राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय

मुख्यमंत्री योगी ऊंचाहार में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा के तीसरे दिन कथा श्रवण करने पहुंचे

 

 रायबरेली/ऊंचाहार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब तक भारत की धरती पर पावन कथाओं की परंपरा चलती रहेगी, सनातन की ध्वजा-पताका कभी झुकने नहीं पाएगी। सनातन की पताका ऊंची रहेगी तो भारत का कोई बाल बांका नहीं कर पाएगा। शिव भक्ति भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक एकता का आधार है। हिमालय से लेकर रामेश्वरम तक भगवान शिव के पवित्र ज्योतिर्लिंग भारत की सांस्कृतिक एकता और एकात्मकता का दर्शन कराते हैं।
 
मुख्यमंत्री रविवार को ऊंचाहार में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा के तीसरे दिन कथा श्रवण करने पहुंचे। कथा स्थल पर पहुंचते ही वेदपाठी बटुकों ने शंखनाद और डमरू की मंगल ध्वनि के बीच उनका स्वागत किया। प्रदेश सरकार के खाद्य, रसद एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री एवं ऊंचाहार विधायक मनोज पांडेय ने मुख्यमंत्री को शॉल, श्रीफल और कलश में गंगाजल भेंटकर उनका अभिनंदन किया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने व्यासपीठ को नमन किया और कथा व्यास पंडित प्रदीप मिश्रा का स्वागत एवं अभिनंदन किया। शिव महापुराण कथा का आयोजन कैबिनेट मंत्री मनोज पांडेय की ओर से किया गया है।
 
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि सनातन परंपरा में जिसे ईश्वर की भक्ति प्राप्त हो गई, मानो उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो गईं। अवध की धरती इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। रामायण में प्रभु की भक्ति हनुमान को मिली तो वे लोकपूज्य हो गए। आज भी प्रत्येक सनातन धर्मावलंबी हनुमान की पूजा और अनुष्ठान से जुड़कर स्वयं को धन्य महसूस करता है। शिव भक्ति भी मनुष्य को इसी प्रकार लोकमंगल और कल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ाती है।
 
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में वेशभूषा, खान-पान और रहन-सहन अलग हो सकता है, लेकिन शिव के प्रति भक्ति का भाव एक है। तमिलनाडु के नागरिकों में शिव के प्रति जो भक्ति है, वही उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के श्रद्धालुओं में दिखाई देती है। पूर्वोत्तर से लेकर महाराष्ट्र और गुजरात तक यही भाव है। शिव के ज्योतिर्लिंग उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक भारत की सांस्कृतिक एकता को मजबूत करते हैं।
 
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि भगवान शिव लोकमंगल के देवता हैं। लोक कल्याण के लिए वे विष को भी धारण कर लेते हैं। वे नकारात्मक शक्तियों को दूर करते हैं और समाज के विकारों को किनारे कर लोकमंगल का मार्ग प्रशस्त करते हैं। यही सनातन धर्म की सबसे बड़ी पूंजी है। पावन कथाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार होना चाहिए और समाज को ऐसे आयोजनों से जुड़ना चाहिए। इनसे मिलने वाली सकारात्मक ऊर्जा समाज और राष्ट्र दोनों को शक्ति प्रदान करती है।
 
उन्होंने कहा कि सनातन धर्म ने धर्म को केवल पूजा पद्धति तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे समाज की जीवन शक्ति, व्यक्ति के कर्तव्य और राष्ट्र की प्रेरक शक्ति के रूप में स्वीकार किया है। मध्यकाल में राजनीतिक कमजोरियों के कारण देश को विदेशी आक्रांताओं का सामना करना पड़ा। भारत के धर्मस्थलों और आस्था पर प्रहार हुए, लेकिन व्यासपीठों से निकली आध्यात्मिक धारा ने सामाजिक और सांस्कृतिक एकता को कमजोर नहीं होने दिया।
 
मुख्यमंत्री योगी ने गोस्वामी तुलसीदास का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने मध्यकाल में रामकथा के माध्यम से समाज को जोड़ने और उसकी चेतना जगाने का कार्य किया। उन्हें अकबर के दरबार में नवरत्न बनने का प्रस्ताव मिला, लेकिन उन्होंने साफ कर दिया कि उनका राजा केवल राम हैं। उस कठिन कालखंड में रामलीलाओं और रामकथा के माध्यम से 'राजा रामचंद्र की जय' का उद्घोष समाज की चेतना जगाने वाला शंखनाद था। व्यासपीठों ने हर कालखंड में समाज को नई प्रेरणा देने के साथ राष्ट्र के उन्नयन की नींव मजबूत की है।
 
मुख्यमंत्री योगी ने उत्तर प्रदेश की आध्यात्मिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि जीवन में मर्यादा की बात होती है तो हम अयोध्या की ओर देखते हैं। चेतना की चर्चा होती है तो काशी, भक्ति की बात आती है तो मथुरा-वृंदावन और समरसता की चर्चा होती है तो प्रयागराज की ओर देखते हैं। नैमिषारण्य और शुकतीर्थ की धरती ने हजारों वर्ष पहले ज्ञान की उस परंपरा को आगे बढ़ाया, जिसे ऋषियों ने पुराणों के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित किया।
 
मुख्यमंत्री योगी ने कथा के आयोजन के लिए कैबिनेट मंत्री मनोज पांडेय और उनके परिवार को धन्यवाद दिया। कहा कि ऊंचाहार के लोग सौभाग्यशाली हैं कि उन्होंने ऐसे जनप्रतिनिधि को चुना है, जो क्षेत्र की विरासत को सुरक्षित रखने के साथ विकास को भी आगे बढ़ा रहे हैं। यहां विरासत और विकास दोनों की यात्रा एक साथ चल रही है और यह यात्रा निरंतर आगे बढ़ती रहेगी।
 
मुख्यमंत्री योगी ने कथा व्यास पंडित प्रदीप मिश्रा और उपस्थित श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सभी शिव महापुराण कथा के रस को अंगीकार कर अपने जीवन और जन्म को धन्य करें। उन्होंने 'नमः पार्वती पतये, हर-हर महादेव' के उद्घोष के साथ अपना संबोधन पूरा किया।

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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