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नर्मदापुरम जिला एवं सत्र न्यायालय ने की अपील खारिज, 5 वर्ष के सश्रम कारावास और ₹10 हजार जुर्माने की मिली सजा

भोपाल 

नर्मदापुरम के जिला एवं सत्र न्यायालय ने मध्यप्रदेश स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (एमपीएसटीएफ) द्वारा गिरफ्तार किये गये बाघ के अवैध शिकार और उसकी हड्डियों की अंतर्राष्ट्रीय तस्करी के आरोपी ताशी शेरपा की अपील खारिज कर दी है। न्यायालय ने 17 सितंबर 2026 को निर्णय सुनाते हुए अंतर्राष्ट्रीय वन्यजीव तस्कर की 5 वर्ष के सश्रम कारावास और ₹10 हजार के अर्थदंड की सजा को बरकरार रखा। न्यायालय ने ताशी शेरपा को अंतर्राष्ट्रीय बाघ तस्करी गिरोह की एक महत्वपूर्ण कड़ी माना।

मामले की विस्तृत सुनवाई के बाद दिसंबर 2022 में नर्मदापुरम (होशंगाबाद) के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने 27 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 5-5 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। जांच के दौरान एमपीएसटीएफ ने इंटरपोल, वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) सहित अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों से भी सहयोग प्राप्त किया।

जुलाई 2015 में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व, नर्मदापुरम में बाघ के अवैध शिकार और उसकी हड्डियों की चीन में अवैध की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मामले की जांच एमपीएसटीएफ को सौंपी गई। लंबे समय से फरार चल रहे ताशी शेरपा को एमपीएसटीएफ की टीम ने लगातार प्रयासों के बाद 23 जनवरी 2024 को अंतर्राष्ट्रीय सीमा के समीप पानी टंकी, सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल) से गिरफ्तार किया। उसके कब्जे से फर्जी भारतीय दस्तावेज, विदेशी मुद्रा, नेपाली-भूटानी मुद्रा और तीन मोबाइल फोन बरामद किए गए।

जांच के दौरान एमपीएसटीएफ ने वैज्ञानिक एवं साइबर साक्ष्यों को इकठ्ठा किया। ताशी शेरपा के ब्रेन मैपिंग (बीईओएस) और नार्को एनालिसिस परीक्षण कराए गए। जांच में बाघ की हड्डियों और पैंगोलिन स्केल्स की तस्करी में उसकी संलिप्तता से संबंधित महत्वपूर्ण साक्ष्य प्राप्त हुए। साइबर डेटा को भी न्यायालय में महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया गया। जांच में एक संगठित गिरोह का भी पर्दाफाश हुआ, जिसमें कुल 30 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। ताशी शेरपा के गिरोह का नेटवर्क भारत, नेपाल, भूटान और चीन तक फैला हुआ था। वह चीन के स्वायत्त क्षेत्र तिब्बत का मूल निवासी है।

मामले की विस्तृत सुनवाई के बाद दिसंबर 2022 में नर्मदापुरम (होशंगाबाद) के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने 27 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 5-5 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। जांच के दौरान STSF ने इंटरपोल, वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) सहित अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों से भी सहयोग प्राप्त किया।

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, ताशी शेरपा को अंतरराष्ट्रीय बाघ तस्करी गिरोह की एक महत्वपूर्ण कड़ी माना गया है, जिसका नेटवर्क भारत, नेपाल, भूटान और चीन तक फैला हुआ था। वह चीन के स्वायत्त क्षेत्र तिब्बत का मूल निवासी है।

जिला एवं सत्र न्यायालय ने मामले में STSF द्वारा प्रस्तुत मौखिक, दस्तावेजी और वैज्ञानिक साक्ष्यों को संदेह से परे पाया और ताशी शेरपा की अपील को निराधार मानते हुए खारिज कर दिया। इसके साथ ही पूर्व में सुनाई गई 5 वर्ष के सश्रम कारावास और ₹10 हजार अर्थदंड की सजा प्रभावी बनी रही।

 

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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