शिक्षा

कॉन्वेंट, प्राइवेट और इंटरनेशनल स्कूल में क्या फर्क? बच्चे के लिए स्कूल चुनते समय जानें ये बातें

बच्चे के लिए स्कूल चुनना माता-पिता के लिए आसान फैसला नहीं होता. आज के समय में स्कूलों के कई विकल्प मौजूद हैं. कुछ पैरेंट्स कॉन्वेंट स्कूल को प्राथमिकता देते हैं, कुछ प्राइवेट स्कूल को अच्छा मानते हैं, तो कुछ को इंटरनेशनल स्कूल बेहतर लगते हैं. ऐसे में अक्सर यह सवाल सामने आता है कि आखिर इन तीनों तरह के स्कूलों में क्या फर्क होता है? स्कूल का नाम देखकर यह तय करना सही नहीं होगा कि वहां पढ़ाई का स्तर कैसा है. किसी स्कूल का बेहतर होना कई बातों पर निर्भर करता है, जैसे वहां कौन सा करिकुलम पढ़ाया जाता है, पढ़ाने का तरीका कैसा है, स्कूल का माहौल कैसा है और बच्चे की सीखने की जरूरतें क्या हैं. इन तीनों में क्या फर्क होता है, चलिए जानते हैं.

कॉन्वेंट स्कूल
कॉन्वेंट स्कूल आमतौर पर किसी धार्मिक संस्था या चर्च से जुड़े बैकग्राउंड वाले स्कूलों को बोलते हैं. इन स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम की पढ़ाई आम देखने को मिलती है लेकिन केवल कॉन्वेंट नाम होने से स्कूल का बोर्ड या शिक्षा पद्धति तय नहीं होती. इसलिए एडमिशन से पहले यह देखना जरूरी है कि स्कूल किस बोर्ड से संबद्ध है और वहां पढ़ाई का तरीका कैसा है?

प्राइवेट स्कूल
भारत में प्राइवेट स्कूलों का बहुत क्रेज देखने को मिलता है. इनका संचालन आमतौर पर निजी संस्थान, सोसायटी, ट्रस्ट या कंपनी करती हैं. इन स्कूलों में पढ़ाई के साथ-साथ स्मार्ट क्लास, लैब, खेल, कंप्यूटर, एक्टिविटी और अन्य सुविधाओं पर जोर दिया जाता है. हालांकि, हर प्राइवेट स्कूल में सुविधाएं और पढ़ाई का स्तर एक जैसा नहीं होता. सरकारी स्कूलों की तुलना में प्राइवेट स्कूलों की फीस ज्यादा होती है.

कैसे होते हैं इंटरनेशनल स्कूल?
वहीं, इंटरनेशनल स्कूल ऐसे स्कूल होते हैं जो अक्सर पढ़ाई में अंतरराष्ट्रीय स्तर के करिकुलम, शिक्षण पद्धति और वैश्विक दृष्टिकोण  पर जोर देते हैं. यहां बच्चों को केवल किताबों तक सीमित रखने के बजाय प्रोजेक्ट, रिसर्च, प्रेजेंटेशन, क्रिटिकल थिंकिंग और अलग-अलग गतिविधियों के जरिए सीखने के अवसर दिए जा सकते हैं. हालांकि, इंटरनेशनल स्कूल नाम होने का मतलब यह जरूरी नहीं कि स्कूल किसी विदेशी बोर्ड से ही जुड़ा हो.

भारत में कुछ इंटरनेशनल स्कूल IB (International Baccalaureate) या Cambridge जैसे अंतरराष्ट्रीय बोर्ड से जुड़े होते हैं, जबकि कुछ स्कूल CBSE या अन्य बोर्ड से भी संबद्ध हो सकते हैं. इन स्कूलों में आमतौर पर अंग्रेजी मीडियम, आधुनिक सुविधाएं, लैब, स्पोर्ट्स और एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज पर खास ध्यान दिया जाता है. फीस भी कई मामलों में सामान्य प्राइवेट स्कूलों से अधिक हो सकती है.

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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