा सुनाई है। शेख हसीना के आरोप हैं कि ये सजा राजनीति से प्रेरित है और उन्हें अपने बचाव का मौका नहीं मिला। शेख हसीना ने यह भी साफ किया है कि वह बांग्लादेश लौटने का फैसला उन्होंने खुद किया है।

न्यूज18 से बातचीत में जब पूछा गया कि आपको वापस लौटने पर फांसी दी जा सकती, क्या आप इसे लेकर चिंतित नहीं हैं। उन्होंने कहा, 'मुझे अपनी जिंदगी की कोई चिंता नहीं है। मैंने कई बार मौत का सामना किया है। मुझे चिंता न्याय के खत्म होने की है। मुझे चिंता इस बात की है कि अदालतों, कानूनों और संस्थाओं का इस्तेमाल राजनीतिक बदले की भावना के लिए किया जा रहा है।'

फांसी की सजा मानने से इनकार
उन्होंने कहा, 'राजनीति से प्रेरित प्रक्रिया के जरिए सुनाई गई मौत की सजा को आखिरी बात नहीं माना जा सकता। मुझे अपना बचाव करने का सही मौका नहीं दिया गया। आरोपी के शामिल हुए बगैर, उचित बचाव के बिना और राजनीतिक दबाव में सुनाया गया फैसला न्याय नहीं है।'

उन्होंने कहा, 'जिस कानून का इस्तेमाल अब मेरे खिलाफ किया जा रहा है, उसे मेरे कार्यकाल के दौरान 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान हुए अत्याचारों के पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए बनाया गया था। अगर अधिकारी सच में न्याय में यकीन रखते हैं, तो उन्हें एक स्वतंत्र प्रक्रिया की अनुमति देनी चाहिए। मुझे अदालत के सामने पेश होने दें। मुझे सबूत पेश करने दें। मेरे वकीलों को मेरा बचाव करने दें। गवाहों के बयान होने दें। सबूतों को सामने आने दें।'

न्याय का मतलब सजा नहीं
उन्होंने कहा, 'मैं बस वही उम्मीद करती हूं जिसकी गारंटी संविधान और कानून हर नागरिक को देते हैं। व्यक्तिगत सुरक्षा, वकीलों तक पहुंच, अपना बचाव करने का अधिकार, निष्पक्ष अदालत, कार्यवाही और सुनवाई।' उन्होंने कहा के ये राजनीतिक शर्तें नहीं हैं, बल्कि कानून की बुनियादी जरूरते हैं। उन्होंने कहा, 'अगर सरकार कहती है कि आओ और न्याय का सामना करो, तो मैं कहूंगी कि मैं आने के लिए तैयार हूं। लेकिन न्याय का मतलब न्याय होना चाहिए, पहले से तय सजा नहीं।'

क्या भारत भेज रहा है वापस
जब पूछा गया कि क्या उन्होंने वापसी के बारे में भारत से बात की है। उन्होंने वेबसाइट को बताया, 'भारत संप्रभु है और मैं उसकी सरकार की ओर से कोई बात नहीं करूंगी। मेरी समझ यह है कि भारत एक कानूनी मामले की तरह प्रत्यर्पण पर काम कर रहा है। यह भारत का मामला है।' उन्होंने कहा, 'मैंने हमेशा बांग्लादेश के साथ भारत की दोस्ती को अहमियत दी है, लेकिन वापस बांग्लादेश लौटने का फैसला मेरा अपना है। भारत दोस्त है, लेकिन बांग्लादेश मेरा घर है। मैं अनिश्चितकाल तक अपने देश से बाहर नहीं रह सकती।'

अगस्त में हसीना ने कहा था कि वह दिसंबर में बांग्लादेश लौटने का फैसला कर चुकी हैं। उन्होंने कहा था, 'मुझे पता है, वे मुझे जेल में डाल सकते हैं या मेरी जान ले सकते हैं। मैं अपने लोगों के साथ रहने के लिए घर वापस जाऊंगी।'

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button