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मां दुर्गा के वाहन सिंह-बाघ ही क्यों? जानिए इनके पीछे छिपा धार्मिक और आध्यात्मिक रहस्य

शारदीय नवरात्रि : मां दुर्गा के वाहन जंगली जानवर ही क्यों होते हैं? यह सवाल केवल धार्मिक मान्यता से नहीं, बल्कि प्रकृति, शक्ति और मनुष्य के भीतर छिपी प्रवृत्तियों से भी जुड़ा हुआ है. मां दुर्गा को आदिशक्ति, साहस और नकारात्मक शक्तियों का नाश करने वाली देवी माना जाता है. उनके विभिन्न स्वरूपों के साथ अलग-अलग वाहन जुड़े हैं और इनमें अधिकांश वाहन शक्तिशाली और जंगलों में स्वतंत्र रहने वाले हैं. यह केवल एक संयोग नहीं, बल्कि इनके पीछे एक खास मान्यता भी है.

मां दुर्गा का सबसे मुख्य वाहन सिंह है. सिंह को जंगल का शक्तिशाली और निर्भीक जीव माना जाता है. वह अपनी शक्ति, साहस और पराक्रम के लिए जाना जाता है. मां दुर्गा का सिंह पर सवार होना, इस बात का प्रतीक है कि शक्ति जब धर्म के पक्ष में होती है तो वह अहंकार, अत्याचार और आसुरी प्रवृत्तियों पर नियंत्रण स्थापित कर सकती है. सिंह को मां के साहस और निर्भीकता से भी जोड़ा जाता है. देवी के हाथों में शस्त्र और उनके साथ सिंह का होना यह संदेश देता है कि केवल शक्ति का होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उस शक्ति का सही दिशा में उपयोग भी जरूरी है.

कई चित्रों और धार्मिक परंपराओं में मां दुर्गा को बाघ के साथ भी दर्शाया जाता है. उसमें आक्रामकता, गति, एकाग्रता और शिकार पर नियंत्रण जैसी विशेषताएं होती हैं. इसलिए बाघ को देवी की प्रचंड शक्ति और सक्रिय ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है. सिंह हो या बाघ, दोनों ही मनुष्य के नियंत्रण से बाहर रहने वाले वन्य जीव हैं. देवी का उन पर सवार होना यह दर्शाता है कि दिव्य शक्ति उन ताकतों पर भी नियंत्रण रख सकती है जिन्हें सामान्य मनुष्य नियंत्रित नहीं कर सकता.

यहां जंगल का अर्थ भी महत्वपूर्ण है. जंगल ऐसी जगह है जहां प्रकृति अपने मूल और स्वतंत्र स्वरूप में दिखाई देती है. वहां रहने वाले जीव अपनी प्राकृतिक शक्ति के साथ जीवन जीते हैं. मां दुर्गा को प्रकृति की मूल शक्ति माना गया है. इसलिए उनके साथ ऐसे जीवों का जुड़ाव प्रकृति और शक्ति के संबंध को दर्शाता है. देवी केवल घर-परिवार की सुख-समृद्धि की शक्ति नहीं हैं, बल्कि वे प्रकृति के उस प्रचंड रूप का भी प्रतिनिधित्व करती हैं जो जरूरत पड़ने पर विनाशकारी शक्तियों का अंत कर सकता है.

सिंह-बाघ का असली मतलब क्या है?
मां दुर्गा के वाहन का एक अर्थ मनुष्य के भीतर मौजूद पशु प्रवृत्तियों से भी है. क्रोध, अहंकार, भय, लोभ और हिंसा जैसी प्रवृत्तियां जब अनियंत्रित हो जाती हैं तो मनुष्य के व्यवहार को प्रभावित करती हैं. सिंह और बाघ जैसी शक्तिशाली प्रवृत्तियों पर देवी का विराजमान होना यह संदेश देता है कि विवेक और चेतना के द्वारा अपनी आंतरिक शक्तियों को नियंत्रित किया जा सकता है. शक्ति को दबाना नहीं, बल्कि उसे सही दिशा देना ही देवी के स्वरूप का संदेश है.

इस तरह मां दुर्गा के वाहन केवल सवारी के साधन नहीं हैं. वे देवी के गुणों, प्रकृति की शक्ति और मनुष्य के भीतर मौजूद प्रवृत्तियों के प्रतीक हैं. सिंह और बाघ जैसे वाहन यह संदेश देते हैं कि वास्तविक शक्ति वही है जो साहस के साथ-साथ नियंत्रण, विवेक और धर्म का साथ रखे. यही कारण है कि मां दुर्गा के वाहन के रूप में जंगल के शक्तिशाली जीवों की कल्पना भारतीय धार्मिक परंपरा में विशेष अर्थ रखती है.

Dinesh Kumar Purwar

Editor, Pramodan News

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