राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय

भारतीय मूल की नावी पिल्लई को मिला नोबेल शांति पुरस्कार, ट्रंप को नहीं मिला सम्मान

नई दिल्ली
शांति के नोबेल प्राइज के लिए खुद को उपयुक्त दावेदार बताने वाले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस बार भी इंतजार करते रह गए. इस बार भी उनकी चर्चा तक नहीं हुई.  संयुक्त राष्ट्र की पूर्व मानवाधिकार प्रमुख भारतीय मूल की नवनेथम नावी पिल्लई को 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया है. उन्हें यह अवार्ड अंतरराष्ट्रीय कानून में उनके योगदान के लिए दिया गया है. नोबेल जूरी ने शुक्रवार को नॉर्वे के ओस्लो में इसकी घोषणा की। 

शांति का नोबेल पुरस्कार पाने वाली नावी पिल्लई ने, दुनिया भर में हाल ही में हुई हिंसा के लिए देशों और राष्ट्रीय नेताओं को जवाबदेह ठहराया है. उन्होंने हिंसा व संघर्ष के पीड़ितों के लिए उम्मीद जगाई है. पिल्लई दक्षिण अफ्रीका की 85 साल की न्यायाधीश हैं। 

अपने टाउन की महिला महिला वकील बनी
दक्षिण अफ्रीका की नागरिक पिल्लई 1967 में अपने होमटाउन नेटाल में वकालत शुरू करने वाली पहली महिला थीं. अगले कुछ वर्षों में, उन्होंने रंगभेद विरोधी कार्यकर्ताओं के लिए बचाव पक्ष की वकील के रूप में काम किया. उन्होंने क्वाज़ुलु-नताल विश्वविद्यालय में लेक्चरर के रूप में भी कार्य किया और बाद में डरबन वेस्टविले विश्वविद्यालय की परिषद की उपाध्यक्ष नियुक्त हुईं। 

1995 में, रंगभेद खत्म होने के बाद पिल्लई को दक्षिण अफ़्रीकी उच्च न्यायालय में कार्यवाहक न्यायाधीश नियुक्त किया गया. उसी वर्ष संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा रवांडा के लिए अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरण में न्यायाधीश के रूप में चुना गया.  1 सितंबर 2008 को उन्हें  संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त नियुक्त किया गया था।  

शांति का नोबेल प्राइज विजेता की घोषणा करते हुए, नोबेल प्राइज कमेटी के X हैंडल से से जो पोस्ट शेयर किया गया है. इसमें लिखा है कि नवी पिल्लै हमारे समय में अंतरराष्ट्रीय कानूनी सिद्धांतों की महान पैरोकारों में से एक हैं. उनका शानदार करियर हमें वैश्विक स्तर पर कानून के शासन का समर्थन करने, उसे मजबूत करने और उसका विस्तार करने की जरूरत की याद दिलाता है। 

न्याय और मानवीय गरिमा के प्रति नवी पिल्लई की प्रतिबद्धता उन सभी लोगों के लिए उम्मीद और प्रेरणा का स्रोत है जो एक अधिक शांतिपूर्ण दुनिया बनाना चाहते हैं.नावी पिल्लई संयुक्त राष्ट्र के अधिकृत फिलिस्तीनी क्षेत्र जांच आयोग की अध्यक्ष थीं, जिसने पिछले साल यह निष्कर्ष निकाला था कि इज़रायल ने गाजा में नरसंहार किया है. इज़राइल ने इस रिपोर्ट को अपमानजनक बताकर खारिज कर दिया था। 

नोबेल प्राइज समिति ने शांति का पुरस्कार विजेता की घोषणा करते हुए लिखा है कि इस वर्ष का नोबेल शांति पुरस्कार प्रदान करते हुए, नॉर्वे की नोबेल समिति दुनिया को यह याद दिलाना चाहती है कि राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कानून का शासन उस व्यवस्था का आधार है जिसे हमने शांति सुनिश्चित करने और संघर्षों को अहिंसक रूप से हल करने के लिए स्थापित किया है. शांति के लिए न्याय आवश्यक है। 

इतिहास गवाह है कि कानून के शासन के बिना चलने वाली दुनिया अन्यायपूर्ण, अविवेकी और अमानवीय होती है. न्यायाधीश – जो व्यवस्था और अराजकता के बीच संतुलन बनाए रखते हैं, इसलिए प्रशंसा के पात्र हैं. लेकिन आज, जब इन्हीं न्यायाधीशों पर प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं और उनकी संस्थाओं पर हमले हो रहे हैं, तो हमें साहस, दूरदर्शिता और दृढ़ संकल्प वाले लोगों की जरूरत है – ऐसे गुण जो नावी पिल्लई ने न्यायपीठ में अपने काम से दिखाए हैं। 

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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