राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय

दुनिया का नक्शा बदलने की तैयारी, अफ्रीका दिखेगा बड़ा; यूरोप-अमेरिका छोटे, भारत ने दिया समर्थन

न्यूयॉर्क

दुनिया को देखने और समझने के तरीके में बड़ा बदलाव आने वाला है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने एक नए वर्ल्ड मैप को अपनाने के पक्ष में मतदान किया है। इस नक्शे में अफ्रीका का आकार पहले के मुकाबले बड़ा दिखाई देगा, जबकि उत्तरी अमेरिका और यूरोप छोटे नजर आएंगे।

नए नक्शे को ‘इक्वल अर्थ कार्टोग्राफिक प्रोजेक्शन’ कहा जाता है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक इसका मकसद दुनिया के महाद्वीपों के भू-भाग को ज्यादा सटीक तरीके से दिखाना है। प्रस्ताव के पक्ष में भारत समेत 164 देशों ने वोट किया, जबकि अकेले अमेरिका ने इसके खिलाफ मतदान किया। छह देशों ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया।

क्यों बदला जा रहा है दुनिया का पुराना नक्शा?
अब तक दुनिया में व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाला मर्केटर प्रोजेक्शन 1569 में फ्लेमिश कार्टोग्राफर जेरार्डस मर्केटर ने तैयार किया था। इसे मुख्य रूप से समुद्री नौवहन के लिए डिजाइन किया गया था।

इस नक्शे की सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसमें धरती के ध्रुवों के पास मौजूद इलाके अपने वास्तविक आकार से काफी बड़े दिखाई देते हैं, जबकि भूमध्य रेखा के आसपास के इलाके अपेक्षाकृत छोटे नजर आते हैं। नए इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन का उद्देश्य इस विकृति को कम करना और महाद्वीपों के आकार को ज्यादा सटीक तरीके से दिखाना है।

164 देशों ने किया समर्थन, अमेरिका ने किया विरोध
UN महासभा में नए नक्शे से जुड़े प्रस्ताव को 164 देशों का समर्थन मिला। अमेरिका ने इसके खिलाफ वोट किया, जबकि छह देश मतदान से अलग रहे। हालांकि यह प्रस्ताव कानूनी तौर पर बाध्यकारी नहीं है। इसका मकसद सदस्य देशों को शिक्षा, संस्थानों और दूसरी जगहों पर ज्यादा सटीक वर्ल्ड मैप इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करना है। भारत ने UN के "नक्शे को सही करने" वाले प्रस्ताव का स्वागत किया है। भारतीय राजनयिक रघु पुरी ने यूएन में कहा, "समान क्षेत्रफल वाले प्रोजेक्शन इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे महाद्वीपीय या क्षेत्रीय भू-भागों के सापेक्ष आकार और क्षेत्रफल को बनाए रखते हैं।"

क्या अब मर्केटर मैप पूरी तरह खत्म हो जाएगा?
नहीं। UN के प्रस्ताव का मतलब यह नहीं है कि मर्केटर प्रोजेक्शन पर तत्काल रोक लग गई है। नया प्रस्ताव सदस्य देशों से पारंपरिक मर्केटर नक्शे की जगह इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन को अपनाने का आग्रह करता है, ताकि दुनिया के भू-भाग का ज्यादा सटीक प्रतिनिधित्व हो सके। यानी आने वाले समय में स्कूलों, संस्थानों और दूसरी जगहों पर दुनिया का नक्शा पहले से अलग नजर आ सकता है।

अफ्रीका को लेकर क्यों है इतनी चर्चा?
नए नक्शे में अफ्रीका का आकार पहले इस्तेमाल किए जाने वाले मार्केटर प्रोजेक्शन की तुलना में ज्यादा बड़ा दिखाई देता है। इसी वजह से यह बदलाव खास तौर पर चर्चा में है। नए नक्शे का उद्देश्य केवल अफ्रीका को बड़ा दिखाना नहीं, बल्कि दुनिया के अलग-अलग महाद्वीपों के वास्तविक भू-भाग को अधिक सटीक तरीके से प्रस्तुत करना है।

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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