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8वें वेतन आयोग में बदलेगी ये खास स्कीम! केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी और भत्तों पर पड़ेगा बड़ा असर

नई दिल्ली

 केंद्रीय कर्मचारियों के लिए गठित आठवां वेतन आयोग मॉडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन' (MACP) स्कीम की समीक्षा कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट की मानें तो इस योजना में बदलाव की मांग की गई है। अब वेतन आयोग इस मांग पर गंभीरता से विचार कर रहा है।

क्या है मामला?
मिनिस्टीरियल स्टाफ एसोसिएशन (MSA), सर्वे ऑफ इंडिया ने अपने ज्ञापन में मांग की है कि MACP के तहत फाइनेंशियल अपग्रेडेशन (वित्तीय लाभ) केवल अगले पे मैट्रिक्स लेवल पर नहीं, बल्कि कर्मचारी के अगले प्रमोशनल पद के पे लेवल के हिसाब से दिया जाना चाहिए। MSA ने यह भी कहा कि अपग्रेडेशन की संख्या तीन से बढ़ाकर पांच की जानी चाहिए, जो नौकरी के 8, 15, 22, 28 और 32 साल पूरे होने पर मिलें। MSA के अनुसार, मौजूदा नियमों के तहत MACP में असल 'प्रमोशनल हायरार्की' के अगले वेतनमान के बजाय 'पे मैट्रिक्स' में अगला लेवल दिया जाता है।

इसके अलावा, फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशन्स (FNPO) ने 6, 12, 18, 24 और 30 वर्षों में पांच बार प्रमोशन का प्रस्ताव रखा। FNPO ने एक और अहम बदलाव की मांग की है। संगठन के मुताबिक अगर कोई कर्मचारी किसी प्रमोशन को स्वीकार नहीं करता है, तो उसके MACP लाभ को रोका या टाला नहीं जाना चाहिए। यानी MACP का लाभ प्रमोशन से अलग रखा जाना चाहिए।

उदाहरण से समझें
मिनिस्टीरियल स्टाफ एसोसिएशन ने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर कोई कर्मचारी लेवल-7 पर है और उसका अगला प्रमोशनल पद लेवल-10 का है, तो मौजूदा व्यवस्था में उसे MACP के तहत केवल लेवल-8 मिल सकता है। इससे वास्तविक प्रमोशन और वित्तीय लाभ के बीच बड़ा अंतर पैदा हो जाता है। एसोसिएशन ने कहा कि इससे कर्मचारियों का मनोबल गिरा है। ऐसे मामले भी सामने आए हैं जहाँ ज्यादा जिम्मेदारियों (जैसे ऑफिस सुपरिटेंडेंट) पर प्रमोट किए गए जूनियर स्टाफ लेवल 6 में ही बने रहते हैं जबकि उनके जूनियर, जिन्हें प्रमोशन नहीं मिला, उन्हें MACP के तहत लेवल 7 मिल जाता है।

इसके अलावा, राष्ट्रीय परिषद-जेसीएम स्टाफ साइड ने मांग की है कि प्रमोशन क्रम में MACP प्रोवाइड किया जाए, जिसका समर्थन कई अन्य यूनियनों ने भी किया है। रेलवे वरिष्ठ नागरिक कल्याण समिति ने 10 साल के अंतराल के मानवीय नुकसान को उजागर करते हुए कहा कि फाइनेंशियल अपग्रेडेशन के बीच 10 साल का लंबा अंतराल लंबे समय तक गतिरोध का कारण बनता है, खासकर उन कैडरों में जहां प्रमोशन के पद सीमित हैं। बता दें कि पिछले साल आठवें वेतन आयोग का गठन हुआ था। वेतन आयोग को 18 महीने में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपने की डेडलाइन मिली हुई है।

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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