छत्तीसगढ़दुर्ग-भिलाई

राष्ट्रीय शिक्षा नीति की समझ और प्रभावी पाठ्यचर्या का निर्माण आवश्यक- डॉ. जी. ए. घनश्याम

"भारतीय ज्ञान परम्परा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति" विषय पर श्री शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में कार्यशाला हुयी आयोजित

भिलाई- श्री शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, भिलाई में आयोजित फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम के अंतर्गत “भारतीय ज्ञान परम्परा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति” विषय पर उच्च शिक्षा के प्राचार्य डॉ. जी. ए. घनश्याम का सारगर्भित एवं ज्ञानवर्धक व्याख्यान आयोजित किया गया। उन्होंने अपने व्याख्यान में उच्च शिक्षा नीति, वर्तमान शैक्षणिक परिदृश्य तथा पाठ्यचर्या निर्माण के विभिन्न महत्वपूर्ण आयामों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को अपने व्याख्यान का प्रमुख केंद्र बनाया।

डॉ. घनश्याम ने कहा कि वर्तमान समय में उच्च शिक्षा का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि उन्हें ज्ञान, कौशल, रचनात्मकता, नवाचार, नैतिक मूल्यों एवं रोजगारपरक दक्षताओं से संपन्न करना है। इसके लिए उच्च शिक्षा संस्थानों में ऐसी पाठ्यचर्या विकसित किए जाने की आवश्यकता है, जो विद्यार्थियों की बदलती आवश्यकताओं, उद्योग जगत की अपेक्षाओं तथा समाज की समकालीन चुनौतियों के अनुरूप हो।

उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रमुख प्रावधानों पर चर्चा करते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा को मुख्य धुरी पर रख कर राष्ट्रीय शिक्षा नीति कि संरचना की गई है जिसमें ज्ञान, चरित्र, कौशल को फोकस किया गया है। बहुविषयक शिक्षा, विद्यार्थी केंद्रित शिक्षण, लचीली पाठ्यचर्या, क्रेडिट आधारित प्रणाली, कौशल विकास, भारतीय ज्ञान परंपरा, शोध एवं नवाचार तथा रोजगारपरक शिक्षा को उच्च शिक्षा के विकास के महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 शिक्षा व्यवस्था को अधिक समावेशी, लचीला, बहुआयामी और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

व्याख्यान के दौरान उन्होंने पाठ्यचर्या निर्माण की प्रक्रिया पर विशेष रूप से चर्चा करते हुए कहा कि एक प्रभावी करिकुलम केवल विषयों और इकाइयों का संकलन नहीं होता, बल्कि उसमें अध्ययन अध्यापन विधि, मूल्यांकन पद्धति और विद्यार्थियों के समग्र विकास के बीच प्रभावी समन्वय होना चाहिए। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि पाठ्यक्रम तैयार करते समय स्थानीय आवश्यकताओं के साथ-साथ राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर हो रहे परिवर्तनों को भी ध्यान में रखना चाहिए।

उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन, सतत मूल्यांकन, शोध संस्कृति, नवाचार तथा अकादमिक स्वतंत्रता को प्रोत्साहित करना आवश्यक है। उन्होंने पाठ्यचर्या को समय-समय पर समीक्षा एवं संशोधन के माध्यम से अधिक प्रासंगिक बनाने पर भी जोर दिया।

कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. सोनू अग्रवाल ने कहा कि आज के बदलते शैक्षणिक परिवेश में शिक्षकों के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति और भारतीय ज्ञान परम्परा की समझ अत्यंत आवश्यक है। ऐसे फैकल्टी डेवलपमेंट कार्यक्रम शिक्षकों को नई शैक्षणिक अवधारणाओं से परिचित कराने के साथ-साथ उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षण एवं शोध के लिए प्रेरित करते हैं।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. आकांक्षा शर्मा ने किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में आदर्श मिश्रा, पूजा ठाकुर, धीरेंद्र पराते एवं सेवक राम का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। विश्वविद्यालय के फैकल्टी सदस्यों ने व्याख्यान में सक्रिय सहभागिता करते हुए उच्च शिक्षा नीति, पाठ्यचर्या निर्माण एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति के विभिन्न पहलुओं पर महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की।

फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम के माध्यम से विश्वविद्यालय द्वारा शिक्षकों को समकालीन उच्च शिक्षा की आवश्यकताओं से जोड़ने, उनके अकादमिक एवं व्यावसायिक कौशल को विकसित करने तथा गुणवत्तापूर्ण, नवाचारी और विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में निरंतर प्रयास किया जा रहा है। कार्यक्रम में डिप्टी रजिस्ट्रार डॉ श्रुति तिवारी, प्रो देवयानी चौबे सहित बड़ी संख्या में शिक्षक एवं शोधार्थी उपस्थित थे। डॉ परख सहगल, आदर्श मिश्रा, पूजा ठाकुर, धीरेंद्र पराते, ओम टेकाम ने सक्रिय सहयोग किया।कार्यक्रम का संचालन आकांक्षा शर्मा ने किया।

Dinesh Purwar

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